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Bilaspur News: घरेलू हिंसा मामले में पत्नी की अपील खारिज, निचली अदालत का फैसला बरकरार
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घरेलू हिंसा के आरोप साबित करने के लिए पेश नहीं किए गए पर्याप्त साक्ष्य
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने 2019 के आदेश को सही ठहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घरेलू हिंसा मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने पत्नी की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें घरेलू हिंसा की शिकायत को साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया गया था।मामला घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत दायर याचिका से जुड़ा है। महिला ने अदालत में पति और सास के खिलाफ घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, मारपीट और दहेज की मांग के आरोप लगाए थे।
महिला ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद उसे लगातार परेशान किया गया और उसे ससुराल छोड़कर मायके में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। महिला ने अदालत को बताया था कि उसने पहले भरण-पोषण के लिए भी मामला दायर किया था, जो बाद में समझौते के बाद समाप्त हो गया था। इसके बाद वह दोबारा पति के साथ रहने लगी, लेकिन कुछ समय बाद फिर से विवाद शुरू हो गया। महिला ने वर्ष 2015 में रक्षाबंधन के अवसर पर मारपीट का आरोप लगाते हुए कहा था कि इसके बाद वह अपने मायके चली गई। मामले की सुनवाई के दौरान महिला ने खुद और अपने पिता को गवाह के रूप में पेश किया, जबकि पति की ओर से भी गवाह पेश किए गए। निचली अदालत ने दोनों पक्षों की गवाही और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद वर्ष 2019 में याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला ने इस आदेश के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और गवाही के दौरान सामने आए तथ्यों में अंतर है। अदालत ने फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है, लेकिन राहत प्राप्त करने के लिए घरेलू हिंसा के कृत्य को साबित करना आवश्यक है। केवल आरोपों के आधार पर अदालत राहत प्रदान नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों से घरेलू हिंसा का आरोप प्रमाणित नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता के बयान में भी कई विरोधाभास पाए गए। ऐसे में निचली अदालत की ओर से पारित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के 5 अगस्त 2019 के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही मामले का रिकॉर्ड वापस भेजने के आदेश दिए गए।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने 2019 के आदेश को सही ठहराया
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घरेलू हिंसा मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने पत्नी की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें घरेलू हिंसा की शिकायत को साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया गया था।मामला घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत दायर याचिका से जुड़ा है। महिला ने अदालत में पति और सास के खिलाफ घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, मारपीट और दहेज की मांग के आरोप लगाए थे।
महिला ने आरोप लगाया था कि विवाह के बाद उसे लगातार परेशान किया गया और उसे ससुराल छोड़कर मायके में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। महिला ने अदालत को बताया था कि उसने पहले भरण-पोषण के लिए भी मामला दायर किया था, जो बाद में समझौते के बाद समाप्त हो गया था। इसके बाद वह दोबारा पति के साथ रहने लगी, लेकिन कुछ समय बाद फिर से विवाद शुरू हो गया। महिला ने वर्ष 2015 में रक्षाबंधन के अवसर पर मारपीट का आरोप लगाते हुए कहा था कि इसके बाद वह अपने मायके चली गई। मामले की सुनवाई के दौरान महिला ने खुद और अपने पिता को गवाह के रूप में पेश किया, जबकि पति की ओर से भी गवाह पेश किए गए। निचली अदालत ने दोनों पक्षों की गवाही और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद वर्ष 2019 में याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद महिला ने इस आदेश के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और गवाही के दौरान सामने आए तथ्यों में अंतर है। अदालत ने फैसले में कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया कानून है, लेकिन राहत प्राप्त करने के लिए घरेलू हिंसा के कृत्य को साबित करना आवश्यक है। केवल आरोपों के आधार पर अदालत राहत प्रदान नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों से घरेलू हिंसा का आरोप प्रमाणित नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता के बयान में भी कई विरोधाभास पाए गए। ऐसे में निचली अदालत की ओर से पारित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के 5 अगस्त 2019 के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही मामले का रिकॉर्ड वापस भेजने के आदेश दिए गए।
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