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Chamba News: मेडिकल कॉलेज चंबा में गहराया श्रमिक विवाद
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श्रम अधिकारी ने प्राचार्य और ठेकेदार को जारी किया नोटिस
24 जून को प्राचार्य और प्रबंधक को स्वयं पेश होने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में यूनियन और प्रबंधन के बीच चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। मेडिकल कॉलेज हेल्थ एंड सेनिटेशन वर्कर्स यूनियन (सीटू) की ओर से उठाए औद्योगिक विवाद मामले में जिला श्रम अधिकारी ने कड़ा संज्ञान लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और ग्लोबल सेनिटेशन सर्विस के प्रबंधक को नोटिस जारी किया है।
औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत जारी नोटिस में दोनों पक्षों को 24 जून को दोपहर 12:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। यूनियन की ओर से प्रस्तुत मांगपत्र में आरोप लगाया गया कि अस्पताल परिसर में कार्यरत यूनियन सदस्यों को कुछ बाहरी व्यक्तियों और अन्य ठेकेदारों की ओर से डराया-धमकाया और प्रताड़ित किया जा रहा है। यूनियन का कहना है कि संबंधित लोग न तो कर्मचारियों के नियोक्ता हैं और न ही सुपरवाइजरी स्टाफ का हिस्सा। इसके बावजूद वे कार्यस्थल पर हस्तक्षेप कर औद्योगिक शांति को प्रभावित कर रहे हैं। यूनियन ने अपने सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कथित उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रम विभाग ने सिविल न्यायालय के समकक्ष प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की है।
जिला श्रम अधिकारी (सह समझौता अधिकारी) अनुराग शर्मा ने बताया कि यूनियन की शिकायत और मांग-पत्र के आधार पर मुख्य नियोक्ता के रूप में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और संबंधित ठेकेदार को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में तत्काल प्रभाव से यथास्थिति बनाए रखने और कर्मचारियों के किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को रोकने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुबंध श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत कार्यस्थल पर सुरक्षित और निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। साथ ही किसी भी मान्यता प्राप्त यूनियन को कमजोर करने, उसकी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने अथवा उसकी वैध मांगों को दबाने के उद्देश्य से तीसरे पक्ष या अन्य ठेकेदारों द्वारा दी जाने वाली धमकियों और दबाव की कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। श्रम विभाग ने चेतावनी दी है कि 24 जून को निर्धारित सुनवाई में संबंधित पक्ष उपस्थित न होने की सूरत में उनके विरुद्ध औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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24 जून को प्राचार्य और प्रबंधक को स्वयं पेश होने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा में यूनियन और प्रबंधन के बीच चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। मेडिकल कॉलेज हेल्थ एंड सेनिटेशन वर्कर्स यूनियन (सीटू) की ओर से उठाए औद्योगिक विवाद मामले में जिला श्रम अधिकारी ने कड़ा संज्ञान लेते हुए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और ग्लोबल सेनिटेशन सर्विस के प्रबंधक को नोटिस जारी किया है।
औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत जारी नोटिस में दोनों पक्षों को 24 जून को दोपहर 12:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। यूनियन की ओर से प्रस्तुत मांगपत्र में आरोप लगाया गया कि अस्पताल परिसर में कार्यरत यूनियन सदस्यों को कुछ बाहरी व्यक्तियों और अन्य ठेकेदारों की ओर से डराया-धमकाया और प्रताड़ित किया जा रहा है। यूनियन का कहना है कि संबंधित लोग न तो कर्मचारियों के नियोक्ता हैं और न ही सुपरवाइजरी स्टाफ का हिस्सा। इसके बावजूद वे कार्यस्थल पर हस्तक्षेप कर औद्योगिक शांति को प्रभावित कर रहे हैं। यूनियन ने अपने सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कथित उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रम विभाग ने सिविल न्यायालय के समकक्ष प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्रवाई की है।
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जिला श्रम अधिकारी (सह समझौता अधिकारी) अनुराग शर्मा ने बताया कि यूनियन की शिकायत और मांग-पत्र के आधार पर मुख्य नियोक्ता के रूप में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और संबंधित ठेकेदार को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में तत्काल प्रभाव से यथास्थिति बनाए रखने और कर्मचारियों के किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को रोकने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुबंध श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 के तहत कार्यस्थल पर सुरक्षित और निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। साथ ही किसी भी मान्यता प्राप्त यूनियन को कमजोर करने, उसकी गतिविधियों में हस्तक्षेप करने अथवा उसकी वैध मांगों को दबाने के उद्देश्य से तीसरे पक्ष या अन्य ठेकेदारों द्वारा दी जाने वाली धमकियों और दबाव की कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। श्रम विभाग ने चेतावनी दी है कि 24 जून को निर्धारित सुनवाई में संबंधित पक्ष उपस्थित न होने की सूरत में उनके विरुद्ध औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।