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Chamba News: धान की सांस अटकी... कूहल की राह भटकी
Wed, 15 Jul 2026 11:01 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 15 Jul 2026 11:01 PM IST
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कामला में सूखे पड़े धान के खेत : ग्राउंड रिपोर्ट के साथ
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दिनभर पानी की तलाश में दौड़ रहे सिहुंता क्षेत्र के किसान, बोले- खेत तक पहुंचते-पहुंचते सूख जाती है खग्गल कूहल की धार
कामला और त्रंगड़ा में धान की फसल पर संकट, ऊपरी क्षेत्र के लोग रास्ते में ही रोक देते हैं पानी, करीब 50 किसान हो रहे परेशान
शशि धीमान
सिहुंता (चंबा)। कामला और त्रंगड़ा क्षेत्र में इन दिनों किसान खेतों में धान की देखभाल से ज्यादा पानी की तलाश में समय बिता रहे हैं। पांच किलोमीटर दूर से आने वाली खग्गल कूहल की धार खेतों तक पहुंचने से पहले ही जगह-जगह रोक दी जा रही है।
नतीजा यह है कि धान की रोपाई कर चुके करीब 50 किसानों के सामने फसल बचाने का संकट खड़ा हो गया है।खग्गल कूहल से मिलने वाला पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही बंद हो जा रहा है। हालात यह हैं कि किसानों का पूरा दिन पानी की तलाश और भागदौड़ में निकल जा रहा है जबकि खेतों में लगी धान की फसल सूखने की कगार पर है।
खग्गल कूहल का पानी करीब पांच किलोमीटर दूर से होकर खेतों तक पहुंचता है। ऊपरी बेल्ट के लोग रास्ते में ही अपनी जमीनों के लिए पानी मोड़ लेते हैं और बाद में कूहल बंद कर देते हैं। इसका सीधा असर नीचे के किसानों पर पड़ रहा है। किसान खेतों में काम करने पहुंचते हैं तो वहां पानी नहीं मिलता और उन्हें दोबारा पानी की व्यवस्था करने के लिए दौड़ लगानी पड़ती है।
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-- हमने धान की फसल लगा दी है लेकिन पानी के लिए रोजाना परेशान होना पड़ रहा है। सुबह खेत में काम करने आते हैं तो पानी बंद मिलता है। पूरा दिन यह पता लगाने में निकल जाता है कि पानी कहां रोका गया है। - भीम सिंह, किसान
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कूहल का पानी काफी दूर से आता है। ऊपर वाले किसान अपनी जरूरत के हिसाब से पानी रोक लेते हैं जिससे नीचे तक पानी नहीं पहुंचता। सभी किसानों को बराबर पानी मिले, इसके लिए विभाग को व्यवस्था करनी चाहिए। - अशोक कुमार
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हम कई बार अपनी समस्या बता चुके हैं। खेतों में धान लगाई है लेकिन सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। किसान का समय खेती में लगना चाहिए लेकिन हमारा समय पानी ढूंढने में बर्बाद हो रहा है। - दौलत राम
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अगर त्रियूबंड और डोरडा के पास विभाग का कर्मचारी तैनात हो जाए तो काफी हद तक समस्या दूर हो सकती है। पानी की निगरानी होगी तो हर किसान को उसका हिस्सा मिल पाएगा। - माधो राम
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जल शक्ति विभाग के सहायक अभियंता दिनेश सिंह पठानिया ने कहा कि किसानों की यह समस्या विभाग के ध्यान में लाई गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही समस्या का समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में विभाग को प्रस्ताव दें।
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कामला और त्रंगड़ा में धान की फसल पर संकट, ऊपरी क्षेत्र के लोग रास्ते में ही रोक देते हैं पानी, करीब 50 किसान हो रहे परेशान
शशि धीमान
सिहुंता (चंबा)। कामला और त्रंगड़ा क्षेत्र में इन दिनों किसान खेतों में धान की देखभाल से ज्यादा पानी की तलाश में समय बिता रहे हैं। पांच किलोमीटर दूर से आने वाली खग्गल कूहल की धार खेतों तक पहुंचने से पहले ही जगह-जगह रोक दी जा रही है।
नतीजा यह है कि धान की रोपाई कर चुके करीब 50 किसानों के सामने फसल बचाने का संकट खड़ा हो गया है।खग्गल कूहल से मिलने वाला पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही बंद हो जा रहा है। हालात यह हैं कि किसानों का पूरा दिन पानी की तलाश और भागदौड़ में निकल जा रहा है जबकि खेतों में लगी धान की फसल सूखने की कगार पर है।
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खग्गल कूहल का पानी करीब पांच किलोमीटर दूर से होकर खेतों तक पहुंचता है। ऊपरी बेल्ट के लोग रास्ते में ही अपनी जमीनों के लिए पानी मोड़ लेते हैं और बाद में कूहल बंद कर देते हैं। इसका सीधा असर नीचे के किसानों पर पड़ रहा है। किसान खेतों में काम करने पहुंचते हैं तो वहां पानी नहीं मिलता और उन्हें दोबारा पानी की व्यवस्था करने के लिए दौड़ लगानी पड़ती है।
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कूहल का पानी काफी दूर से आता है। ऊपर वाले किसान अपनी जरूरत के हिसाब से पानी रोक लेते हैं जिससे नीचे तक पानी नहीं पहुंचता। सभी किसानों को बराबर पानी मिले, इसके लिए विभाग को व्यवस्था करनी चाहिए। - अशोक कुमार
हम कई बार अपनी समस्या बता चुके हैं। खेतों में धान लगाई है लेकिन सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा। किसान का समय खेती में लगना चाहिए लेकिन हमारा समय पानी ढूंढने में बर्बाद हो रहा है। - दौलत राम
अगर त्रियूबंड और डोरडा के पास विभाग का कर्मचारी तैनात हो जाए तो काफी हद तक समस्या दूर हो सकती है। पानी की निगरानी होगी तो हर किसान को उसका हिस्सा मिल पाएगा। - माधो राम
जल शक्ति विभाग के सहायक अभियंता दिनेश सिंह पठानिया ने कहा कि किसानों की यह समस्या विभाग के ध्यान में लाई गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही समस्या का समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा। इस संबंध में विभाग को प्रस्ताव दें।