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Bilaspur News: गाहर पंचायत में स्टाफ की कमी, ग्रामीणों के काम अटके
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सचिव तीन दिन और तकनीकी सहायक-रोजगार सेवक सप्ताह में एक-एक दिन ही उपलब्ध
प्रधान बोले- विकास कार्यों की प्रक्रिया में हो रही देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। उप तहसील भराड़ी के तहत गाहर पंचायत में कर्मचारियों की सीमित उपलब्धता के कारण ग्रामीणों को अपने जरूरी काम करवाने के लिए बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पांच हजार से अधिक आबादी वाली पंचायत में पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की नियमित मौजूदगी नहीं होने से जहां लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं विकास कार्यों की रफ्तार पर भी असर पड़ने की बात पंचायत प्रतिनिधि कह रहे हैं।
पंचायत प्रधान अनिशा शर्मा के अनुसार पंचायत सचिव सप्ताह में केवल तीन दिन पंचायत में उपलब्ध रहते हैं। तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की ड्यूटी भी सप्ताह में महज एक-एक दिन है। प्रधान का कहना है कि इससे पंचायत में विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों की प्रक्रिया, तकनीकी जांच, कार्यों का निरीक्षण, मनरेगा से जुड़े कार्यों और निर्माण कार्यों की औपचारिकताएं प्रभावित होती हैं। किसी काम में कर्मचारी की जरूरत होने पर उनके पंचायत में आने वाले दिन का इंतजार करना पड़ता है। गाहर पंचायत में पांच हजार से अधिक लोग रहते हैं और पंचायत के अंतर्गत कई गांव आते हैं। ग्रामीणों को मनरेगा, रोजगार, विकास कार्यों, निर्माण संबंधी मामलों, प्रमाणपत्रों और अन्य पंचायत संबंधी कामों के लिए कार्यालय पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार संबंधित कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने पर काम उसी दिन नहीं हो पाता। दूरदराज के गांवों से पंचायत कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को ऐसे में खाली हाथ लौटकर दोबारा आना पड़ता है। इससे उनका समय और आने-जाने का खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों की लगातार मांग रहती है। किसी योजना या निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की सीमित उपलब्धता के कारण इन प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने में दिक्कत आती है। इसका सीधा असर कार्यों की गति पर पड़ता है। पंचायत कार्यालय में चौकीदार का पद भी रिक्त है। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार एक ओर पंचायत में काम का बोझ अधिक है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक पदों पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि कार्यालय की नियमित व्यवस्था के लिए चौकीदार का होना भी जरूरी है। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से रिक्त पद को भरने की मांग की है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पांच हजार से अधिक आबादी वाली पंचायत में लोगों की जरूरतें भी अधिक हैं। विकास कार्यों के अलावा ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और पंचायत स्तर की सेवाओं के लिए कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में कर्मचारियों की सीमित उपलब्धता से लोगों को असुविधा होती है। पंचायत में नियमित स्टाफ उपलब्ध होने से ग्रामीणों के काम समय पर निपटाने के साथ विकास कार्यों को भी गति मिल सकती है। प्रधान ने प्रशासन से गाहर पंचायत की आबादी और कार्यभार को देखते हुए पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंचायत में कर्मचारी जितने अधिक नियमित रूप से उपलब्ध होंगे, उतनी ही तेजी से ग्रामीणों के काम निपटाए जा सकेंगे और विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने रिक्त पड़े चौकीदार के पद को जल्द भरने की भी मांग की है।
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प्रधान बोले- विकास कार्यों की प्रक्रिया में हो रही देरी
संवाद न्यूज एजेंसी
भराड़ी (बिलासपुर)। उप तहसील भराड़ी के तहत गाहर पंचायत में कर्मचारियों की सीमित उपलब्धता के कारण ग्रामीणों को अपने जरूरी काम करवाने के लिए बार-बार पंचायत कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पांच हजार से अधिक आबादी वाली पंचायत में पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की नियमित मौजूदगी नहीं होने से जहां लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं विकास कार्यों की रफ्तार पर भी असर पड़ने की बात पंचायत प्रतिनिधि कह रहे हैं।
पंचायत प्रधान अनिशा शर्मा के अनुसार पंचायत सचिव सप्ताह में केवल तीन दिन पंचायत में उपलब्ध रहते हैं। तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की ड्यूटी भी सप्ताह में महज एक-एक दिन है। प्रधान का कहना है कि इससे पंचायत में विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों की प्रक्रिया, तकनीकी जांच, कार्यों का निरीक्षण, मनरेगा से जुड़े कार्यों और निर्माण कार्यों की औपचारिकताएं प्रभावित होती हैं। किसी काम में कर्मचारी की जरूरत होने पर उनके पंचायत में आने वाले दिन का इंतजार करना पड़ता है। गाहर पंचायत में पांच हजार से अधिक लोग रहते हैं और पंचायत के अंतर्गत कई गांव आते हैं। ग्रामीणों को मनरेगा, रोजगार, विकास कार्यों, निर्माण संबंधी मामलों, प्रमाणपत्रों और अन्य पंचायत संबंधी कामों के लिए कार्यालय पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार कई बार संबंधित कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने पर काम उसी दिन नहीं हो पाता। दूरदराज के गांवों से पंचायत कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को ऐसे में खाली हाथ लौटकर दोबारा आना पड़ता है। इससे उनका समय और आने-जाने का खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों की लगातार मांग रहती है। किसी योजना या निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने के लिए पंचायत स्तर पर कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की सीमित उपलब्धता के कारण इन प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने में दिक्कत आती है। इसका सीधा असर कार्यों की गति पर पड़ता है। पंचायत कार्यालय में चौकीदार का पद भी रिक्त है। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार एक ओर पंचायत में काम का बोझ अधिक है, वहीं दूसरी ओर आवश्यक पदों पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि कार्यालय की नियमित व्यवस्था के लिए चौकीदार का होना भी जरूरी है। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से रिक्त पद को भरने की मांग की है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि पांच हजार से अधिक आबादी वाली पंचायत में लोगों की जरूरतें भी अधिक हैं। विकास कार्यों के अलावा ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और पंचायत स्तर की सेवाओं के लिए कर्मचारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में कर्मचारियों की सीमित उपलब्धता से लोगों को असुविधा होती है। पंचायत में नियमित स्टाफ उपलब्ध होने से ग्रामीणों के काम समय पर निपटाने के साथ विकास कार्यों को भी गति मिल सकती है। प्रधान ने प्रशासन से गाहर पंचायत की आबादी और कार्यभार को देखते हुए पंचायत सचिव, तकनीकी सहायक और रोजगार सेवक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंचायत में कर्मचारी जितने अधिक नियमित रूप से उपलब्ध होंगे, उतनी ही तेजी से ग्रामीणों के काम निपटाए जा सकेंगे और विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने रिक्त पड़े चौकीदार के पद को जल्द भरने की भी मांग की है।
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