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Chamba News: जोड़-तोड़ की रणनीति में बाजी मार गई कांग्रेस
Fri, 10 Jul 2026 10:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 10 Jul 2026 10:58 PM IST
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चंबा में नवनिर्वाचित कांग्रेस स्मर्थित जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।संवाद
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भाजपा को निर्दलीयों का समर्थन तो मिला पर जीत के लिए आंकड़ा नहीं
पंकज सलारिया, संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला परिषद की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए भाजपा और कांग्रेस की जोड़-तोड़ की रणनीति सही साबित करने में कांग्रेस अव्वल रही।
कांग्रेस समर्थित दस जिला परिषद सदस्यों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में अहम भूमिका निभाई। हालांकि अंदरखाते भाजपा को भी निर्दलीय जिप सदस्यों का समर्थन मिला मगर दो मतों का फासला रह गया। इससे भाजपा का जिप परिषद पर मिशन रिपीट का सपना पूरा नहीं हो पाया। कांग्रेस पांच साल बाद जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद कब्जाने में सफल रही। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की रणनीति से कांग्रेस अव्वल रही। दूसरी तरफ, जिला परिषद चुनावों के लिए पूर्व शिक्षा मंत्री आशा कुमारी भी जिला मुख्यालय पहुंचीं। कई दिग्गज नेता भी मौजूद रहे।
पिछले दो दिन से कांग्रेस और भाजपा जिप अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए जोड़-तोड़ कर रही थी। कांंग्रेस ने सिर्फ अपने समर्थित दस सदस्यों को संभाल कर रखा। भाजपा निर्दलीय को अपने खेमे में शामिल करने में कामयाब रही लेकिन जीत के लिए आंकड़ा उन्हें नहीं मिल पाया।
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पंकज सलारिया, संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिला परिषद की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए भाजपा और कांग्रेस की जोड़-तोड़ की रणनीति सही साबित करने में कांग्रेस अव्वल रही।
कांग्रेस समर्थित दस जिला परिषद सदस्यों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में अहम भूमिका निभाई। हालांकि अंदरखाते भाजपा को भी निर्दलीय जिप सदस्यों का समर्थन मिला मगर दो मतों का फासला रह गया। इससे भाजपा का जिप परिषद पर मिशन रिपीट का सपना पूरा नहीं हो पाया। कांग्रेस पांच साल बाद जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद कब्जाने में सफल रही। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की रणनीति से कांग्रेस अव्वल रही। दूसरी तरफ, जिला परिषद चुनावों के लिए पूर्व शिक्षा मंत्री आशा कुमारी भी जिला मुख्यालय पहुंचीं। कई दिग्गज नेता भी मौजूद रहे।
पिछले दो दिन से कांग्रेस और भाजपा जिप अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए जोड़-तोड़ कर रही थी। कांंग्रेस ने सिर्फ अपने समर्थित दस सदस्यों को संभाल कर रखा। भाजपा निर्दलीय को अपने खेमे में शामिल करने में कामयाब रही लेकिन जीत के लिए आंकड़ा उन्हें नहीं मिल पाया।
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