{"_id":"69b9416a6bfca536f002e553","slug":"inherited-talent-achieved-success-through-hard-work-chamba-news-c-88-1-ssml1004-177544-2026-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: हुनर विरासत में मिला, मेहनत से पाई सफलता की मंजिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: हुनर विरासत में मिला, मेहनत से पाई सफलता की मंजिल
विज्ञापन
चमेश्नी निवासी लता। संवाद
विज्ञापन
चमेश्नी निवासी लता ने पिता से सीखी कला को दी नई पहचान
मूर्ति कला, सिलाई-कढ़ाई में माहिर लता दूसरों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चमेश्नी मोहल्ला निवासी लता ने विरासत में मिले हुनर को अपनी मेहनत और लगन से नई पहचान दी है। पिता से सीखी मूर्ति कला को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने न सिर्फ खुद मुकाम हासिल किया, बल्कि सिलाई-कढ़ाई और चंबा रुमाल के जरिये 180 से अधिक युवतियों और महिलाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भरता की राह भी दिखाई है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद लता की यह यात्रा आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।
लता के पिता स्वर्गीय पूर्ण चंद फोटोग्राफी और माता की मूर्तियां बनाने में माहिर थे। लता ने पिता को मूर्तियां बनाता देख और उनमें रंग भरने की कला सीखी। साल 2017 में पिता को खोने के बाद उन्होंने मूर्ति बनाने का हुनर छोड़ने का मन बना लिया लेकिन, साल 2020 को नवरात्र के लिए शहर के दो मोहल्लों से पहुंची मांग और परिवार में पिता के न होने पर उनकी इच्छापूर्ति न होने की बात सुनकर उन्होंने कठोर मन से मूर्ति अपने स्तर पर बनाने का निर्णय लिया। तब से लेकर अब हर साल लता मांग के मुताबिक माता की मूर्ति बनाती हैं। बकौल लता मूर्तियां बनाने, उनमें रंग भरने के अलावा सिलाई-कढ़ाई, बुटिक संचालित करने के अलावा वह चंबा रुमाल भी बनाती हैं। उन्होंने बताया कि साल 2002 में उन्होंने अपने गुरु पद्मश्री विजय शर्मा की ओर से आरंभ किए गए चंबा रुमाल सेंटर में पहुंचकर चंबा रुमाल बनाने में माहिर कमला नैयर से चंबा रुमाल का प्रशिक्षण लेना आरंभ किया। वहीं, इसी दौरान आर्यसमाज में उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का भी प्रशिक्षण लिया। चंबा रुमाल, सिलाई-कढ़ाई के अलावा अब वह अपने घर पर बुटिक भी चला रही हैं। मनुज शर्मा की ओर से चंबा रुमाल के पेटेंट के तहत 2006-07 में तीन युवतियों के दल में दिल्ली पहुंचीं। स्कूलों, शिक्षण संस्थानों समेत अन्य जगहों पर अब तक वह 180 युवतियों, महिलाओं को चंबा रुमाल सहित सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। लता के परिवार में उनके अलावा माता चंपा देवी, बड़ी बहन अनीता, छोटा भाई बोधराज उन्हें हर पल आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। परिवार के पूरे सहयोग के बल ही वे निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
Trending Videos
मूर्ति कला, सिलाई-कढ़ाई में माहिर लता दूसरों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। चमेश्नी मोहल्ला निवासी लता ने विरासत में मिले हुनर को अपनी मेहनत और लगन से नई पहचान दी है। पिता से सीखी मूर्ति कला को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने न सिर्फ खुद मुकाम हासिल किया, बल्कि सिलाई-कढ़ाई और चंबा रुमाल के जरिये 180 से अधिक युवतियों और महिलाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भरता की राह भी दिखाई है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद लता की यह यात्रा आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।
लता के पिता स्वर्गीय पूर्ण चंद फोटोग्राफी और माता की मूर्तियां बनाने में माहिर थे। लता ने पिता को मूर्तियां बनाता देख और उनमें रंग भरने की कला सीखी। साल 2017 में पिता को खोने के बाद उन्होंने मूर्ति बनाने का हुनर छोड़ने का मन बना लिया लेकिन, साल 2020 को नवरात्र के लिए शहर के दो मोहल्लों से पहुंची मांग और परिवार में पिता के न होने पर उनकी इच्छापूर्ति न होने की बात सुनकर उन्होंने कठोर मन से मूर्ति अपने स्तर पर बनाने का निर्णय लिया। तब से लेकर अब हर साल लता मांग के मुताबिक माता की मूर्ति बनाती हैं। बकौल लता मूर्तियां बनाने, उनमें रंग भरने के अलावा सिलाई-कढ़ाई, बुटिक संचालित करने के अलावा वह चंबा रुमाल भी बनाती हैं। उन्होंने बताया कि साल 2002 में उन्होंने अपने गुरु पद्मश्री विजय शर्मा की ओर से आरंभ किए गए चंबा रुमाल सेंटर में पहुंचकर चंबा रुमाल बनाने में माहिर कमला नैयर से चंबा रुमाल का प्रशिक्षण लेना आरंभ किया। वहीं, इसी दौरान आर्यसमाज में उन्होंने सिलाई-कढ़ाई का भी प्रशिक्षण लिया। चंबा रुमाल, सिलाई-कढ़ाई के अलावा अब वह अपने घर पर बुटिक भी चला रही हैं। मनुज शर्मा की ओर से चंबा रुमाल के पेटेंट के तहत 2006-07 में तीन युवतियों के दल में दिल्ली पहुंचीं। स्कूलों, शिक्षण संस्थानों समेत अन्य जगहों पर अब तक वह 180 युवतियों, महिलाओं को चंबा रुमाल सहित सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। लता के परिवार में उनके अलावा माता चंपा देवी, बड़ी बहन अनीता, छोटा भाई बोधराज उन्हें हर पल आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। परिवार के पूरे सहयोग के बल ही वे निरंतर आगे बढ़ रही हैं।

चमेश्नी निवासी लता। संवाद

चमेश्नी निवासी लता। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन