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Chamba News: कंधों ने निभाई एंबुलेंस की जिम्मेदारी
Mon, 03 Aug 2026 10:52 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:52 PM IST
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सड़क के अभाव में पालकी में मरीज को ले जाते ग्रामीण : संवाद
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तीन किलोमीटर तक पालकी में घर तक पहुंचाए मैहला क्षेत्र के लोहा गांव के जोगिंदर
बीमारी की हालत में उठाकर लाने पड़ते हैं मरीज, खत्म नहीं हुआ सड़क का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। देश आज आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और तेज रफ्तार एंबुलेंस नेटवर्क की बात करता है लेकिन मैहला क्षेत्र का लोहा गांव अब भी कंधों पर चल रही जिंदगी की तस्वीर पेश कर रहा है।
45 वर्षीय बीमार जोगिंदर को तीन किलोमीटर तक पालकी में उठाकर घर पहुंचाना पड़ा। यह घटना सिर्फ एक मरीज की बेबसी नहीं, बल्कि 76 साल बाद भी अधूरी सड़क और अधूरे विकास की उस सच्चाई को उजागर करती है जहां एंबुलेंस से पहले इंसानी कंधे ही आखिरी सहारा बनते हैं।
गांव के लोगों ने बारी-बारी कंधों पर पालकी उठाई और दुर्गम रास्तों से होकर मरीज को घर तक पहुंचाया। यह दृश्य केवल एक मरीज की मजबूरी नहीं था, बल्कि उन दावों पर भी सवाल था जो गांव-गांव तक विकास पहुंचाने की बात करते हैं। उनकी बीमारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाज नहीं, बल्कि अस्पताल और घर तक पहुंचने का रास्ता बन गया है।
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ग्रामीणों में धीरज कुमार, अमित कुमार, राकेश कुमार और पूर्ण चंद ने बताया कि मैहला-रांभो सड़क का निर्माण पिछले लगभग 10 वर्षों से अधूरा है। सड़क चेहला गांव से आगे नहीं बढ़ पाई है। इतने लंबे समय में एक मीटर भी निर्माण कार्य नहीं हुआ। जब भी कोई बीमार पड़ता है, तो उसे 3 से 4 किलोमीटर तक पालकी में या पीठ पर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सोमवार को जोगिंदर के साथ जो हुआ, वह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र के लोगों की यह वर्षों पुरानी मजबूरी है। सड़क के अभाव में कई बार समय पर इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाता है। भरमौर विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने वर्षों से इस इलाके की सुध नहीं ली। चुनाव के समय सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है।
उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राकेश मरोल ने कहा कि जितनी सड़क का कार्य शेष बचा है, उसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
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एक महीने से बीमार थे जोगिंदर
दाड़वी पंचायत के जोगिंदर एक माह से बीमार थे। वह मैहला में बहन के घर रुके थे। दस दिन पहले पेट दर्द के चलते उल्टी होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज चंबा लाया गया था। यहां दस दिन तक अस्पताल में इलाज चला। बहन इंद्रो देवी ने बताया कि डॉक्टरों ने किडनी, लिवर खराब होने की बात कहकर घर भेज दिया। सड़क न होने से उन्हें सोमवार को पालकी के सहारे घर तक पहुंचाया गया।
रिंपी ठाकुर।
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बीमारी की हालत में उठाकर लाने पड़ते हैं मरीज, खत्म नहीं हुआ सड़क का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। देश आज आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और तेज रफ्तार एंबुलेंस नेटवर्क की बात करता है लेकिन मैहला क्षेत्र का लोहा गांव अब भी कंधों पर चल रही जिंदगी की तस्वीर पेश कर रहा है।
45 वर्षीय बीमार जोगिंदर को तीन किलोमीटर तक पालकी में उठाकर घर पहुंचाना पड़ा। यह घटना सिर्फ एक मरीज की बेबसी नहीं, बल्कि 76 साल बाद भी अधूरी सड़क और अधूरे विकास की उस सच्चाई को उजागर करती है जहां एंबुलेंस से पहले इंसानी कंधे ही आखिरी सहारा बनते हैं।
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गांव के लोगों ने बारी-बारी कंधों पर पालकी उठाई और दुर्गम रास्तों से होकर मरीज को घर तक पहुंचाया। यह दृश्य केवल एक मरीज की मजबूरी नहीं था, बल्कि उन दावों पर भी सवाल था जो गांव-गांव तक विकास पहुंचाने की बात करते हैं। उनकी बीमारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाज नहीं, बल्कि अस्पताल और घर तक पहुंचने का रास्ता बन गया है।
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ग्रामीणों में धीरज कुमार, अमित कुमार, राकेश कुमार और पूर्ण चंद ने बताया कि मैहला-रांभो सड़क का निर्माण पिछले लगभग 10 वर्षों से अधूरा है। सड़क चेहला गांव से आगे नहीं बढ़ पाई है। इतने लंबे समय में एक मीटर भी निर्माण कार्य नहीं हुआ। जब भी कोई बीमार पड़ता है, तो उसे 3 से 4 किलोमीटर तक पालकी में या पीठ पर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सोमवार को जोगिंदर के साथ जो हुआ, वह कोई पहली घटना नहीं है। क्षेत्र के लोगों की यह वर्षों पुरानी मजबूरी है। सड़क के अभाव में कई बार समय पर इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाता है। भरमौर विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने वर्षों से इस इलाके की सुध नहीं ली। चुनाव के समय सड़क निर्माण के वादे किए जाते हैं लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है।
उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राकेश मरोल ने कहा कि जितनी सड़क का कार्य शेष बचा है, उसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
एक महीने से बीमार थे जोगिंदर
दाड़वी पंचायत के जोगिंदर एक माह से बीमार थे। वह मैहला में बहन के घर रुके थे। दस दिन पहले पेट दर्द के चलते उल्टी होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज चंबा लाया गया था। यहां दस दिन तक अस्पताल में इलाज चला। बहन इंद्रो देवी ने बताया कि डॉक्टरों ने किडनी, लिवर खराब होने की बात कहकर घर भेज दिया। सड़क न होने से उन्हें सोमवार को पालकी के सहारे घर तक पहुंचाया गया।
रिंपी ठाकुर।