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Hamirpur (Himachal) News: आरबीएसके के तहत 17 बच्चों को मिला नया जीवन
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:52 AM IST
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हमीरपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जिले के 17 बच्चों को नया जीवन मिला है। विभिन्न शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को सर्जरी से राहत मिली है।
अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक डीईआईसी हमीरपुर से उच्च स्वास्थ्य संस्थानों को रेफर किए विभिन्न गंभीर जन्मजात और शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे बच्चों की सफल सर्जरी कर उन्हें स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ाया गया। कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) के तीन और कटे तालू के तीन मामलों में सफल सर्जरी की।
इसके अलावा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित दो बच्चों का ऑपरेशन किया, जिनमें से एक सर्जरी आईजीएमसी शिमला में तथा दूसरी पीजीआई चंडीगढ़ में हुई। कोक्लियर इम्प्लांट में एक सर्जरी की। इसी क्रम में टेढ़े-मेढ़े पैर (क्लब फुट) से ग्रसित चार बच्चों का भी सफल ऑपरेशन किया। जन्मजात मोतियाबिंद के एक मामले में सर्जरी कर बच्चे की दृष्टि को सुरक्षित किया। भेंगापन (स्क्विंट) से पीड़ित एक बच्चे का भी सफल इलाज किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकारों की समय रहते पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार सुनिश्चित करना है। इन सफल सर्जरी से न केवल बच्चों को नई जिंदगी मिली है, बल्कि उनके परिवारों को भी बड़ी राहत प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न बीमारियों की जांच की जाती हैं।
आरबीएसके की टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ियों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य का निरीक्षण करती हैं। जो बच्चे इन बीमारियों से पीड़ित पाए जाते हैं, उनके इलाज का सारा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। संवाद
कोट
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे 17 बच्चों की सफल सर्जरी की। आरबीएसके की टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ियों में जाकर बच्चों की पहचान करती हैं। -डॉ. अजय कुमार, जिला स्वास्थ्य अधिकारी
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अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक डीईआईसी हमीरपुर से उच्च स्वास्थ्य संस्थानों को रेफर किए विभिन्न गंभीर जन्मजात और शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे बच्चों की सफल सर्जरी कर उन्हें स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ाया गया। कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) के तीन और कटे तालू के तीन मामलों में सफल सर्जरी की।
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इसके अलावा जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित दो बच्चों का ऑपरेशन किया, जिनमें से एक सर्जरी आईजीएमसी शिमला में तथा दूसरी पीजीआई चंडीगढ़ में हुई। कोक्लियर इम्प्लांट में एक सर्जरी की। इसी क्रम में टेढ़े-मेढ़े पैर (क्लब फुट) से ग्रसित चार बच्चों का भी सफल ऑपरेशन किया। जन्मजात मोतियाबिंद के एक मामले में सर्जरी कर बच्चे की दृष्टि को सुरक्षित किया। भेंगापन (स्क्विंट) से पीड़ित एक बच्चे का भी सफल इलाज किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात विकारों की समय रहते पहचान कर उनका निःशुल्क उपचार सुनिश्चित करना है। इन सफल सर्जरी से न केवल बच्चों को नई जिंदगी मिली है, बल्कि उनके परिवारों को भी बड़ी राहत प्राप्त हुई है। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न बीमारियों की जांच की जाती हैं।
आरबीएसके की टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ियों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य का निरीक्षण करती हैं। जो बच्चे इन बीमारियों से पीड़ित पाए जाते हैं, उनके इलाज का सारा खर्च केंद्र सरकार उठाती है। संवाद
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे 17 बच्चों की सफल सर्जरी की। आरबीएसके की टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ियों में जाकर बच्चों की पहचान करती हैं। -डॉ. अजय कुमार, जिला स्वास्थ्य अधिकारी