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Hamirpur (Himachal) News: बदलती जीवनशैली और खानपान से गर्भावस्था में बढ़ा जोखिम, हर पांचवां प्रसव हाई रिस्क
Thu, 09 Jul 2026 12:46 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:46 AM IST
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नवीन ठाकुर
हमीरपुर। बदलती जीवनशैली और खानपान की खराब आदतों का असर गर्भवती महिलाओं की सेहत पर भी पड़ रहा है। असंतुलित आहार, एनीमिया, उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में पंजीकृत करीब हर पांचवां प्रसव हाई रिस्क श्रेणी में पहुंच रहा है।
मेडिकल कॉलेज में हर माह औसतन 315 से 350 प्रसव होते हैं, जिनमें 65 से 70 गर्भवतियों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में सामान्य प्रसव की तुलना में अधिक चिकित्सकीय निगरानी और विशेष उपचार की आवश्यकता होती है।
चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान खून की कमी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पोषण की कमी से समय से पहले प्रसव, कम वजन के शिशु का जन्म और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, समय पर जांच और उचित देखभाल से अधिकांश हाई रिस्क मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है।
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विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, आयरन और कैल्शियम की नियमित खुराक, समय पर टीकाकरण और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की सलाह दी है, ताकि मां और शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
समय पर जांच से टल सकता है बड़ा खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रत्येक गर्भवती महिला को नियमित प्रसवपूर्व जांच करानी चाहिए। संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेना, आयरन की गोलियों का सेवन, समय पर टीकाकरण और डॉक्टर की सलाह का पालन सुरक्षित मातृत्व की सबसे बड़ी कुंजी है। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे हाई रिस्क गर्भवतियों की समय रहते पहचान कर उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करें, ताकि जटिल परिस्थितियों से बचा जा सके।
कोट
मेडिकल कॉलेज में हर माह 315 से 350 प्रसव होते हैं। इनमें कुछ प्रसव हाई रिस्क श्रेणी के भी होते हैं। ऐसे सभी मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में बेहतर उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
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हमीरपुर। बदलती जीवनशैली और खानपान की खराब आदतों का असर गर्भवती महिलाओं की सेहत पर भी पड़ रहा है। असंतुलित आहार, एनीमिया, उच्च रक्तचाप और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में पंजीकृत करीब हर पांचवां प्रसव हाई रिस्क श्रेणी में पहुंच रहा है।
मेडिकल कॉलेज में हर माह औसतन 315 से 350 प्रसव होते हैं, जिनमें 65 से 70 गर्भवतियों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में सामान्य प्रसव की तुलना में अधिक चिकित्सकीय निगरानी और विशेष उपचार की आवश्यकता होती है।
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चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान खून की कमी, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पोषण की कमी से समय से पहले प्रसव, कम वजन के शिशु का जन्म और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, समय पर जांच और उचित देखभाल से अधिकांश हाई रिस्क मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है।
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विशेषज्ञों ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, आयरन और कैल्शियम की नियमित खुराक, समय पर टीकाकरण और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की सलाह दी है, ताकि मां और शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
समय पर जांच से टल सकता है बड़ा खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रत्येक गर्भवती महिला को नियमित प्रसवपूर्व जांच करानी चाहिए। संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेना, आयरन की गोलियों का सेवन, समय पर टीकाकरण और डॉक्टर की सलाह का पालन सुरक्षित मातृत्व की सबसे बड़ी कुंजी है। आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे हाई रिस्क गर्भवतियों की समय रहते पहचान कर उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करें, ताकि जटिल परिस्थितियों से बचा जा सके।
कोट
मेडिकल कॉलेज में हर माह 315 से 350 प्रसव होते हैं। इनमें कुछ प्रसव हाई रिस्क श्रेणी के भी होते हैं। ऐसे सभी मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में बेहतर उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर