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Chamba News: सात साल स्कूल बेघर, किराये के कमरों में पल रहा बचपन
Mon, 03 Aug 2026 10:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:27 PM IST
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पूर्व प्रधान के घर में चल रही केंद्रीय पाठशाला हिमगिरी, नए भवन का आज भी इंतजार
असुरक्षित घोषित भवन में नहीं लग सकती कक्षाएं, शिक्षकों के चुनौती बन पढ़ाई करवाना
संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी/हिमगिरी (चंबा)। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के सरकारी दावों के बीच शिक्षा खंड सलूणी के तहत केंद्रीय पाठशाला हिमगिरी की हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।
पिछले सात वर्षों से 62 विद्यार्थी अपने विद्यालय के भवन में नहीं, बल्कि पूर्व प्रधान नजामद्दीन के घर में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। करीब 20 वर्ष पुराने विद्यालय भवन को सात वर्ष पहले लगातार हुई बारिश के बाद असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। वर्षों बीत जाने के बावजूद आज तक बच्चों को नया विद्यालय भवन नसीब नहीं हो पाया है। विद्यालय में अध्ययनरत 62 विद्यार्थियों के लिए सीमित स्थान में पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक ओर बच्चे तंग कमरों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तो दूसरी ओर शिक्षकों के बैठने और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है।
एसएमसी अध्यक्ष मोहम्मद इरशाद तथा सदस्य प्रतापू, लियाकत अली, जान मोहम्मद और गणेश कुमार ने बताया कि विद्यालय भवन का कई बार संबंधित अधिकारियों की ओर से निरीक्षण किया जा चुका है। बावजूद इसके नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सात वर्षों से बच्चे अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे हैं।
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उधर, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी दिव्या ने बताया कि विद्यालय का भवन असुरक्षित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक भवन में करवाई जा रही है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है और आवश्यक कार्रवाई उनके स्तर पर की जाएगी।
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असुरक्षित घोषित भवन में नहीं लग सकती कक्षाएं, शिक्षकों के चुनौती बन पढ़ाई करवाना
संवाद न्यूज एजेंसी
सलूणी/हिमगिरी (चंबा)। शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के सरकारी दावों के बीच शिक्षा खंड सलूणी के तहत केंद्रीय पाठशाला हिमगिरी की हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।
पिछले सात वर्षों से 62 विद्यार्थी अपने विद्यालय के भवन में नहीं, बल्कि पूर्व प्रधान नजामद्दीन के घर में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। करीब 20 वर्ष पुराने विद्यालय भवन को सात वर्ष पहले लगातार हुई बारिश के बाद असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। वर्षों बीत जाने के बावजूद आज तक बच्चों को नया विद्यालय भवन नसीब नहीं हो पाया है। विद्यालय में अध्ययनरत 62 विद्यार्थियों के लिए सीमित स्थान में पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक ओर बच्चे तंग कमरों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं तो दूसरी ओर शिक्षकों के बैठने और शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के लिए भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है।
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एसएमसी अध्यक्ष मोहम्मद इरशाद तथा सदस्य प्रतापू, लियाकत अली, जान मोहम्मद और गणेश कुमार ने बताया कि विद्यालय भवन का कई बार संबंधित अधिकारियों की ओर से निरीक्षण किया जा चुका है। बावजूद इसके नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सात वर्षों से बच्चे अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे हैं।
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उधर, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी दिव्या ने बताया कि विद्यालय का भवन असुरक्षित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक भवन में करवाई जा रही है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है और आवश्यक कार्रवाई उनके स्तर पर की जाएगी।