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Chamba News: पुल न बना तो जमीन, जिंदगी निगल सकता है पटोलू नाला
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 30 Apr 2026 10:44 PM IST
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ग्रामीण बोले- दो सालों से अधूरा पड़ज्ञ पुल का काम, सड़क का भी धंस रहा डंगा
पिछली बरसात के बाद नाले की चपेट में आने से बह गई थी 100 बीघा जमीन
तीन गांवों को भी पैदा हो गया है खतरा, आपदा से प्रभावित हुए थे आठ परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। हिमगिरी क्षेत्र के पटोलू नाला में पुल का निर्माण कार्य लगभग दो वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण स्थल के समीप सड़क का डंगा लगातार धंस रहा है। इससे यह मार्ग संकरा हो गया है।
हर बार पटोलू नाला बरसात के मौसम में रौद्र रूप धारण कर लेता है। भारी वर्षा के दौरान नाले का जलस्तर बढ़कर किनारों को तेजी से काटने लगता है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2025 की भारी बरसात के बाद लगभग 100 बीघा कृषि भूमि कटाव और धंसने की जद में आ चुकी है। लगातार भू-कटाव और मिट्टी खिसकने के कारण इसका अस्तित्व गंभीर खतरे में है। कटोगा, खड़कियाला सहित आसपास के तीन गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रहा कटाव और ढलानों के कमजोर होने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए तो उपजाऊ भूमि आने वाले वर्षों में पूरी तरह नाले की भेंट चढ़ सकती है। पिछले वर्ष की आपदा से लगभग 8 परिवार प्रभावित हुए थे। पटोलू नाला पर निर्माणाधीन पुल का कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। सड़क के किनारे डंगा कई स्थानों पर धंस चुका है। इससे यह मार्ग बेहद संकरा और असुरक्षित हो गया है। इस मार्ग से प्रतिदिन 5 से 7 बसों सहित अन्य वाहनों की आवाजाही होती है। हनीफ, शरीफ, जय देव, निजामदीन व देस राज सहित अन्य लोगों ने लोक निर्माण विभाग तीसा और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उधर, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा ने बताया कि पटोलू नाले के स्थायी समाधान के लिए समय रहते उचित प्रयास किए जाएंगे।
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हमारा घर भी नाले के कटाव और भू-धंसाव से प्रभावित हुआ है। बरसात में नाला बहुत तेज और खतरनाक हो जाता है। डर लगा रहता है कि कहीं और बड़ा नुकसान न हो जाए। तुरंत सुरक्षा का कार्य होना चाहिए। - गीता ठाकुर
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पटोलू नाला पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन चुका है। 100 बीघा जमीन खतरे में है। सड़क भी टूट रही है। प्रशासन को तुरंत क्रेट वर्क और कंक्रीट का मजबूत कार्य करना चाहिए। - लेख राज
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पटोलू नाले में यदि समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह उपजाऊ भूमि आने वाले वर्षों में पूरी तरह नाले की भेंट चढ़ सकती है। - नर सिंह
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पटोलू नाला बरसात के मौसम में अचानक रौद्र रूप धारण कर लेता है। तेज बहाव के साथ पूरे क्षेत्र को प्रभावित करता है। भारी वर्षा के दौरान नाले का जलस्तर अचानक बढ़कर किनारों को तेजी से काटने लगता है। - देवी सिंह
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पिछली बरसात के बाद नाले की चपेट में आने से बह गई थी 100 बीघा जमीन
तीन गांवों को भी पैदा हो गया है खतरा, आपदा से प्रभावित हुए थे आठ परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
चुराह (चंबा)। हिमगिरी क्षेत्र के पटोलू नाला में पुल का निर्माण कार्य लगभग दो वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण स्थल के समीप सड़क का डंगा लगातार धंस रहा है। इससे यह मार्ग संकरा हो गया है।
हर बार पटोलू नाला बरसात के मौसम में रौद्र रूप धारण कर लेता है। भारी वर्षा के दौरान नाले का जलस्तर बढ़कर किनारों को तेजी से काटने लगता है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2025 की भारी बरसात के बाद लगभग 100 बीघा कृषि भूमि कटाव और धंसने की जद में आ चुकी है। लगातार भू-कटाव और मिट्टी खिसकने के कारण इसका अस्तित्व गंभीर खतरे में है। कटोगा, खड़कियाला सहित आसपास के तीन गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। लगातार हो रहा कटाव और ढलानों के कमजोर होने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए तो उपजाऊ भूमि आने वाले वर्षों में पूरी तरह नाले की भेंट चढ़ सकती है। पिछले वर्ष की आपदा से लगभग 8 परिवार प्रभावित हुए थे। पटोलू नाला पर निर्माणाधीन पुल का कार्य लंबे समय से अधूरा पड़ा है। सड़क के किनारे डंगा कई स्थानों पर धंस चुका है। इससे यह मार्ग बेहद संकरा और असुरक्षित हो गया है। इस मार्ग से प्रतिदिन 5 से 7 बसों सहित अन्य वाहनों की आवाजाही होती है। हनीफ, शरीफ, जय देव, निजामदीन व देस राज सहित अन्य लोगों ने लोक निर्माण विभाग तीसा और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उधर, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता जोगेंद्र शर्मा ने बताया कि पटोलू नाले के स्थायी समाधान के लिए समय रहते उचित प्रयास किए जाएंगे।
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हमारा घर भी नाले के कटाव और भू-धंसाव से प्रभावित हुआ है। बरसात में नाला बहुत तेज और खतरनाक हो जाता है। डर लगा रहता है कि कहीं और बड़ा नुकसान न हो जाए। तुरंत सुरक्षा का कार्य होना चाहिए। - गीता ठाकुर
पटोलू नाला पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन चुका है। 100 बीघा जमीन खतरे में है। सड़क भी टूट रही है। प्रशासन को तुरंत क्रेट वर्क और कंक्रीट का मजबूत कार्य करना चाहिए। - लेख राज
पटोलू नाले में यदि समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए तो यह उपजाऊ भूमि आने वाले वर्षों में पूरी तरह नाले की भेंट चढ़ सकती है। - नर सिंह
पटोलू नाला बरसात के मौसम में अचानक रौद्र रूप धारण कर लेता है। तेज बहाव के साथ पूरे क्षेत्र को प्रभावित करता है। भारी वर्षा के दौरान नाले का जलस्तर अचानक बढ़कर किनारों को तेजी से काटने लगता है। - देवी सिंह
