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Chamba News: स्वाद से शुरू हुआ सफर, आत्मनिर्भरता तक पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 11 Jan 2026 10:12 PM IST
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चंबा। कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। बाट पंचायत की सुमन ने इस कथन को साकार कर दिखाया है। घरेलू जिम्मेदारियों, आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों के बीच सुमन ने दो वर्ष पहले अचार उद्योग की शुरुआत की, जो आज पूरे जिले में स्वाद, गुणवत्ता और भरोसे की पहचान बन चुका है।
शुरुआत में सुमन ने यह काम बेहद छोटे स्तर पर किया था। सीमित पूंजी और संसाधनों के बावजूद उन्होंने पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले अचार को आधुनिक पैकेजिंग और शुद्धता के साथ बाजार में उतारा। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और आज उनका अचार चंबा, भटियात और भरमौर जैसे क्षेत्रों में खासा लोकप्रिय हो चुका है।
इस अचार उद्योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे 25 ग्रामीण महिलाओं को नियमित रोजगार मिला है। उद्योग से जुड़ी महिलाएं अचार निर्माण, सफाई, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इससे वे घर बैठे आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। कई महिलाएं पहली बार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
सुमन का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, गुणवत्ता पर ध्यान और महिलाओं की टीमवर्क भावना ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका मानना है कि जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं, तो केवल एक परिवार नहीं बल्कि पूरा समाज आगे बढ़ता है।
आज सुमन का अचार उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूती देने का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। सुमन की सफलता न सिर्फ अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह साबित करती है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं।
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शुरुआत में सुमन ने यह काम बेहद छोटे स्तर पर किया था। सीमित पूंजी और संसाधनों के बावजूद उन्होंने पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले अचार को आधुनिक पैकेजिंग और शुद्धता के साथ बाजार में उतारा। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी और आज उनका अचार चंबा, भटियात और भरमौर जैसे क्षेत्रों में खासा लोकप्रिय हो चुका है।
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इस अचार उद्योग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे 25 ग्रामीण महिलाओं को नियमित रोजगार मिला है। उद्योग से जुड़ी महिलाएं अचार निर्माण, सफाई, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इससे वे घर बैठे आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। कई महिलाएं पहली बार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
सुमन का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, गुणवत्ता पर ध्यान और महिलाओं की टीमवर्क भावना ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका मानना है कि जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं, तो केवल एक परिवार नहीं बल्कि पूरा समाज आगे बढ़ता है।
आज सुमन का अचार उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर भारत की भावना को मजबूती देने का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। सुमन की सफलता न सिर्फ अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह साबित करती है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की नींव बन सकते हैं।