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Hamirpur (Himachal) News: जमली खड्ड के पानी में मिला पीलिया फैलाने वाला फीकल कॉलीफार्म
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:39 AM IST
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हमीरपुर। बड़ू क्षेत्र में पीलिया फैलने के बाद अब जांच रिपोर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जमली और हथली खड्ड से लिए गए चार पानी के सैंपल में से एक सैंपल ई-श्रेणी में फेल पाया गया है।
यह सैंपल बड़ू मोहिं के पास निर्माणाधीन पुल के नजदीक पेयजल योजना से करीब 20 मीटर दूरी पर लिया गया था। जांच में इस पानी में फीकल कॉलीफार्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जो आमतौर पर मानव मल के संपर्क से पनपता है और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है।
इसके अलावा बाकी तीन सैंपल को सी श्रेणी में पाया गया है। इस श्रेणी के पानी को पारंपरिक तरीके से ट्रीटमेंट और क्लोरीनेशन के बाद ही पीने योग्य बनाया जा सकता है। बिना उपचार के इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। बड़ू मोहिं पेयजल योजना के अपरस्ट्रीम में दो जगह से यह सैंपल लिए गए थे।
योजना से ठीक ऊपर और जमली धाम के समीप लिए गए यह दोनों सैंपल ‘सी’ श्रेणी में पाए गए हैं। हथली पेयजल योजना के पास खड्ड से लिया गया सैंपल भी इसी श्रेणी का है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस श्रेणी में पानी को ट्रीट और क्लोरीनेशन के बाद पीने पर बीमारी का खतरा नहीं रहता है, लेकिन पुल के समीप लिए गए सैंपल की रिपोर्ट ने पेजयल योजना के समीप साफ-सफाई के दावों की पोल खोल दी है।
जल शक्ति विभाग पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की जांच में 19 और 27 फरवरी को बड़ू मोहिं योजना के दो सैंपल फेल पाए गए थे। बताया जा रहा है कि पीलिया फैलने के दो सप्ताह बाद फिल्टर बैड की सफाई की गई। उस दौरान फिल्टर बैड में शैवाल काला पड़ चुका था। 13 मार्च के बाद लिए गए सैंपलों में पानी की गुणवत्ता संतोषजनक बताई गई, लेकिन उससे पहले आपूर्ति किए गए पानी को लेकर सवाल उठते रहे। एक सप्ताह पूर्व जल शक्ति विभाग ने पानी को शुद्ध बताते हुए खुद को क्लीनचिट दी थी, जबकि पीलिया के कारणों को लेकर अनभिज्ञता जताई थी। अब पेयजल योजना के समीप ही ई श्रेणी का सैंपल फेल होने से विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में पानी में सीवरेज के अंश मिलने की पुष्टि हुई है। इससे सीवरेज लीकेज या औद्योगिक अपशिष्ट के खड्ड में मिलने की आशंका गहरा गई है।
ड्रेनेज सिस्टम और रेस्टोरेंट के ईटीपी की होगी जांच
रिपोर्ट आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम औद्योगिक क्षेत्र के ड्रेनेज सिस्टम की दोबारा जांच करेगी। खड्ड के किनारे स्थित रेस्टोरेंट के इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की भी जांच होगी। पूर्व जांच में ईटीपी में लीकेज मिली थी और रेस्टोरेंट संचालक को नोटिस जारी किया गया था। संचालक ने ईटीपी दुरुस्त करने का दावा किया था, लेकिन अब दूषित पानी की पुष्टि के बाद दोबारा जांच की जाएगी।
पीलिया का नया मामला नहीं आया
हमीरपुर। स्वास्थ्य खंड टौणी देवी के तहत बुधवार को पीलिया का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। अब तक कुल 58 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें 49 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, सात का घर पर इलाज चल रहा है और दो विद्यार्थी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। बड़ू क्षेत्र से नल के पानी का नया सैंपल भी लिया गया है। पूर्व में लिए सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। संवाद
कोट
बड़ू मोहिं पेयजल योजना से पानी फिल्टर बैड के जरिये ट्रीट करने के बाद ही सप्लाई किया जा रहा है। फिल्टर बैड की समय-समय पर सफाई करने के साथ क्लोरीनेशन भी की जाती है। -राकेश गर्ग, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग मंडल, हमीरपुर
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यह सैंपल बड़ू मोहिं के पास निर्माणाधीन पुल के नजदीक पेयजल योजना से करीब 20 मीटर दूरी पर लिया गया था। जांच में इस पानी में फीकल कॉलीफार्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, जो आमतौर पर मानव मल के संपर्क से पनपता है और पीलिया जैसी जलजनित बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है।
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इसके अलावा बाकी तीन सैंपल को सी श्रेणी में पाया गया है। इस श्रेणी के पानी को पारंपरिक तरीके से ट्रीटमेंट और क्लोरीनेशन के बाद ही पीने योग्य बनाया जा सकता है। बिना उपचार के इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। बड़ू मोहिं पेयजल योजना के अपरस्ट्रीम में दो जगह से यह सैंपल लिए गए थे।
योजना से ठीक ऊपर और जमली धाम के समीप लिए गए यह दोनों सैंपल ‘सी’ श्रेणी में पाए गए हैं। हथली पेयजल योजना के पास खड्ड से लिया गया सैंपल भी इसी श्रेणी का है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस श्रेणी में पानी को ट्रीट और क्लोरीनेशन के बाद पीने पर बीमारी का खतरा नहीं रहता है, लेकिन पुल के समीप लिए गए सैंपल की रिपोर्ट ने पेजयल योजना के समीप साफ-सफाई के दावों की पोल खोल दी है।
जल शक्ति विभाग पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की जांच में 19 और 27 फरवरी को बड़ू मोहिं योजना के दो सैंपल फेल पाए गए थे। बताया जा रहा है कि पीलिया फैलने के दो सप्ताह बाद फिल्टर बैड की सफाई की गई। उस दौरान फिल्टर बैड में शैवाल काला पड़ चुका था। 13 मार्च के बाद लिए गए सैंपलों में पानी की गुणवत्ता संतोषजनक बताई गई, लेकिन उससे पहले आपूर्ति किए गए पानी को लेकर सवाल उठते रहे। एक सप्ताह पूर्व जल शक्ति विभाग ने पानी को शुद्ध बताते हुए खुद को क्लीनचिट दी थी, जबकि पीलिया के कारणों को लेकर अनभिज्ञता जताई थी। अब पेयजल योजना के समीप ही ई श्रेणी का सैंपल फेल होने से विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में पानी में सीवरेज के अंश मिलने की पुष्टि हुई है। इससे सीवरेज लीकेज या औद्योगिक अपशिष्ट के खड्ड में मिलने की आशंका गहरा गई है।
ड्रेनेज सिस्टम और रेस्टोरेंट के ईटीपी की होगी जांच
रिपोर्ट आने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम औद्योगिक क्षेत्र के ड्रेनेज सिस्टम की दोबारा जांच करेगी। खड्ड के किनारे स्थित रेस्टोरेंट के इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की भी जांच होगी। पूर्व जांच में ईटीपी में लीकेज मिली थी और रेस्टोरेंट संचालक को नोटिस जारी किया गया था। संचालक ने ईटीपी दुरुस्त करने का दावा किया था, लेकिन अब दूषित पानी की पुष्टि के बाद दोबारा जांच की जाएगी।
पीलिया का नया मामला नहीं आया
हमीरपुर। स्वास्थ्य खंड टौणी देवी के तहत बुधवार को पीलिया का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। अब तक कुल 58 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें 49 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, सात का घर पर इलाज चल रहा है और दो विद्यार्थी अस्पताल में उपचाराधीन हैं। बड़ू क्षेत्र से नल के पानी का नया सैंपल भी लिया गया है। पूर्व में लिए सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। संवाद
कोट
बड़ू मोहिं पेयजल योजना से पानी फिल्टर बैड के जरिये ट्रीट करने के बाद ही सप्लाई किया जा रहा है। फिल्टर बैड की समय-समय पर सफाई करने के साथ क्लोरीनेशन भी की जाती है। -राकेश गर्ग, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग मंडल, हमीरपुर