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Chamba News: बीमा क्लेम खारिज करने पर कंपनी को ब्याज सहित भुगतान के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 25 Mar 2026 10:24 PM IST
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धर्मशाला। जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला ने बीमा क्लेम देने में आनाकानी करने वाली इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाई है।
आयोग ने दी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को आदेश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को नौ फीसदी ब्याज के साथ 1,74,752 रुपये का भुगतान करे। इसके अतिरिक्त मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी चुकाए।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की बेंच ने यह फैसला पालमपुर तहसील के अपर मैंझा निवासी ममता देवी की शिकायत पर सुनाया है। शिकायतकर्ता ममता देवी के अनुसार उनके माल वाहक वाहन का बीमा 12 फरवरी 2024 से 11 फरवरी 2025 तक वैध था।
9 जुलाई 2024 को जब उनका वाहन बजरी लेकर चंबा की ओर जा रहा था, तब उदयपुर (चंबा) के पास सामने से आ रही एक कार को बचाने के चक्कर में वाहन एक खड़े ट्रक से टकरा गया। दुर्घटना में वाहन के केबिन को भारी नुकसान पहुंचा था। शिकायतकर्ता ने करीब 4 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया था, लेकिन कंपनी ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन ओवरलोड था।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और तथ्यों की गहनता से जांच की। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करना सेवा में कोताही है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद दावे का निपटारा न करने पर अदालत ने उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाते हुए कंपनी को निर्धारित राशि और हर्जाना अदा करने के निर्देश दिए।
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आयोग ने दी न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को आदेश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को नौ फीसदी ब्याज के साथ 1,74,752 रुपये का भुगतान करे। इसके अतिरिक्त मानसिक प्रताड़ना के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी चुकाए।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की बेंच ने यह फैसला पालमपुर तहसील के अपर मैंझा निवासी ममता देवी की शिकायत पर सुनाया है। शिकायतकर्ता ममता देवी के अनुसार उनके माल वाहक वाहन का बीमा 12 फरवरी 2024 से 11 फरवरी 2025 तक वैध था।
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9 जुलाई 2024 को जब उनका वाहन बजरी लेकर चंबा की ओर जा रहा था, तब उदयपुर (चंबा) के पास सामने से आ रही एक कार को बचाने के चक्कर में वाहन एक खड़े ट्रक से टकरा गया। दुर्घटना में वाहन के केबिन को भारी नुकसान पहुंचा था। शिकायतकर्ता ने करीब 4 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया था, लेकिन कंपनी ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय वाहन ओवरलोड था।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के साक्ष्यों और तथ्यों की गहनता से जांच की। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करना सेवा में कोताही है। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद दावे का निपटारा न करने पर अदालत ने उपभोक्ता के हक में फैसला सुनाते हुए कंपनी को निर्धारित राशि और हर्जाना अदा करने के निर्देश दिए।