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रेलवे परियोजनाओं में कांग्रेस सरकार के असहयोग के कारण हो रहा विलंब : अनुराग
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:52 AM IST
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हमीरपुर। पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण रेलवे एवं इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में राज्य सरकार के अपेक्षित सहयोग के अभाव के कारण हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कहा कि लोकसभा में रेल मंत्रालय द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार की ओर से समय पर सहयोग न मिलना और किए गए वादों को पूरा न करना परियोजनाओं की प्रगति में बाधा बन रहा है, जिससे निर्धारित समयसीमा प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में रेलवे सेवाओं के विस्तार और नई परियोजनाओं को लाने के लिए वे निरंतर प्रयासरत रहे हैं, लेकिन राज्य में कांग्रेस सरकार की उदासीनता के चलते कई सामरिक महत्व की परियोजनाओं की गति धीमी पड़ गई है। उन्होंने बताया कि भानुपली-बिलासपुर-बेरी नई रेल लाइन, जिसे लागत साझा आधार पर स्वीकृति दी गई थी, पर अब तक 5,252 करोड़ खर्च हो चुके हैं, जबकि राज्य का 1,843 करोड़ का हिस्सा अभी भी लंबित है, जिससे शेष कार्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि परियोजनाओं के लिए आवश्यक 124.02 हेक्टेयर भूमि में से अब तक केवल 82 हेक्टेयर भूमि ही उपलब्ध कराई गई है, जिसके कारण निर्माण कार्य सीमित क्षेत्र में ही संभव हो पा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुल 214 किलोमीटर लंबाई की तीन स्वीकृत नई लाइन परियोजनाओं, जिनकी कुल लागत 17,622 करोड़ है, में से 64 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो चुका है और इन पर अब तक 8,280 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन, जिसकी सर्वेक्षण और डीपीआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, की अनुमानित लागत 1,31,000 करोड़ है और इसे रक्षा मंत्रालय द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना माना गया है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह अपना लंबित वित्तीय अंश शीघ्र जारी करे, शेष भूमि का हस्तांतरण तेजी से सुनिश्चित करे तथा आवश्यक स्वीकृतियों के लिए त्वरित प्रक्रिया अपनाए।
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मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कहा कि लोकसभा में रेल मंत्रालय द्वारा दिए गए लिखित उत्तर में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार की ओर से समय पर सहयोग न मिलना और किए गए वादों को पूरा न करना परियोजनाओं की प्रगति में बाधा बन रहा है, जिससे निर्धारित समयसीमा प्रभावित हो रही है।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में रेलवे सेवाओं के विस्तार और नई परियोजनाओं को लाने के लिए वे निरंतर प्रयासरत रहे हैं, लेकिन राज्य में कांग्रेस सरकार की उदासीनता के चलते कई सामरिक महत्व की परियोजनाओं की गति धीमी पड़ गई है। उन्होंने बताया कि भानुपली-बिलासपुर-बेरी नई रेल लाइन, जिसे लागत साझा आधार पर स्वीकृति दी गई थी, पर अब तक 5,252 करोड़ खर्च हो चुके हैं, जबकि राज्य का 1,843 करोड़ का हिस्सा अभी भी लंबित है, जिससे शेष कार्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि परियोजनाओं के लिए आवश्यक 124.02 हेक्टेयर भूमि में से अब तक केवल 82 हेक्टेयर भूमि ही उपलब्ध कराई गई है, जिसके कारण निर्माण कार्य सीमित क्षेत्र में ही संभव हो पा रहा है। इसके अतिरिक्त, कुल 214 किलोमीटर लंबाई की तीन स्वीकृत नई लाइन परियोजनाओं, जिनकी कुल लागत 17,622 करोड़ है, में से 64 किलोमीटर का कार्य पूर्ण हो चुका है और इन पर अब तक 8,280 करोड़ व्यय किए जा चुके हैं।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन, जिसकी सर्वेक्षण और डीपीआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, की अनुमानित लागत 1,31,000 करोड़ है और इसे रक्षा मंत्रालय द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजना माना गया है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह अपना लंबित वित्तीय अंश शीघ्र जारी करे, शेष भूमि का हस्तांतरण तेजी से सुनिश्चित करे तथा आवश्यक स्वीकृतियों के लिए त्वरित प्रक्रिया अपनाए।