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Bilaspur News: जिले में नौ नए ब्लैक स्पॉट चिह्नित, भूस्खलन से 10 मार्ग प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 10 Jan 2026 11:58 PM IST
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झंडूता क्षेत्र की मांडवा पहाड़ी के पास सड़क। फाइल फोटो
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असाइनमेंट
लोक निर्माण विभाग ने की 10 स्थानों की 35 करोड़ की डीपीआर तैयार
चिह्नित नए ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए विभाग शुरू करेगा कवायद
-एफडी के कंसल्टेंट और राज्य सरकार की टीम ने किया मांडवा घाट का निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में लगातार सामने आ रहे सड़क हादसों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की दिशा में पहल तेज कर दी है। जिले में वर्तमान में कुल नौ नए दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें लखनपुर, वेटनरी चौक, बागखुर्द, भगेड़, नस्वाल पट्टा, दधोल, दकड़ी चौक, हारकुकार, कुठेड़ा और ग्वालथाई शामिल हैं। इसके साथ ही भूस्खलन से प्रभावित मार्गों पर स्थायी समाधान के लिए 10 स्थानों की डीपीआर करीब 35 करोड़ रुपये की तैयार की गई है।
जिले के जिन नए स्थानों को मुख्य ब्लैक स्पॉट माना गया है, उनमें लखनपुर, वेटनरी चौक, बागखुर्द, भगेड़, नसवाल पट्टा, दधोल, दकड़ी चौक, हारकुकार, कुठेड़ा और ग्वालथाई शामिल हैं। इन इलाकों में सड़क की बनावट और यातायात दबाव के चलते बार-बार हादसे सामने आ रहे हैं। ब्लैक स्पॉट की पहचान तय मानकों के आधार पर की गई है। किसी सड़क खंड के 500 मीटर दायरे में पिछले तीन वर्ष के दौरान पांच या उससे अधिक घातक हादसे होने पर उसे ब्लैक स्पॉट माना जाता है। इसके अलावा जिन स्थानों पर जोखिम बना रहता है, उन्हें रिस्क प्वाइंट के तौर पर पहले ही सुधारा जा रहा है। पुलिस, एचआरटीसी, लोक निर्माण विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा के संयुक्त सर्वे में जिले में कुल 585 दुर्घटना संभावित स्थल सामने आए थे। इनमें से 565 स्थानों पर सुधार कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इन स्थलों पर सड़क चौड़ीकरण, क्रैश बैरियर, पैरापिट वॉल, रिफ्लेक्टर, संकेतक बोर्ड और गति नियंत्रण उपाय लगाए गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए पहली बार जिले में लैंडस्लाइड मिटिगेशन योजना तैयार की गई है। इसके तहत 10 संवेदनशील स्थलों के लिए 35 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाई गई है। इनमें मांडवा घाट, री-रडोह और बाघछाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां बरसात के दौरान सड़कें बार-बार प्रभावित होती हैं। इन डीपीआर की तकनीकी जांच के लिए हाल ही में एएफडी के कंसल्टेंट और राज्य सरकार की टीम ने मांडवा घाट सहित अन्य स्थलों का दौरा कर हालात का जायजा लिया है।
कोट
जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। जिले में 585 दुर्घटना संभावित स्थलों में से 565 को सुधारा जा चुका है। इसके साथ ही पहली बार भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के लिए 35 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। सुधार कार्य पूरे होने के बाद ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा मजबूत होगी। उम्मीद है कि बेहतर संरचना, स्पष्ट संकेत व्यवस्था और भूस्खलन रोकथाम के उपायों से आने वाले समय में सड़क हादसों में कमी आएगी। - जीत ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग बिलासपुर
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चिह्नित नए ब्लैक स्पॉट को सुधारने के लिए विभाग शुरू करेगा कवायद
-एफडी के कंसल्टेंट और राज्य सरकार की टीम ने किया मांडवा घाट का निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में लगातार सामने आ रहे सड़क हादसों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की दिशा में पहल तेज कर दी है। जिले में वर्तमान में कुल नौ नए दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इनमें लखनपुर, वेटनरी चौक, बागखुर्द, भगेड़, नस्वाल पट्टा, दधोल, दकड़ी चौक, हारकुकार, कुठेड़ा और ग्वालथाई शामिल हैं। इसके साथ ही भूस्खलन से प्रभावित मार्गों पर स्थायी समाधान के लिए 10 स्थानों की डीपीआर करीब 35 करोड़ रुपये की तैयार की गई है।
जिले के जिन नए स्थानों को मुख्य ब्लैक स्पॉट माना गया है, उनमें लखनपुर, वेटनरी चौक, बागखुर्द, भगेड़, नसवाल पट्टा, दधोल, दकड़ी चौक, हारकुकार, कुठेड़ा और ग्वालथाई शामिल हैं। इन इलाकों में सड़क की बनावट और यातायात दबाव के चलते बार-बार हादसे सामने आ रहे हैं। ब्लैक स्पॉट की पहचान तय मानकों के आधार पर की गई है। किसी सड़क खंड के 500 मीटर दायरे में पिछले तीन वर्ष के दौरान पांच या उससे अधिक घातक हादसे होने पर उसे ब्लैक स्पॉट माना जाता है। इसके अलावा जिन स्थानों पर जोखिम बना रहता है, उन्हें रिस्क प्वाइंट के तौर पर पहले ही सुधारा जा रहा है। पुलिस, एचआरटीसी, लोक निर्माण विभाग और 108 एंबुलेंस सेवा के संयुक्त सर्वे में जिले में कुल 585 दुर्घटना संभावित स्थल सामने आए थे। इनमें से 565 स्थानों पर सुधार कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इन स्थलों पर सड़क चौड़ीकरण, क्रैश बैरियर, पैरापिट वॉल, रिफ्लेक्टर, संकेतक बोर्ड और गति नियंत्रण उपाय लगाए गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए पहली बार जिले में लैंडस्लाइड मिटिगेशन योजना तैयार की गई है। इसके तहत 10 संवेदनशील स्थलों के लिए 35 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाई गई है। इनमें मांडवा घाट, री-रडोह और बाघछाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां बरसात के दौरान सड़कें बार-बार प्रभावित होती हैं। इन डीपीआर की तकनीकी जांच के लिए हाल ही में एएफडी के कंसल्टेंट और राज्य सरकार की टीम ने मांडवा घाट सहित अन्य स्थलों का दौरा कर हालात का जायजा लिया है।
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जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। जिले में 585 दुर्घटना संभावित स्थलों में से 565 को सुधारा जा चुका है। इसके साथ ही पहली बार भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के लिए 35 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। सुधार कार्य पूरे होने के बाद ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा मजबूत होगी। उम्मीद है कि बेहतर संरचना, स्पष्ट संकेत व्यवस्था और भूस्खलन रोकथाम के उपायों से आने वाले समय में सड़क हादसों में कमी आएगी। - जीत ठाकुर, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग बिलासपुर

झंडूता क्षेत्र की मांडवा पहाड़ी के पास सड़क। फाइल फोटो