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Chamba News: भलेई कॉलेज को चंबा में मर्ज करने के फैसले का विरोध
Wed, 01 Jul 2026 10:32 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 01 Jul 2026 10:32 AM IST
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चंबा उपायुक्त को भलेई कॉलेज को मर्ज करने को लेकर ज्ञापन सोंपते लोग। संवाद
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चंबा। राजकीय महाविद्यालय भलेई को चंबा कॉलेज में मर्ज किए जाने के प्रदेश सरकार के फैसले का स्थानीय पंचायतों के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है।
मंगलवार को ग्रामीणों ने उपायुक्त मुकेश रेपसवाल के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर निर्णय वापस लेने और महाविद्यालय को पूर्ववत संचालित करने की मांग उठाई।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2017 में तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार ने माता भलेई के नाम पर राजकीय महाविद्यालय भलेई की स्थापना की थी।
इसका उद्देश्य भलेई, बरंगाल, बांगल, ओहरा, कंगेड़, सिमणी, शेरपुर, नड्डल, भुनाड़, गुवालु, ठाकरीमट्टी, सुंडला, चंडी, लड़ोग सहित करीब 15 पंचायतों के विद्यार्थियों को घर के नजदीक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना था।
उन्होंने बताया कि महाविद्यालय निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने करीब 6.5 बीघा निजी भूमि भी सरकार को उपलब्ध करवाई थी। कॉलेज शुरू होने पर यहां लगभग 175 विद्यार्थी अध्ययनरत थे, जिनमें करीब 140 छात्राएं थीं। इससे क्षेत्र में छात्राओं की पढ़ाई बीच में छूटने की समस्या काफी हद तक समाप्त हुई और अभिभावकों का आर्थिक बोझ भी कम हुआ।
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ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022 के बाद प्रदेश सरकार ने महाविद्यालय में कार्यरत अधिकांश शिक्षकों और कर्मचारियों का अन्य स्थानों पर तबादला कर दिया। वर्तमान में कॉलेज केवल एक प्राध्यापक के भरोसे संचालित हो रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार से महाविद्यालय के विलय का निर्णय तत्काल वापस लेने, रिक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के पद शीघ्र भरने तथा कॉलेज को पहले की तरह संचालित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत भलेई के प्रधान पवन कुमार भारद्वाज, उपप्रधान भूपेंद्र सिंह, पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह एवं ओम प्रकाश, पूर्व वार्ड सदस्य घिंद्र सिंह, यासीन मोहम्मद, ग्राम पंचायत हटला के प्रधान रोशन कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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मंगलवार को ग्रामीणों ने उपायुक्त मुकेश रेपसवाल के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर निर्णय वापस लेने और महाविद्यालय को पूर्ववत संचालित करने की मांग उठाई।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2017 में तत्कालीन वीरभद्र सिंह सरकार ने माता भलेई के नाम पर राजकीय महाविद्यालय भलेई की स्थापना की थी।
इसका उद्देश्य भलेई, बरंगाल, बांगल, ओहरा, कंगेड़, सिमणी, शेरपुर, नड्डल, भुनाड़, गुवालु, ठाकरीमट्टी, सुंडला, चंडी, लड़ोग सहित करीब 15 पंचायतों के विद्यार्थियों को घर के नजदीक उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना था।
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उन्होंने बताया कि महाविद्यालय निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने करीब 6.5 बीघा निजी भूमि भी सरकार को उपलब्ध करवाई थी। कॉलेज शुरू होने पर यहां लगभग 175 विद्यार्थी अध्ययनरत थे, जिनमें करीब 140 छात्राएं थीं। इससे क्षेत्र में छात्राओं की पढ़ाई बीच में छूटने की समस्या काफी हद तक समाप्त हुई और अभिभावकों का आर्थिक बोझ भी कम हुआ।
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ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022 के बाद प्रदेश सरकार ने महाविद्यालय में कार्यरत अधिकांश शिक्षकों और कर्मचारियों का अन्य स्थानों पर तबादला कर दिया। वर्तमान में कॉलेज केवल एक प्राध्यापक के भरोसे संचालित हो रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार से महाविद्यालय के विलय का निर्णय तत्काल वापस लेने, रिक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के पद शीघ्र भरने तथा कॉलेज को पहले की तरह संचालित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत भलेई के प्रधान पवन कुमार भारद्वाज, उपप्रधान भूपेंद्र सिंह, पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह एवं ओम प्रकाश, पूर्व वार्ड सदस्य घिंद्र सिंह, यासीन मोहम्मद, ग्राम पंचायत हटला के प्रधान रोशन कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।