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Hamirpur (Himachal) News: बड़सर को क्लीन स्वीप का इनाम, भोरंज पर सियासी संतुलन मेहरबान
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जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चयन में भाजपा नेतृत्व ने साधे क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण
समीरपुर का जिला परिषद में दिखा प्रभाव, सत्तारूढ़ कांग्रेस अभी भी नतीजों पर खामोश
कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। जिला परिषद हमीरपुर में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के साथ भाजपा ने सिर्फ संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि अंदरूनी सियासी संतुलन और क्षेत्रीय समीकरण साधने का भी संदेश दिया। 19 सदस्यीय जिला परिषद में भाजपा विचारधारा के 18 सदस्य निर्वाचित होने के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन में सभी क्षेत्रों और वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की थी। सोमवार को हुए निर्विरोध चुनाव के जरिए पार्टी ने यही संतुलन साधने की कोशिश की।
जिला परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित 15 प्रत्याशी विजयी हुए थे, जबकि दो बागी और एक निर्दलीय सदस्य भी बाद में भाजपा के साथ आ गए। इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर सर्वसम्मति बन गई। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ कांग्रेस जिला परिषद चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब तक पूरी तरह खामोश है। पार्टी की ओर से न तो समीक्षा बैठक हुई है और न ही चुनाव परिणामों पर कोई ठोस राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
भाजपा ने बड़सर विधानसभा क्षेत्र के प्रदर्शन को उपाध्यक्ष पद के रूप में अहम तवज्जो दी। चारों जिला परिषद सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत और दांदड़ू वार्ड में बगावत के बावजूद संगठन की सफलता को नेतृत्व ने सकारात्मक संकेत माना। करेर वार्ड से अनुसूचित जाति वर्ग से निर्वाचित सदस्य गुरदीप सिंह को उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने न केवल क्षेत्रीय, बल्कि जातीय समीकरणों को भी साधने का प्रयास किया। गुरदीप सिंह पूर्व में बीडीसी सदस्य रह चुके हैं। वह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, बड़सर मंडल में महामंत्री और वर्तमान में मंडल उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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वहीं, भोरंज विधानसभा क्षेत्र के धमरोल वार्ड से निर्वाचित अनिता शर्मा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने अनुभव और संगठनात्मक सक्रियता को प्राथमिकता दी। पंचायती राज संस्थाओं में लंबा अनुभव रखने वाली अनिता शर्मा भाजपा संगठन में कई पदों पर कार्य कर चुकी हैं और वर्तमान में समीरपुर मंडल की सचिव हैं। उनकी ताजपोशी को भोरंज क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने के साथ संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उन्हें धूमल परिवार के करीबी माना जाता है।
घुमारवीं में बदले समीकरण, समीरपुर का दिखा प्रभाव
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नामों पर अंतिम मुहर रविवार को घुमारवीं में हुई बैठक में लगी। चुनाव प्रभारी रणधीर शर्मा, सांसद अनुराग ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा, विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, विधायक आशीष शर्मा सहित वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में लंबी चर्चा के बाद अनिता शर्मा और गुरदीप सिंह के नाम पर सहमति बनी। अध्यक्ष पद के लिए दांदड़ू वार्ड की रेणुबाला और पनोह वार्ड की आशा ठाकुर के नाम भी चर्चा में रहे। अंततः भोरंज को अध्यक्ष और बड़सर को उपाध्यक्ष पद देकर नेतृत्व ने दोनों क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने का फैसला किया। अध्यक्ष उपाध्यक्ष चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री धूमल और सांसद अनुराग ठाकुर का सीधा प्रभाव दिखा है।
पांच पंचायत समितियों के चुनाव पर अब भी सस्पेंस
जिले की छह पंचायत समितियों में से अब तक केवल भोरंज पंचायत समिति का गठन हो सका है, जहां कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई। शेष पांच पंचायत समितियों के चुनाव अभी तक नहीं हो सके हैं। जिला परिषद चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर पंचायत समिति चुनावों पर है। कांग्रेस की चुप्पी और चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है। आगामी पंचायत समिति चुनाव जिले की राजनीति का अगला बड़ा पड़ाव माने जा रहे हैं।
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समीरपुर का जिला परिषद में दिखा प्रभाव, सत्तारूढ़ कांग्रेस अभी भी नतीजों पर खामोश
कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। जिला परिषद हमीरपुर में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के साथ भाजपा ने सिर्फ संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन ही नहीं किया, बल्कि अंदरूनी सियासी संतुलन और क्षेत्रीय समीकरण साधने का भी संदेश दिया। 19 सदस्यीय जिला परिषद में भाजपा विचारधारा के 18 सदस्य निर्वाचित होने के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन में सभी क्षेत्रों और वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की थी। सोमवार को हुए निर्विरोध चुनाव के जरिए पार्टी ने यही संतुलन साधने की कोशिश की।
जिला परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित 15 प्रत्याशी विजयी हुए थे, जबकि दो बागी और एक निर्दलीय सदस्य भी बाद में भाजपा के साथ आ गए। इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर सर्वसम्मति बन गई। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ कांग्रेस जिला परिषद चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब तक पूरी तरह खामोश है। पार्टी की ओर से न तो समीक्षा बैठक हुई है और न ही चुनाव परिणामों पर कोई ठोस राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
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भाजपा ने बड़सर विधानसभा क्षेत्र के प्रदर्शन को उपाध्यक्ष पद के रूप में अहम तवज्जो दी। चारों जिला परिषद सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत और दांदड़ू वार्ड में बगावत के बावजूद संगठन की सफलता को नेतृत्व ने सकारात्मक संकेत माना। करेर वार्ड से अनुसूचित जाति वर्ग से निर्वाचित सदस्य गुरदीप सिंह को उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने न केवल क्षेत्रीय, बल्कि जातीय समीकरणों को भी साधने का प्रयास किया। गुरदीप सिंह पूर्व में बीडीसी सदस्य रह चुके हैं। वह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, बड़सर मंडल में महामंत्री और वर्तमान में मंडल उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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वहीं, भोरंज विधानसभा क्षेत्र के धमरोल वार्ड से निर्वाचित अनिता शर्मा को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने अनुभव और संगठनात्मक सक्रियता को प्राथमिकता दी। पंचायती राज संस्थाओं में लंबा अनुभव रखने वाली अनिता शर्मा भाजपा संगठन में कई पदों पर कार्य कर चुकी हैं और वर्तमान में समीरपुर मंडल की सचिव हैं। उनकी ताजपोशी को भोरंज क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने के साथ संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। उन्हें धूमल परिवार के करीबी माना जाता है।
घुमारवीं में बदले समीकरण, समीरपुर का दिखा प्रभाव
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नामों पर अंतिम मुहर रविवार को घुमारवीं में हुई बैठक में लगी। चुनाव प्रभारी रणधीर शर्मा, सांसद अनुराग ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र राणा, विधायक इंद्रदत्त लखनपाल, विधायक आशीष शर्मा सहित वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में लंबी चर्चा के बाद अनिता शर्मा और गुरदीप सिंह के नाम पर सहमति बनी। अध्यक्ष पद के लिए दांदड़ू वार्ड की रेणुबाला और पनोह वार्ड की आशा ठाकुर के नाम भी चर्चा में रहे। अंततः भोरंज को अध्यक्ष और बड़सर को उपाध्यक्ष पद देकर नेतृत्व ने दोनों क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाने का फैसला किया। अध्यक्ष उपाध्यक्ष चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री धूमल और सांसद अनुराग ठाकुर का सीधा प्रभाव दिखा है।
पांच पंचायत समितियों के चुनाव पर अब भी सस्पेंस
जिले की छह पंचायत समितियों में से अब तक केवल भोरंज पंचायत समिति का गठन हो सका है, जहां कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई। शेष पांच पंचायत समितियों के चुनाव अभी तक नहीं हो सके हैं। जिला परिषद चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन के बाद अब सभी की नजर पंचायत समिति चुनावों पर है। कांग्रेस की चुप्पी और चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर जारी है। आगामी पंचायत समिति चुनाव जिले की राजनीति का अगला बड़ा पड़ाव माने जा रहे हैं।