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Chamba News: बाहरी राज्यों में तो मिला सम्मान अपने जिले में किया नजरअंदाज
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Wed, 18 Mar 2026 10:42 PM IST
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51 किताबें लिखने वाले जिले में लेखक टीसी सावन ने लगाया आरोप
बोले- हाल ही में संपन्न हुए साहित्य उत्सव में नहीं मिला स्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। हाल ही में आयोजित साहित्य उत्सव में बाहरी राज्यों में अपनी लेखनी का लोहा मनवा चुके स्थानीय लेखक टीसी सावन को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने जिला भाषा अधिकारी पर नजरअंदाज करने के आरोप लगाए हैं।
बुधवार को प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि वह अब तक 51 किताबें लिखकर प्रकाशित कर चुके हैं। ऐसा करने वाला जिले में शायद ही अन्य कोई लेखक होगा। बाहरी राज्यों में वह प्रतिष्ठित लेखक के अवार्ड हासिल कर चुके हैं। अपनी ही जन्म भूमि में उन्हें नजरअंदाज किया गया। यह उत्सव शुरू होने वाला था तो उन्होंने इसमें भाग लेने के लिए आवेदन किया था। उन्होंने अपनी किताबों की प्रदर्शनी लगाने के लिए स्टॉल भी मांगा। स्टॉल लगाने के लिए तो उन्हें अनुमति दे दी गई लेकिन उत्सव में अपनी रचनाएं और कविताएं सुनाने का मौका नहीं दिया गया जबकि बाहर से कई कवियों को इसमें आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि वह उज्जैन और बिहार में साहित्यकार के प्रतिष्ठित अवार्ड हासिल कर चुके हैं लेकिन अपने ही जिले में उन्हें दरकिनार किया गया।
उन्होंने कहा कि वह अकेले ऐसे लेखक हैं जिन्होंने भ्रूण हत्या रोकने के लिए अंग्रेजी कविता लिखी जिसका शीर्षक शी था। इसे काफी सराहा गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनकी इस प्रकार की नजर अंदाजी की गहनता से जांच होनी चाहिए।
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बोले- हाल ही में संपन्न हुए साहित्य उत्सव में नहीं मिला स्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। हाल ही में आयोजित साहित्य उत्सव में बाहरी राज्यों में अपनी लेखनी का लोहा मनवा चुके स्थानीय लेखक टीसी सावन को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने जिला भाषा अधिकारी पर नजरअंदाज करने के आरोप लगाए हैं।
बुधवार को प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि वह अब तक 51 किताबें लिखकर प्रकाशित कर चुके हैं। ऐसा करने वाला जिले में शायद ही अन्य कोई लेखक होगा। बाहरी राज्यों में वह प्रतिष्ठित लेखक के अवार्ड हासिल कर चुके हैं। अपनी ही जन्म भूमि में उन्हें नजरअंदाज किया गया। यह उत्सव शुरू होने वाला था तो उन्होंने इसमें भाग लेने के लिए आवेदन किया था। उन्होंने अपनी किताबों की प्रदर्शनी लगाने के लिए स्टॉल भी मांगा। स्टॉल लगाने के लिए तो उन्हें अनुमति दे दी गई लेकिन उत्सव में अपनी रचनाएं और कविताएं सुनाने का मौका नहीं दिया गया जबकि बाहर से कई कवियों को इसमें आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि वह उज्जैन और बिहार में साहित्यकार के प्रतिष्ठित अवार्ड हासिल कर चुके हैं लेकिन अपने ही जिले में उन्हें दरकिनार किया गया।
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उन्होंने कहा कि वह अकेले ऐसे लेखक हैं जिन्होंने भ्रूण हत्या रोकने के लिए अंग्रेजी कविता लिखी जिसका शीर्षक शी था। इसे काफी सराहा गया। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनकी इस प्रकार की नजर अंदाजी की गहनता से जांच होनी चाहिए।