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Chamba News: हुनर की कौड़ी से निखरा चंबा चप्पल का स्वरूप
Sat, 01 Aug 2026 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:57 PM IST
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शहर के मुख्य बाजार में खाद्य उत्पादों के सैंपल भरती स्वास्थ्य टीम। संवाद।
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मिंजर मेले में इस बार नए और आकर्षक स्वरूप में खास पहचान बना रही चंबा चप्पल
पर्यटकों और लोगों को खूब भा रहा नया डिजाइन, तिल्ले की कढ़ाई के लिए थी प्रसिद्ध
सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार चंबा चप्पल नए और आकर्षक स्वरूप के कारण लोगों के बीच खास पहचान बना रही है।
वर्षों से हस्तनिर्मित कारीगरी और पारंपरिक डिजाइन के लिए प्रसिद्ध चंबा चप्पल को अब कौड़ी के साथ नया रूप दिया गया है। यह अनूठा डिजाइन मेले में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को खूब पसंद आ रहा है। खासकर महिलाएं इसे फैशन के साथ-साथ शुभता का प्रतीक मानकर खरीद रही हैं।
चंबा चप्पल के कारीगर विनोद कायस्था ने बताया कि बदलते समय के साथ ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। पहले चंबा चप्पल तिल्ले की कढ़ाई के कारण प्रसिद्ध थी। इसके बाद रेशम के धागों से आकर्षक आकृतियां बनाकर इसे नया रूप दिया गया। फिर मेटल वर्क के जरिये इसकी खूबसूरती बढ़ाई गई और अब कौड़ी लगाकर तैयार किया गया नया डिजाइन बाजार में उतारा गया है जिसे ग्राहकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।
उन्होंने बताया कि कई महिलाएं पैरों में काले धागे के साथ कौड़ी पहनना शुभ मानती हैं और इसे बुरी नजर से बचाव का प्रतीक भी समझती हैं। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए चंबा चप्पल में कौड़ी को कलात्मक ढंग से जोड़ा गया है। इससे पारंपरिक हस्तशिल्प में आधुनिकता का समावेश हुआ है और उत्पाद की उपयोगिता भी बढ़ी है।
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विनोद कायस्था ने बताया कि वह चंबा के अलावा सुजानपुर, शिमला, कुल्लू और मंडी सहित प्रदेश के विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में अपने स्टॉल लगाते हैं। उनका कहना है कि पारंपरिक कला में समयानुकूल नवाचार ही इसकी पहचान को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं। मिंजर मेले में 450 रुपये प्रति जोड़ी कौड़ी वाली चंबा चप्पल को मिल रही सराहना इस बात का प्रमाण है कि लोग परंपरा और आधुनिकता के इस सुंदर संगम को खुले दिल से अपना रहे हैं। इससे स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिलने के साथ कारीगरों के लिए रोजगार और बाजार की संभावनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं।
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पर्यटकों और लोगों को खूब भा रहा नया डिजाइन, तिल्ले की कढ़ाई के लिए थी प्रसिद्ध
सुभाष कुमार अग्निहोत्री
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार चंबा चप्पल नए और आकर्षक स्वरूप के कारण लोगों के बीच खास पहचान बना रही है।
वर्षों से हस्तनिर्मित कारीगरी और पारंपरिक डिजाइन के लिए प्रसिद्ध चंबा चप्पल को अब कौड़ी के साथ नया रूप दिया गया है। यह अनूठा डिजाइन मेले में आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को खूब पसंद आ रहा है। खासकर महिलाएं इसे फैशन के साथ-साथ शुभता का प्रतीक मानकर खरीद रही हैं।
चंबा चप्पल के कारीगर विनोद कायस्था ने बताया कि बदलते समय के साथ ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। पहले चंबा चप्पल तिल्ले की कढ़ाई के कारण प्रसिद्ध थी। इसके बाद रेशम के धागों से आकर्षक आकृतियां बनाकर इसे नया रूप दिया गया। फिर मेटल वर्क के जरिये इसकी खूबसूरती बढ़ाई गई और अब कौड़ी लगाकर तैयार किया गया नया डिजाइन बाजार में उतारा गया है जिसे ग्राहकों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है।
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उन्होंने बताया कि कई महिलाएं पैरों में काले धागे के साथ कौड़ी पहनना शुभ मानती हैं और इसे बुरी नजर से बचाव का प्रतीक भी समझती हैं। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए चंबा चप्पल में कौड़ी को कलात्मक ढंग से जोड़ा गया है। इससे पारंपरिक हस्तशिल्प में आधुनिकता का समावेश हुआ है और उत्पाद की उपयोगिता भी बढ़ी है।
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विनोद कायस्था ने बताया कि वह चंबा के अलावा सुजानपुर, शिमला, कुल्लू और मंडी सहित प्रदेश के विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में अपने स्टॉल लगाते हैं। उनका कहना है कि पारंपरिक कला में समयानुकूल नवाचार ही इसकी पहचान को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं। मिंजर मेले में 450 रुपये प्रति जोड़ी कौड़ी वाली चंबा चप्पल को मिल रही सराहना इस बात का प्रमाण है कि लोग परंपरा और आधुनिकता के इस सुंदर संगम को खुले दिल से अपना रहे हैं। इससे स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिलने के साथ कारीगरों के लिए रोजगार और बाजार की संभावनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं।