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Chamba News: जहां बच्चे पढ़ रहे, वहां व्यवस्था अभी भी अनपढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 18 Jun 2026 10:43 PM IST
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सोशल ऑडिट ने खोली पोल... जिले के स्कूलों में फर्नीचर से लेकर पानी तक गायब
बुनियादी जरूरतें भी फेल, चहारदीवारी नहीं, छात्राओं को नहीं मिलते सेनेटरी पैड
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले के सरकारी स्कूलों में सोशल ऑडिट ने जो तस्वीर सामने रखी है, वह सिर्फ आंकड़ों की रिपोर्ट नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत का आईना है। जहां कक्षाओं में बच्चे मौजूद हैं, वहीं फर्नीचर, पानी, चहारदीवारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। शिक्षा का ढांचा कागजों में मजबूत दिखता है लेकिन जमीन पर कई स्कूल अब भी ऐसी जरूरतों के इंतजार में हैं जो पढ़ाई को सुरक्षित और सुचारु बना सकें।
जिले में समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत संचालित सरकारी स्कूलों के सामाजिक अंकेक्षण में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में सामने आए तथ्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़ा कर रहे हैं। वीरवार को जिला मुख्यालय में जनसुनवाई के दौरान इन खामियों को सार्वजनिक किया गया। जनसुनवाई में अभिभावक, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि, स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्य और अन्य संबंधित पक्ष शामिल रहे। यह सामाजिक अंकेक्षण हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की एक टीम की ओर से किया गया। इसका नेतृत्व डॉ. रणधीर रांटा ने किया।
टीम ने जिले के 1,636 स्कूलों में से 342 स्कूलों का अध्ययन एवं मूल्यांकन किया। इनमें जनजातीय क्षेत्र भरमौर के विद्यालय भी शामिल हैं। यह कुल स्कूलों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। शेष स्कूलों का मूल्यांकन आगामी चार चरणों में होगा। डॉ. रणधीर रांटा ने कहा कि जिले के कई स्कूल मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जिले के एक तिहाई स्कूलों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए पर्याप्त कमरों की व्यवस्था नहीं है। लगभग 50 प्रतिशत विद्यालयों में पर्याप्त फर्नीचर नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल 50 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में चहारदीवारी नहीं पाई गई। लगभग 85 प्रतिशत विद्यालय ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां मोटर योग्य सड़क नहीं है। सामाजिक अंकेक्षण टीम के सदस्य हिमांशु ने बताया कि सर्वेक्षण में शामिल 16 प्रतिशत विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं। 17 प्रतिशत स्कूलों में पेयजल की सुविधा का अभाव है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में छात्राओं को सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं।
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क्षेत्रीय अधिकारी नहीं कर रहे स्कूलों का निरीक्षण
शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विद्यालयों का निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वन नेशन, ग्रेट नेशन कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन बड़ी संख्या में विद्यालयों में नहीं हो रहा है। रिपोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा उपनिदेशक विकास महाजन, चंबा कॉलेज प्राचार्य प्रो राकेश राठौर, कार्यकारी प्रधानाचार्य डाईट नम्रता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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बुनियादी जरूरतें भी फेल, चहारदीवारी नहीं, छात्राओं को नहीं मिलते सेनेटरी पैड
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले के सरकारी स्कूलों में सोशल ऑडिट ने जो तस्वीर सामने रखी है, वह सिर्फ आंकड़ों की रिपोर्ट नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत का आईना है। जहां कक्षाओं में बच्चे मौजूद हैं, वहीं फर्नीचर, पानी, चहारदीवारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। शिक्षा का ढांचा कागजों में मजबूत दिखता है लेकिन जमीन पर कई स्कूल अब भी ऐसी जरूरतों के इंतजार में हैं जो पढ़ाई को सुरक्षित और सुचारु बना सकें।
जिले में समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) के तहत संचालित सरकारी स्कूलों के सामाजिक अंकेक्षण में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में सामने आए तथ्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़ा कर रहे हैं। वीरवार को जिला मुख्यालय में जनसुनवाई के दौरान इन खामियों को सार्वजनिक किया गया। जनसुनवाई में अभिभावक, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि, स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्य और अन्य संबंधित पक्ष शामिल रहे। यह सामाजिक अंकेक्षण हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की एक टीम की ओर से किया गया। इसका नेतृत्व डॉ. रणधीर रांटा ने किया।
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टीम ने जिले के 1,636 स्कूलों में से 342 स्कूलों का अध्ययन एवं मूल्यांकन किया। इनमें जनजातीय क्षेत्र भरमौर के विद्यालय भी शामिल हैं। यह कुल स्कूलों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। शेष स्कूलों का मूल्यांकन आगामी चार चरणों में होगा। डॉ. रणधीर रांटा ने कहा कि जिले के कई स्कूल मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जिले के एक तिहाई स्कूलों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए पर्याप्त कमरों की व्यवस्था नहीं है। लगभग 50 प्रतिशत विद्यालयों में पर्याप्त फर्नीचर नहीं है। सर्वेक्षण में शामिल 50 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में चहारदीवारी नहीं पाई गई। लगभग 85 प्रतिशत विद्यालय ऐसे क्षेत्रों में हैं जहां मोटर योग्य सड़क नहीं है। सामाजिक अंकेक्षण टीम के सदस्य हिमांशु ने बताया कि सर्वेक्षण में शामिल 16 प्रतिशत विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं। 17 प्रतिशत स्कूलों में पेयजल की सुविधा का अभाव है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में छात्राओं को सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं।
क्षेत्रीय अधिकारी नहीं कर रहे स्कूलों का निरीक्षण
शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विद्यालयों का निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वन नेशन, ग्रेट नेशन कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन बड़ी संख्या में विद्यालयों में नहीं हो रहा है। रिपोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा उपनिदेशक विकास महाजन, चंबा कॉलेज प्राचार्य प्रो राकेश राठौर, कार्यकारी प्रधानाचार्य डाईट नम्रता सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।