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Bilaspur News: बरसात में बढ़ा सर्पदंश का खतरा, इस वर्ष अब तक 13 मामले आए सामने, एक मौत
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जिला स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की, कहा-सर्पदंश पर झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़े लोग
पीड़ित को जल्द पहुंचाए अस्पताल, जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी-सीएचसी तक उपलब्ध है एंटी-वेनम
र्तमान में जिले में करीब 1100 एंटी-वेनम डोज उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मानसून के साथ जिले में सर्पदंश के मामलों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। खेतों, जंगलों और झाड़ियों में सांपों की सक्रियता बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा अधिक बना हुआ है। ऐसे में जिला स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और सर्पदंश पर किसी भी तरह की झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। विभाग का कहना है कि समय पर एंटी-वेनम मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक जिले में सर्पदंश के 13 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं झंडूता क्षेत्र में एक मौत हो चुकी है। हालांकि वो स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में दर्ज नहीं है। वहीं वर्ष 2025 में जिले में 59 मामले सामने आए थे। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक इन मामलों में सर्पदंश से किसी मरीज की मौत दर्ज नहीं हुई है। कई बार मरीज सीधे उच्च संस्थानों में पहुंच जाते हैं या अस्पताल आने में देरी कर देते हैं, जिससे सभी मामलों का रिकॉर्ड स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पाता। सीएमओ डॉक्टर शशि दत्त शर्मा ने कहा कि जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-वेनम उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में जिले में करीब 1100 एंटी-वेनम डोज उपलब्ध हैं। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में औसतन पांच डोज रखी गई हैं, ताकि किसी भी मरीज को शुरुआती उपचार के लिए इंतजार न करना पड़े। सर्पदंश के बाद सबसे महत्वपूर्ण गोल्डन टाइम होता है। मरीज को जितनी जल्दी एंटी-वेनम मिलता है, उसके स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में पहुंचने पर प्रशिक्षित एमबीबीएस चिकित्सक मरीज को एंटी-वेनम दे सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष विशेषज्ञ की अनिवार्यता नहीं होती। यदि मरीज की हालत गंभीर हो या उसे वेंटिलेटर अथवा गहन चिकित्सा की जरूरत हो तो प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे उच्च स्वास्थ्य संस्थान रेफर किया जाता है। एंटी-वेनम देने के दौरान कुछ मरीजों में एलर्जी या अन्य रिएक्शन की संभावना रहती है। इसे देखते हुए अस्पतालों में आवश्यक आपातकालीन दवाएं भी उपलब्ध रहती हैं, ताकि किसी भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया का तत्काल उपचार किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जीवन बचाने के लिए एंटी-वेनम देना प्राथमिकता होती है और इसके बाद मरीज की स्थिति के अनुसार आगे का उपचार किया जाता है। बरसात के मौसम में जिले के ग्रामीण इलाकों में खेतों, घास के ढेर, झाड़ियों और पत्थरों के बीच सांप अधिक निकलते हैं। ऐसे में किसान, मजदूर और जंगल से जुड़े कार्य करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सांप के काटने पर समय बर्बाद न करें और सीधे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचें।
सर्पदंश होने पर तुरंत क्या करें
मरीज को घबराने न दें और शांत रखें। काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं और स्थिर रखें। तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। झाड़-फूंक, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसी गलत पद्धतियों से बचें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। यदि संभव हो तो सांप का रंग या पहचान याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने का प्रयास न करें।
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बरसात में ऐसे करें बचाव
खेतों और झाड़ियों में जाते समय लंबे जूते और पूरे कपड़े पहनें। रात के समय हमेशा टॉर्च का प्रयोग करें। घर के आसपास झाड़ियां, कूड़ा और पत्थरों के ढेर न रहने दें। लकड़ी, घास या अनाज के ढेर में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें। जमीन पर सोने से बचें और बच्चों को झाड़ियों में अकेले न जाने दें। घर या खेत में सांप दिखाई देने पर उसे पकड़ने की कोशिश न करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
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पीड़ित को जल्द पहुंचाए अस्पताल, जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी-सीएचसी तक उपलब्ध है एंटी-वेनम
र्तमान में जिले में करीब 1100 एंटी-वेनम डोज उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मानसून के साथ जिले में सर्पदंश के मामलों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। खेतों, जंगलों और झाड़ियों में सांपों की सक्रियता बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा अधिक बना हुआ है। ऐसे में जिला स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और सर्पदंश पर किसी भी तरह की झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। विभाग का कहना है कि समय पर एंटी-वेनम मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक जिले में सर्पदंश के 13 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं झंडूता क्षेत्र में एक मौत हो चुकी है। हालांकि वो स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में दर्ज नहीं है। वहीं वर्ष 2025 में जिले में 59 मामले सामने आए थे। विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक इन मामलों में सर्पदंश से किसी मरीज की मौत दर्ज नहीं हुई है। कई बार मरीज सीधे उच्च संस्थानों में पहुंच जाते हैं या अस्पताल आने में देरी कर देते हैं, जिससे सभी मामलों का रिकॉर्ड स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पाता। सीएमओ डॉक्टर शशि दत्त शर्मा ने कहा कि जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी-वेनम उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में जिले में करीब 1100 एंटी-वेनम डोज उपलब्ध हैं। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में औसतन पांच डोज रखी गई हैं, ताकि किसी भी मरीज को शुरुआती उपचार के लिए इंतजार न करना पड़े। सर्पदंश के बाद सबसे महत्वपूर्ण गोल्डन टाइम होता है। मरीज को जितनी जल्दी एंटी-वेनम मिलता है, उसके स्वस्थ होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। इसलिए किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में पहुंचने पर प्रशिक्षित एमबीबीएस चिकित्सक मरीज को एंटी-वेनम दे सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष विशेषज्ञ की अनिवार्यता नहीं होती। यदि मरीज की हालत गंभीर हो या उसे वेंटिलेटर अथवा गहन चिकित्सा की जरूरत हो तो प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे उच्च स्वास्थ्य संस्थान रेफर किया जाता है। एंटी-वेनम देने के दौरान कुछ मरीजों में एलर्जी या अन्य रिएक्शन की संभावना रहती है। इसे देखते हुए अस्पतालों में आवश्यक आपातकालीन दवाएं भी उपलब्ध रहती हैं, ताकि किसी भी प्रतिकूल प्रतिक्रिया का तत्काल उपचार किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जीवन बचाने के लिए एंटी-वेनम देना प्राथमिकता होती है और इसके बाद मरीज की स्थिति के अनुसार आगे का उपचार किया जाता है। बरसात के मौसम में जिले के ग्रामीण इलाकों में खेतों, घास के ढेर, झाड़ियों और पत्थरों के बीच सांप अधिक निकलते हैं। ऐसे में किसान, मजदूर और जंगल से जुड़े कार्य करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि सांप के काटने पर समय बर्बाद न करें और सीधे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचें।
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सर्पदंश होने पर तुरंत क्या करें
मरीज को घबराने न दें और शांत रखें। काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं और स्थिर रखें। तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। झाड़-फूंक, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसी गलत पद्धतियों से बचें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें। यदि संभव हो तो सांप का रंग या पहचान याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने का प्रयास न करें।
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बरसात में ऐसे करें बचाव
खेतों और झाड़ियों में जाते समय लंबे जूते और पूरे कपड़े पहनें। रात के समय हमेशा टॉर्च का प्रयोग करें। घर के आसपास झाड़ियां, कूड़ा और पत्थरों के ढेर न रहने दें। लकड़ी, घास या अनाज के ढेर में हाथ डालने से पहले सावधानी बरतें। जमीन पर सोने से बचें और बच्चों को झाड़ियों में अकेले न जाने दें। घर या खेत में सांप दिखाई देने पर उसे पकड़ने की कोशिश न करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें।