{"_id":"6a7f31e9b36447aee10b592e","slug":"rain-washes-away-four-foot-stretch-of-path-at-manimahesh-only-one-foot-remains-chamba-news-c-88-1-ssml1004-193265-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: मणिमहेश में बारिश से बह गया चार फीट रास्ता, एक फीट बचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: मणिमहेश में बारिश से बह गया चार फीट रास्ता, एक फीट बचा
Fri, 14 Aug 2026 08:49 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 14 Aug 2026 08:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मणिमहेश में बारिश से बह गया चार फीट रास्ता, एक फीट बचा
यात्रा से पहले मार्ग दुरुस्त करने में जुटा पीडब्ल्यूडी, संवेदनशील हिस्सों पर लगाए जा रहे डंगे
मणिमहेश यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी मार्ग से जाते हैं गौरीकुंड और डल झील
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। मणिमहेश यात्रा शुरू होने से पहले बारिश ने यात्रा मार्ग की चुनौती बढ़ा दी है। शिवघराट और सुंदरासी के बीच करीब चार फीट रास्ता बह गया है। इससे महज एक फीट चौड़ा मार्ग बचा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने का काम तेज कर दिया है। विभागीय कर्मचारी डंगा लगाकर रास्ते को दोबारा चौड़ा करने में जुटे हैं।
मणिमहेश यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी मार्ग से होकर गौरीकुंड और डल झील की ओर जाते हैं। ऐसे में रास्ता संकरा होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित होने के साथ सुरक्षा को लेकर भी खतरा पैदा हो सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन और मणिमहेश ट्रस्ट की ओर से यात्रा शुरू होने से पहले संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित और सुचारु बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
लोक निर्माण विभाग की टीम शिवघराट और सुंदरासी के बीच क्षतिग्रस्त हिस्से में डंगा लगाकर मार्ग को दोबारा तैयार कर रही है। विभागीय स्तर पर यात्रा से पहले दो से तीन संवेदनशील स्थानों पर रास्ते को चौड़ा करने का काम भी किया जा रहा है। बंदरघाटी, शिवघराट, सुंदरासी और गौरीकुंड के बीच कई हिस्सों में मार्ग को करीब चार से पांच फीट तक चौड़ा किया गया है।
विज्ञापन
शिवघराट से आगे ग्लेशियर वाला हिस्सा भी पहले यात्रा मार्ग के लिए चुनौती बना रहता था। हालांकि, इस बार ग्लेशियर समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद बारिश के कारण रास्ते के क्षतिग्रस्त होने से विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग की टीम लगातार मौके पर काम कर रही है, ताकि यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग को श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।
प्रशासन का प्रयास है कि यात्रा के दौरान किसी भी संवेदनशील हिस्से में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। इसके लिए क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के साथ-साथ जहां मार्ग संकरा है, वहां उसे चौड़ा किया जा रहा है।
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि मणिमहेश यात्रा मार्ग को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील हिस्सों में मार्ग चौड़ा करने और क्षतिग्रस्त स्थानों को दुरुस्त करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।
-- -
विज्ञापन
यात्रा से पहले मार्ग दुरुस्त करने में जुटा पीडब्ल्यूडी, संवेदनशील हिस्सों पर लगाए जा रहे डंगे
मणिमहेश यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी मार्ग से जाते हैं गौरीकुंड और डल झील
संवाद न्यूज एजेंसी
भरमौर (चंबा)। मणिमहेश यात्रा शुरू होने से पहले बारिश ने यात्रा मार्ग की चुनौती बढ़ा दी है। शिवघराट और सुंदरासी के बीच करीब चार फीट रास्ता बह गया है। इससे महज एक फीट चौड़ा मार्ग बचा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने का काम तेज कर दिया है। विभागीय कर्मचारी डंगा लगाकर रास्ते को दोबारा चौड़ा करने में जुटे हैं।
मणिमहेश यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसी मार्ग से होकर गौरीकुंड और डल झील की ओर जाते हैं। ऐसे में रास्ता संकरा होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित होने के साथ सुरक्षा को लेकर भी खतरा पैदा हो सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन और मणिमहेश ट्रस्ट की ओर से यात्रा शुरू होने से पहले संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित और सुचारु बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन
लोक निर्माण विभाग की टीम शिवघराट और सुंदरासी के बीच क्षतिग्रस्त हिस्से में डंगा लगाकर मार्ग को दोबारा तैयार कर रही है। विभागीय स्तर पर यात्रा से पहले दो से तीन संवेदनशील स्थानों पर रास्ते को चौड़ा करने का काम भी किया जा रहा है। बंदरघाटी, शिवघराट, सुंदरासी और गौरीकुंड के बीच कई हिस्सों में मार्ग को करीब चार से पांच फीट तक चौड़ा किया गया है।
विज्ञापन
शिवघराट से आगे ग्लेशियर वाला हिस्सा भी पहले यात्रा मार्ग के लिए चुनौती बना रहता था। हालांकि, इस बार ग्लेशियर समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद बारिश के कारण रास्ते के क्षतिग्रस्त होने से विभाग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग की टीम लगातार मौके पर काम कर रही है, ताकि यात्रा शुरू होने से पहले मार्ग को श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।
प्रशासन का प्रयास है कि यात्रा के दौरान किसी भी संवेदनशील हिस्से में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। इसके लिए क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के साथ-साथ जहां मार्ग संकरा है, वहां उसे चौड़ा किया जा रहा है।
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि मणिमहेश यात्रा मार्ग को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील हिस्सों में मार्ग चौड़ा करने और क्षतिग्रस्त स्थानों को दुरुस्त करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।