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Hamirpur (Himachal) News: घोषणा के एक वर्ष बाद भी सुजानपुर में डायलिसिस सुविधा नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 12 Apr 2026 01:49 AM IST
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सुजानपुर(हमीरपुर)। घोषणा के एक वर्ष बाद भी सुजानपुर सिविल अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। हालात ऐसे हैं कि आपात स्थिति में मरीजों को मेडिकल कॉलेज या निजी संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है।
सुविधा न मिलने से मरीजों को बीमारी के साथ आर्थिक दिक्कतों से भी जूझना पड़ रहा है। बीते वर्ष मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जनता की सुविधा के लिए अस्पताल में सुविधा शुरू करने की घोषणा की थी, ताकि मरीजों को सुविधा मिल सके। घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित अस्पताल प्रबंधन से फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांगी गई थी, ताकि धरातल पर योजना को शुरू किया जा सके, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है।
वर्तमान में पूरे जिले में डायलिसिस की सुविधा केवल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और तीन निजी संस्थानों में ही उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में डायलिसिस के लिए अधिक भीड़ होती है। इस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
वहीं, निजी अस्पतालों में मरीजों को अधिक फीस चुकानी पड़ती है। कई बार मरीजों को जिला के बाहर भी डायलिसिस के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में सुजानपुर और आसपास के मरीजों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
सुजानपुर अस्पताल में डायलिसिस सुविधा को लेकर संबंधित अस्पताल प्रबंधन से फिजिबिलिटी रिपोर्ट भेज दी है। अभी तक सुविधा को लेकर कोई भी निर्देश नहीं आए हैं। अस्पताल में मरीजों को सभी स्वास्थ्य प्रदान की जा रही हैं। -डॉ. राज कुमार, बीएमओ सुजानपुर
डायलिसिस प्रक्रिया
डायलिसिस रक्त शोधन की एक कृत्रिम विधि होती है। इस डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है, जब किसी व्यक्ति के गुर्दे सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। यदि डायलिसिस रोगी के गुर्दे बदलकर नए गुर्दे लगाने हों, तो डायलिसिस की प्रक्रिया अस्थाई होती है। यदि रोगी के गुर्दे इस स्थिति में न हों कि उन्हें प्रत्यारोपित किया जाए, तो डायलिसिस अस्थायी होती है, जिसे आवधिक किया जाता है।
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सुविधा न मिलने से मरीजों को बीमारी के साथ आर्थिक दिक्कतों से भी जूझना पड़ रहा है। बीते वर्ष मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जनता की सुविधा के लिए अस्पताल में सुविधा शुरू करने की घोषणा की थी, ताकि मरीजों को सुविधा मिल सके। घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से संबंधित अस्पताल प्रबंधन से फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांगी गई थी, ताकि धरातल पर योजना को शुरू किया जा सके, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है।
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वर्तमान में पूरे जिले में डायलिसिस की सुविधा केवल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और तीन निजी संस्थानों में ही उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में डायलिसिस के लिए अधिक भीड़ होती है। इस कारण मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
वहीं, निजी अस्पतालों में मरीजों को अधिक फीस चुकानी पड़ती है। कई बार मरीजों को जिला के बाहर भी डायलिसिस के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में सुजानपुर और आसपास के मरीजों को इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
सुजानपुर अस्पताल में डायलिसिस सुविधा को लेकर संबंधित अस्पताल प्रबंधन से फिजिबिलिटी रिपोर्ट भेज दी है। अभी तक सुविधा को लेकर कोई भी निर्देश नहीं आए हैं। अस्पताल में मरीजों को सभी स्वास्थ्य प्रदान की जा रही हैं। -डॉ. राज कुमार, बीएमओ सुजानपुर
डायलिसिस प्रक्रिया
डायलिसिस रक्त शोधन की एक कृत्रिम विधि होती है। इस डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है, जब किसी व्यक्ति के गुर्दे सही से काम नहीं कर रहे होते हैं। यदि डायलिसिस रोगी के गुर्दे बदलकर नए गुर्दे लगाने हों, तो डायलिसिस की प्रक्रिया अस्थाई होती है। यदि रोगी के गुर्दे इस स्थिति में न हों कि उन्हें प्रत्यारोपित किया जाए, तो डायलिसिस अस्थायी होती है, जिसे आवधिक किया जाता है।