{"_id":"6a663e15b471a5b0560d92e1","slug":"the-entire-nation-is-rejoicing-at-the-voice-raised-from-the-platform-of-the-bal-sabha-chamba-news-c-88-1-ssml1007-191260-2026-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamba News: बाल सभा के मंच से उठी आवाज पर झूम रहा पूरा देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamba News: बाल सभा के मंच से उठी आवाज पर झूम रहा पूरा देश
Sun, 26 Jul 2026 11:02 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:02 PM IST
विज्ञापन
चंबा के रावमापा बगढार में बाल मेले के दौरान विद्यार्थी।संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
छठी कक्षा में बाल मेले की पहली प्रस्तुति से शुरू हुआ इशांत भारद्वाज की गायकी का सफर
बोले- शिक्षकों की प्रेरणा और बुजुर्गों के आशीर्वाद ने बनाया हिमाचल का चर्चित लोकगायक
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। शिक्षकों की प्रेरणा, बुजुर्गों के आशीर्वाद और परिवार के सहयोग से हिमाचल के युवा लोकगायक इशांत भारद्वाज ने अपनी मेहनत के दम पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अलग पहचान बनाई है। छठी कक्षा में स्कूल की बाल सभा में पहली बार प्रस्तुति देने वाले इशांत आज हिमाचल के चर्चित गायकों में शुमार हैं।
इशांत ने बताया कि उनके संगीत सफर की शुरुआत स्कूल के दिनों से हुई। शिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचान कर मंच दिया और लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। परिवार के बुजुर्गों के आशीर्वाद और माता-पिता के संस्कारों ने हर कठिन दौर में उनका हौसला बढ़ाया। उनका कहना है कि आज जो मुकाम मिला है, वह गुरुजनों, परिवार और श्रोताओं के प्यार का परिणाम है। इशांत के पिता रोशन लाल लोक निर्माण विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके हैं जबकि माता लज्जा देवी ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया। पत्नी शिल्पा, दोनों बेटे अनीश और मनन, भाई शिवांश और भाभी पूजा सहित पूरा संयुक्त परिवार उनके हर कदम पर साथ खड़ा रहा है। संगीत के प्रति जुनून को आगे बढ़ाते हुए इशांत ने वर्ष 2014 में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अपना म्यूजिकल ग्रुप बनाया। इसके बाद वर्ष 2020 में उनकी पहली एलबम निक्की जणी गोजरी रिलीज हुई। जिसे श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला। इसी गीत ने उन्हें नई पहचान दिलाई और सफलता की राह खोल दी।
आज इशांत भारद्वाज 100 से अधिक एलबम और गीतों को अपनी आवाज दे चुके हैं। उन्होंने पहाड़ी, गोजरी, कांगड़ी, हिंदी और भजन जैसी विभिन्न विधाओं में गायन कर अपनी अलग पहचान बनाई है। सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर भी उनके गीतों को लाखों श्रोता पसंद कर रहे हैं। अपनी मिट्टी की खुशबू और लोक संस्कृति को संगीत के माध्यम से देशभर तक पहुंचाने वाले ईशांत आज हिमाचल के उभरते नहीं, बल्कि स्थापित लोकगायकों में गिने जा रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
--
विज्ञापन
बोले- शिक्षकों की प्रेरणा और बुजुर्गों के आशीर्वाद ने बनाया हिमाचल का चर्चित लोकगायक
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। शिक्षकों की प्रेरणा, बुजुर्गों के आशीर्वाद और परिवार के सहयोग से हिमाचल के युवा लोकगायक इशांत भारद्वाज ने अपनी मेहनत के दम पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में अलग पहचान बनाई है। छठी कक्षा में स्कूल की बाल सभा में पहली बार प्रस्तुति देने वाले इशांत आज हिमाचल के चर्चित गायकों में शुमार हैं।
इशांत ने बताया कि उनके संगीत सफर की शुरुआत स्कूल के दिनों से हुई। शिक्षकों ने उनकी प्रतिभा को पहचान कर मंच दिया और लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। परिवार के बुजुर्गों के आशीर्वाद और माता-पिता के संस्कारों ने हर कठिन दौर में उनका हौसला बढ़ाया। उनका कहना है कि आज जो मुकाम मिला है, वह गुरुजनों, परिवार और श्रोताओं के प्यार का परिणाम है। इशांत के पिता रोशन लाल लोक निर्माण विभाग में अपनी सेवाएं दे चुके हैं जबकि माता लज्जा देवी ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया। पत्नी शिल्पा, दोनों बेटे अनीश और मनन, भाई शिवांश और भाभी पूजा सहित पूरा संयुक्त परिवार उनके हर कदम पर साथ खड़ा रहा है। संगीत के प्रति जुनून को आगे बढ़ाते हुए इशांत ने वर्ष 2014 में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अपना म्यूजिकल ग्रुप बनाया। इसके बाद वर्ष 2020 में उनकी पहली एलबम निक्की जणी गोजरी रिलीज हुई। जिसे श्रोताओं का भरपूर प्यार मिला। इसी गीत ने उन्हें नई पहचान दिलाई और सफलता की राह खोल दी।
विज्ञापन
आज इशांत भारद्वाज 100 से अधिक एलबम और गीतों को अपनी आवाज दे चुके हैं। उन्होंने पहाड़ी, गोजरी, कांगड़ी, हिंदी और भजन जैसी विभिन्न विधाओं में गायन कर अपनी अलग पहचान बनाई है। सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर भी उनके गीतों को लाखों श्रोता पसंद कर रहे हैं। अपनी मिट्टी की खुशबू और लोक संस्कृति को संगीत के माध्यम से देशभर तक पहुंचाने वाले ईशांत आज हिमाचल के उभरते नहीं, बल्कि स्थापित लोकगायकों में गिने जा रहे हैं। संवाद
विज्ञापन