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Hamirpur (Himachal) News: जिले में पांच फीसदी मक्की की फसल रोगग्रस्त
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फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप से बढ़ी किसानों की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में बढ़ रहे फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप ने मक्की उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में मक्की की फसल को फॉल आर्मी वर्म से होने वाला नुकसान दो फीसदी से बढ़कर करीब पांच फीसदी तक पहुंच गया है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है लेकिन अभी तक कीट पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।
जिले में करीब 28 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की खेती की जाती है। ऐसे में कीट का बढ़ता प्रकोप किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विभाग का कहना है कि कई किसान कीटनाशकों का छिड़काव वैज्ञानिक तरीके से नहीं कर रहे हैं। यदि समय पर और सही विधि से छिड़काव नहीं किया गया तो फसल को होने वाला नुकसान और बढ़ सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार फॉल आर्मी वर्म की मादा (फीमेल) पतंगा एक बार में 200 या उससे अधिक अंडे दे सकती है। यह अंडे मक्की की पत्तियों के निचले हिस्से या बीच में गुच्छों के रूप में देती है, जहां सामान्य छिड़काव आसानी से नहीं पहुंच पाता। किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण कर अंडों और छोटी सुंडियों को लक्ष्य बनाकर छिड़काव करना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि अनुकूल मौसम में अंडे दो से तीन दिन में फूटकर सुंडी (लार्वा) में बदल जाते हैं। यही अवस्था फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण करना सबसे प्रभावी रहता है। कृषि विभाग ने किसानों को आवश्यकता अनुसार अनुशंसित कीटनाशकों के साथ-साथ प्राकृतिक उपाय के रूप में अग्नि अस्त्र के प्रयोग की भी सलाह दी है। विभागीय अधिकारी लगातार फील्ड का निरीक्षण कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
मक्की की फसल को फॉल आर्मी वर्म से दो फीसदी से नुकसान बढ़कर पांच फीसदी हो गया है। किसानों काे अंडों को लक्ष्य बनाते हुए छिड़काव करना चाहिए। ऊपरी छिड़काव सफल नहीं होता है। किसान कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सलाह ले सकते हैं। -डीडी शर्मा, उपनिदेशक कृषि विभाग हमीरपुर
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिले में बढ़ रहे फॉल आर्मी वर्म के प्रकोप ने मक्की उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिले में मक्की की फसल को फॉल आर्मी वर्म से होने वाला नुकसान दो फीसदी से बढ़कर करीब पांच फीसदी तक पहुंच गया है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है लेकिन अभी तक कीट पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।
जिले में करीब 28 हजार हेक्टेयर भूमि पर मक्की की खेती की जाती है। ऐसे में कीट का बढ़ता प्रकोप किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विभाग का कहना है कि कई किसान कीटनाशकों का छिड़काव वैज्ञानिक तरीके से नहीं कर रहे हैं। यदि समय पर और सही विधि से छिड़काव नहीं किया गया तो फसल को होने वाला नुकसान और बढ़ सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार फॉल आर्मी वर्म की मादा (फीमेल) पतंगा एक बार में 200 या उससे अधिक अंडे दे सकती है। यह अंडे मक्की की पत्तियों के निचले हिस्से या बीच में गुच्छों के रूप में देती है, जहां सामान्य छिड़काव आसानी से नहीं पहुंच पाता। किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण कर अंडों और छोटी सुंडियों को लक्ष्य बनाकर छिड़काव करना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि अनुकूल मौसम में अंडे दो से तीन दिन में फूटकर सुंडी (लार्वा) में बदल जाते हैं। यही अवस्था फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रण करना सबसे प्रभावी रहता है। कृषि विभाग ने किसानों को आवश्यकता अनुसार अनुशंसित कीटनाशकों के साथ-साथ प्राकृतिक उपाय के रूप में अग्नि अस्त्र के प्रयोग की भी सलाह दी है। विभागीय अधिकारी लगातार फील्ड का निरीक्षण कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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मक्की की फसल को फॉल आर्मी वर्म से दो फीसदी से नुकसान बढ़कर पांच फीसदी हो गया है। किसानों काे अंडों को लक्ष्य बनाते हुए छिड़काव करना चाहिए। ऊपरी छिड़काव सफल नहीं होता है। किसान कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सलाह ले सकते हैं। -डीडी शर्मा, उपनिदेशक कृषि विभाग हमीरपुर
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