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Bilaspur News: शिकायतकर्ता को राहत, 8 साल पुराने मारपीट मामले की शिकायत फिर होगी बहाल

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:55 PM IST
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Relief for complainant: Complaint in 8-year-old assault case to be revived.
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एक दिन की गैरहाजिरी पर खारिज हुई थी शिकायत, सत्र न्यायालय ने रद्द किया आदेश
घुमारवीं अदालत ने निचली अदालत का फैसला पलटा, 24 जून को पेश होने के निर्देश


संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने वर्ष 2016 के एक मारपीट एवं धमकी मामले में शिकायतकर्ता को बड़ी राहत देते हुए निचली अदालत द्वारा शिकायत खारिज किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने शिकायत को उसके मूल नंबर पर बहाल करने के आदेश दिए हैं।
मामला भराड़ी क्षेत्र के कोटलू गांव की निवासी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार 13 अप्रैल 2016 को गांव के कुछ लोगों ने उसके घर पर पथराव किया, घर में घुसकर सीढ़ियों को नुकसान पहुंचाया, मारपीट की और जान से मारने की धमकियां दीं। इस संबंध में पुलिस थाना भराड़ी में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने पक्षों के बीच दीवानी विवाद लंबित होने का हवाला देते हुए मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी थी। शिकायतकर्ता ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, जिसके बाद अदालत ने पुनः जांच के आदेश दिए। दोबारा जांच के बाद भी पुलिस ने अपनी पूर्व रिपोर्ट बरकरार रखी। इसके बाद शिकायतकर्ता की आपत्तियों को निजी शिकायत मानते हुए अदालत ने प्रारंभिक साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिए थे।
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3 अक्तूबर 2024 को अनुपस्थित रहने पर हुई थी खारिज
मामला 3 अक्तूबर
2024 को प्रारंभिक साक्ष्य के लिए लगा था, लेकिन उस दिन शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हो सके। इसके चलते न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शिकायत को डिफॉल्ट में खारिज कर दिया था।
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इसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने पुनरीक्षण याचिका दायर कर कहा कि उन्होंने गलती से अगली तारीख 3 अक्तूबर की जगह 13 अक्टूबर 2024 नोट कर ली थी। साथ ही वह अस्वस्थ थीं और उनके अधिवक्ता भी उस दिन उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने दलील दी कि अनुपस्थिति जानबूझकर नहीं थी और एक दिन की गैरहाजिरी के आधार पर शिकायत खारिज नहीं की जानी चाहिए।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने निर्णय में कहा कि शिकायतकर्ता शुरू से मामले की पैरवी कर रही थीं और केवल एक अवसर पर अनुपस्थित रहीं। अदालत ने माना कि एकमात्र गैरहाजिरी के आधार पर शिकायत खारिज करना न्याय के हित में नहीं है। न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य आपराधिक न्याय का निष्पक्ष प्रशासन सुनिश्चित करना है। अदालत ने 3 अक्टूबर 2024 का आदेश निरस्त करते हुए शिकायत को बहाल कर दिया है और पक्षों को 24 जून 2026 को संबंधित निचली अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। घुमारवीं की अदालत ने माना कि केवल एक दिन की गैरहाजिरी के आधार पर शिकायत खारिज करना न्याय के हित में नहीं, इसलिए 8 वर्ष पुराने मामले की सुनवाई फिर शुरू होगी।
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