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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Even 15 years after being granted CHC status, Galod Hospital continues to face a severe lack of facilities.

Hamirpur (Himachal) News: सीएचसी का दर्जा मिलने के 15 साल बाद भी गलोड़ अस्पताल में सुविधाओं का टोटा

Mon, 26 Oct 2026 01:29 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Mon, 26 Oct 2026 01:29 AM IST
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Even 15 years after being granted CHC status, Galod Hospital continues to face a severe lack of facilities.
-शशि शर्मा, निवासी नारायण द ताल - फोटो : katra news
गलोड़ (हमीरपुर)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्तरोन्नत हुए गलोड़ अस्पताल को 15 साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मरीजों को आज भी अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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वर्ष 2011 में सीएचसी का दर्जा मिलने के बावजूद अस्पताल के नए भवन का निर्माण जमीन चिह्नित न होने के कारण अटका हुआ है। वहीं, स्त्री रोग विशेषज्ञ और एमडी मेडिसिन जैसे विशेषज्ञों के पद सृजित न होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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गलोड़ क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले इस अस्पताल में रोजाना 150 से अधिक ओपीडी होती हैं। सीएचसी स्तर पर मेडिकल ऑफिसर के पांच पद स्वीकृत हैं और सभी भरे हुए हैं। एनएमओ (नेशनल मेडिकोस ऑर्गेनाइजेशन) में रेडियोलॉजिस्ट और डेंटल सर्जन भी शामिल हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ सेवाओं की कमी बनी हुई है।
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अस्पताल का मौजूदा भवन भी मरीजों की बढ़ती संख्या के लिहाज से छोटा पड़ रहा है। सीएचसी स्तर पर करीब 30 बिस्तरों की सुविधा अपेक्षित है, लेकिन जगह की कमी के चलते यहां केवल आठ बिस्तर ही उपलब्ध हैं। अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा देने की मांग लंबे समय से उठ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती के लिए पहले संबंधित पदों का सृजन जरूरी है। सिविल अस्पताल का दर्जा मिलने और मांग के अनुरूप नए भवन का निर्माण होने पर ही यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का रास्ता खुल सकेगा।

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अल्ट्रासाउंड के लिए भी तय दिन, रोजाना सुविधा की मांग
गलोड़ अस्पताल में बुधवार और वीरवार को छोड़कर अन्य दिनों में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है। लोग इसे सप्ताह के सभी दिनों में शुरू करने की मांग कर रहे हैं। त्वचा रोग और ईएनटी (नाक, कान व गला) समेत अन्य विशेषज्ञ सेवाओं की भी जरूरत महसूस की जा रही है। अस्पताल में पांच नर्सों के स्वीकृत पदों में से चार भरे हैं, जबकि एक खाली है। प्रशिक्षित दाइयों के तीन पदों में से दो रिक्त हैं और एक पद पर ही तैनाती है।


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स्वास्थ्य संस्थान में पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता मरीजों को समय पर सेवाएं देने के लिए जरूरी है। रिक्त पदों को भरना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अस्पताल की प्रमुख जरूरतों में शामिल है। -शशि शर्मा, निवासी नारायण द ताल

सीएचसी का दर्जा मिलने के बाद भी अस्पताल को नए भवन के लिए जमीन का इंतजार करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर पड़ना स्वाभाविक है। -संतोष कुमार, निवासी लहड़ा



कोट

अस्पताल के नए भवन के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश जारी है। कुछ जगह देखी गई हैं। उपयुक्त जमीन मिलने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। -डॉ. सतीश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हमीरपुर

-शशि शर्मा, निवासी नारायण द ताल

-शशि शर्मा, निवासी नारायण द ताल- फोटो : katra news

-शशि शर्मा, निवासी नारायण द ताल

-शशि शर्मा, निवासी नारायण द ताल- फोटो : katra news

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