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Hamirpur (Himachal) News: बुजुर्ग पिता पीटकर घर से निकाला, अब बेटों और बहू को 30 दिन में मकान-दुकान खाली करने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 18 Apr 2026 01:20 AM IST
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सुजानपुर (हमीरपुर)। बुजुर्ग पिता के साथ मारपीट कर उन्हें घर से निकालने के मामले में एसडीएम कोर्ट सुजानपुर ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन बेटों और एक बहू को 30 दिन के भीतर पैतृक मकान और दुकानें खाली करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही पुलिस को भी बुजुर्ग को सुरक्षा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। जंगल बैरी पंचायत के गांव कुडाना निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अदालत ने आरोपियों को यह भी आदेश दिए हैं कि वे बुजुर्ग के शांतिपूर्ण जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा न डालें और न ही उन्हें धमकाएं और गाली दें या प्रताड़ित करें।
याचिका में बुजुर्ग ने बताया कि उनके बेटों और बहू ने उन्हें उनके ही मकान से जबरन बेदखल कर दिया और उनके नाम पर बने मकान और दुकानों पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वह बैरी गांव में एक छोटे से कमरे में बिना किसी बुनियादी सुविधा के रहने को मजबूर हो गए।
बुजुर्ग ने अदालत को बताया कि पिछले डेढ़ साल से तीन बेटे और एक बहू उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। 14 सितंबर 2025 को एक बेटे और बहू ने लोहे की रॉड से उन पर हमला कर दिया।
इस हमले में उनके पैर में फ्रेक्चर हो गया, हाथ टूट गया और सिर पर गहरी चोट आ गई। उन्हें मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में भर्ती करवाया गया, जहां उनका उपचार अब भी जारी है।
मारपीट में आई चोटों की तस्वीरें भी अदालत में पेश की गईं। अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपियों के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मामले लंबित हैं।
बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा जरूरी
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है। अदालत ने कहा कि बुजुर्ग को उनकी संपत्ति पर सम्मानपूर्वक रहने का अधिकार है।
पुलिस को सुरक्षा देने के निर्देश
अदालत ने थाना सुजानपुर के प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि बुजुर्ग को उनके घर में आवश्यकतानुसार पुलिस सुरक्षा दी जाए, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। आदेश की प्रति जिला कल्याण अधिकारी और थाना प्रभारी सुजानपुर को भी भेजी गई है, ताकि आदेशों का समय पर पालन हो सके।
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साथ ही पुलिस को भी बुजुर्ग को सुरक्षा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। जंगल बैरी पंचायत के गांव कुडाना निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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अदालत ने आरोपियों को यह भी आदेश दिए हैं कि वे बुजुर्ग के शांतिपूर्ण जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा न डालें और न ही उन्हें धमकाएं और गाली दें या प्रताड़ित करें।
याचिका में बुजुर्ग ने बताया कि उनके बेटों और बहू ने उन्हें उनके ही मकान से जबरन बेदखल कर दिया और उनके नाम पर बने मकान और दुकानों पर कब्जा कर लिया। इसके बाद वह बैरी गांव में एक छोटे से कमरे में बिना किसी बुनियादी सुविधा के रहने को मजबूर हो गए।
बुजुर्ग ने अदालत को बताया कि पिछले डेढ़ साल से तीन बेटे और एक बहू उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। 14 सितंबर 2025 को एक बेटे और बहू ने लोहे की रॉड से उन पर हमला कर दिया।
इस हमले में उनके पैर में फ्रेक्चर हो गया, हाथ टूट गया और सिर पर गहरी चोट आ गई। उन्हें मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में भर्ती करवाया गया, जहां उनका उपचार अब भी जारी है।
मारपीट में आई चोटों की तस्वीरें भी अदालत में पेश की गईं। अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपियों के खिलाफ पहले से तीन आपराधिक मामले लंबित हैं।
बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा जरूरी
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है। अदालत ने कहा कि बुजुर्ग को उनकी संपत्ति पर सम्मानपूर्वक रहने का अधिकार है।
पुलिस को सुरक्षा देने के निर्देश
अदालत ने थाना सुजानपुर के प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि बुजुर्ग को उनके घर में आवश्यकतानुसार पुलिस सुरक्षा दी जाए, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। आदेश की प्रति जिला कल्याण अधिकारी और थाना प्रभारी सुजानपुर को भी भेजी गई है, ताकि आदेशों का समय पर पालन हो सके।

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