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Hamirpur (Himachal) News: हाउस टेस्ट में कम नंबर की बात पिता से छिपाई, तनाव का नहीं होने दिया अंदेशा
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 25 Jun 2026 12:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। पटलांदर में 16 वर्षीय छात्र की कथित आत्महत्या ने न केवल एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी, बल्कि अभिभावकों की चिंताओं को भी गहरा कर दिया है। हाउस टेस्ट में कम अंक आने की बात किशोर ने परिवार से जरूर छिपाई थी, लेकिन उसने अभिभावकों को ये अंदेशा तक नहीं होने दिया कि वह किसी तनाव या मानसिक दबाव से गुजर रहा है।
यही वजह है कि सुसाइड नोट में लिखी बातें बच्चे के बर्ताव और दैनिक व्यवहार से मेल नहीं खा रही हैं। परिजनों को बच्चे के इस खौफनाक कदम पर अब भी यकीन नहीं हो रहा। सोमवार रात तक सब कुछ सामान्य था। परिवार के साथ हंसी-खुशी खाना खाने के बाद किशोर पढ़ाई करने बैठ गया।
उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं था। न उसने स्कूल या शिक्षकों को लेकर कभी कोई शिकायत की और न ही पढ़ाई के दबाव का जिक्र किया। किशोर के पिता बंटी को यह बात सता रही है कि बेटे से दोस्त जैसा रिश्ता होने पर भी आखिर उसके मन की बात उन्हें कैसे पता नहीं चली।
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जिस बेटे ने कथित आत्महत्या से महज कुछ घंटे पहले क्रिकेट का बल्ला मांगा, वह ऐसा कदम कैसे उठा सकता है। बंटी बताते हैं कि बेटे ने सोमवार को स्कूल से आने के बाद कहा था कि उसका बल्ला टूट गया है। इस पर उन्होंने नई क्रिकेट किट दिलाने की बात कही, लेकिन बेटे ने मुस्कराते हुए जवाब दिया कि पापा, किट जमा दो कक्षा पास करने के बाद लूंगा, अभी सिर्फ बल्ला ले आना।
बंटी कहते हैं कि वह बेटे के लिए सिर्फ पिता नहीं, बल्कि दोस्त भी थे। उन्होंने बताया कि स्कूल से घर लौटने में उस दिन बेटे को देरी हुई थी। पूछने पर उसने स्पोर्ट्स टेस्ट का बहाना बनाया। बाद में जब हाउस टेस्ट में कम अंक होने पर दोबारा से टेस्ट लिए जाने की बात चली तो वह हंसते हुए बोला कि पापा आपको कैसे पता चल गया और बात वहीं खत्म हो गई।
रात करीब 11 बजे जब पिता ने उसे सोने के लिए कहा तो उसने जवाब दिया कि मंगलवार को भी टेस्ट है और उसे पढ़ाई करनी है। इसके बाद माता-पिता सो गए। रात करीब एक बजे मां की आंख खुली तो कमरे के उस हिस्से की लाइट जल रही थी जिस ओर बेटा सोया था। मां की नजर जब पंखे की ओर पड़ी तो बेटे को फंदे से लटका पाया।
हमीरपुर। पटलांदर में 16 वर्षीय छात्र की कथित आत्महत्या ने न केवल एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी, बल्कि अभिभावकों की चिंताओं को भी गहरा कर दिया है। हाउस टेस्ट में कम अंक आने की बात किशोर ने परिवार से जरूर छिपाई थी, लेकिन उसने अभिभावकों को ये अंदेशा तक नहीं होने दिया कि वह किसी तनाव या मानसिक दबाव से गुजर रहा है।
यही वजह है कि सुसाइड नोट में लिखी बातें बच्चे के बर्ताव और दैनिक व्यवहार से मेल नहीं खा रही हैं। परिजनों को बच्चे के इस खौफनाक कदम पर अब भी यकीन नहीं हो रहा। सोमवार रात तक सब कुछ सामान्य था। परिवार के साथ हंसी-खुशी खाना खाने के बाद किशोर पढ़ाई करने बैठ गया।
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उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं था। न उसने स्कूल या शिक्षकों को लेकर कभी कोई शिकायत की और न ही पढ़ाई के दबाव का जिक्र किया। किशोर के पिता बंटी को यह बात सता रही है कि बेटे से दोस्त जैसा रिश्ता होने पर भी आखिर उसके मन की बात उन्हें कैसे पता नहीं चली।
जिस बेटे ने कथित आत्महत्या से महज कुछ घंटे पहले क्रिकेट का बल्ला मांगा, वह ऐसा कदम कैसे उठा सकता है। बंटी बताते हैं कि बेटे ने सोमवार को स्कूल से आने के बाद कहा था कि उसका बल्ला टूट गया है। इस पर उन्होंने नई क्रिकेट किट दिलाने की बात कही, लेकिन बेटे ने मुस्कराते हुए जवाब दिया कि पापा, किट जमा दो कक्षा पास करने के बाद लूंगा, अभी सिर्फ बल्ला ले आना।
बंटी कहते हैं कि वह बेटे के लिए सिर्फ पिता नहीं, बल्कि दोस्त भी थे। उन्होंने बताया कि स्कूल से घर लौटने में उस दिन बेटे को देरी हुई थी। पूछने पर उसने स्पोर्ट्स टेस्ट का बहाना बनाया। बाद में जब हाउस टेस्ट में कम अंक होने पर दोबारा से टेस्ट लिए जाने की बात चली तो वह हंसते हुए बोला कि पापा आपको कैसे पता चल गया और बात वहीं खत्म हो गई।
रात करीब 11 बजे जब पिता ने उसे सोने के लिए कहा तो उसने जवाब दिया कि मंगलवार को भी टेस्ट है और उसे पढ़ाई करनी है। इसके बाद माता-पिता सो गए। रात करीब एक बजे मां की आंख खुली तो कमरे के उस हिस्से की लाइट जल रही थी जिस ओर बेटा सोया था। मां की नजर जब पंखे की ओर पड़ी तो बेटे को फंदे से लटका पाया।