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Hamirpur (Himachal) News: किसानों को एवोकैडो की खेती के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:09 AM IST
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औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नेरी में एवोकैडो की खेती पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के स
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रंगस(हमीरपुर)। औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नेरी में एवोकैडो की खेती पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला शुक्रवार को संपन्न हुई। कार्यशाला में प्रदेश के उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के 20 किसानों ने भाग लिया।
कार्यशाला के समापन पर विश्वविद्यालय के डीन डॉ. डीपी शर्मा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। उन्होंने कहा एवोकैडो जैसी उच्च मूल्य वाली कम लागत वाली फसलें न केवल फल उत्पादन के लिए अपनाने के लिए, बल्कि नर्सरी उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के क्षेत्र में उद्यमी बनने के लिए भी योगदान देती हैं।
कार्यशाला में फल विज्ञान विभाग के प्रो. और विभागाध्यक्ष डॉ. शशि के. शर्मा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रदेश में एवोकैडो के पोषण संबंधी महत्व और व्यावसायीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। परियोजना के कार्यक्रम प्रभारी डॉ. विकास के.शर्मा ने हिमाचल में एवोकैडो की खेती के महत्व, संभावनाओं, उत्पादन तकनीक, बाग प्रबंधन और नर्सरी उगाने की तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की उपयुक्तता को प्रभावित करने वाले सूक्ष्म जलवायु, मृदा और भौगोलिक कारकों के प्रभाव,विभिन्न रोगों, कीटों और उनके प्रबंधन के साथ एवोकैडो फल से सूप, ऐपेटाइजर, स्मूदी आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला के अंत में किसानों को कैंची, ग्राफ्टिंग चाकू और एवोकैडो के पौधे वितरित किए गए।
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कार्यशाला के समापन पर विश्वविद्यालय के डीन डॉ. डीपी शर्मा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित हुए। उन्होंने कहा एवोकैडो जैसी उच्च मूल्य वाली कम लागत वाली फसलें न केवल फल उत्पादन के लिए अपनाने के लिए, बल्कि नर्सरी उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के क्षेत्र में उद्यमी बनने के लिए भी योगदान देती हैं।
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कार्यशाला में फल विज्ञान विभाग के प्रो. और विभागाध्यक्ष डॉ. शशि के. शर्मा विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रदेश में एवोकैडो के पोषण संबंधी महत्व और व्यावसायीकरण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। परियोजना के कार्यक्रम प्रभारी डॉ. विकास के.शर्मा ने हिमाचल में एवोकैडो की खेती के महत्व, संभावनाओं, उत्पादन तकनीक, बाग प्रबंधन और नर्सरी उगाने की तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की उपयुक्तता को प्रभावित करने वाले सूक्ष्म जलवायु, मृदा और भौगोलिक कारकों के प्रभाव,विभिन्न रोगों, कीटों और उनके प्रबंधन के साथ एवोकैडो फल से सूप, ऐपेटाइजर, स्मूदी आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला के अंत में किसानों को कैंची, ग्राफ्टिंग चाकू और एवोकैडो के पौधे वितरित किए गए।