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Hamirpur (Himachal) News: निशा ने सुई-धागे से 500 जीवन में लाई नई सुबह
Sat, 11 Jul 2026 11:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 11 Jul 2026 11:49 AM IST
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हमीरपुर। हुनर और मेहनत से ग्राम पंचायत बस्सी की निशा ने कई परिवारों के जीवन में नई सुबह का उजाला भर दिया है। ग्राम पंचायत बस्सी की रहने वाली निशा सुई-धागे के हुनर से न केवल खुद आत्मनिर्भर बनीं बल्कि 500 से अधिक युवतियों और महिलाओं को रोजगार की राह दिखाकर उनके जीवन में बदलाव की कहानी लिख रही हैं।
निशा ने वर्ष 2003 से अब तक सिलाई-कढ़ाई और ऊन की बुनाई का प्रशिक्षण देना शुरू किया था। आज निशा से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कई युवतियां घर से सिलाई का काम कर रही हैं। वहीं, कुछ युवतियों ने बुटीक और सिलाई केंद्र भी शुरू कर दिए हैं।
इससे वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ा रही हैं। निशा बताती हैं कि उन्होंने अपने हुनर को केवल आमदनी का साधन नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाया है। आर्थिक रूप से गरीब परिवारों की लड़कियों को वह कम खर्च में प्रशिक्षण देने का प्रयास करती हैं ताकि उनके परिवार पर बोझ न पड़े।
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घर से संचालित इस लघु कारोबार से निशा हर माह 10 हजार रुपये से अधिक आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि हर लड़की के पास कोई न कोई हुनर अवश्य होना चाहिए, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी वह आत्मनिर्भर रह सके। इसी उद्देश्य से वह घर के अलावा दूरदराज के क्षेत्रों में भी जाकर लड़कियों और महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। निशा के पति डिपो में कार्यरत हैं और उनके दो बच्चे हैं।
इसका दिया जा रहा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान युवतियों को कपड़ों की कटिंग, सिलाई, कढ़ाई, फॉल-पिको, सूट, ब्लाउज और बच्चों के परिधानों की सिलाई के साथ ऊन से स्वेटर, टोपी और अन्य गर्म वस्त्र तैयार करना भी सिखाया जाता है। इसके अलावा प्रशिक्षुओं को ग्राहकों से व्यवहार, ऑर्डर के अनुसार कार्य करने और घरेलू स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने संबंधी व्यावहारिक जानकारी भी दी जाती है, जिससे वे प्रशिक्षण के बाद तुरंत काम शुरू कर सकें।
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निशा ने वर्ष 2003 से अब तक सिलाई-कढ़ाई और ऊन की बुनाई का प्रशिक्षण देना शुरू किया था। आज निशा से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली कई युवतियां घर से सिलाई का काम कर रही हैं। वहीं, कुछ युवतियों ने बुटीक और सिलाई केंद्र भी शुरू कर दिए हैं।
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इससे वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ा रही हैं। निशा बताती हैं कि उन्होंने अपने हुनर को केवल आमदनी का साधन नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाया है। आर्थिक रूप से गरीब परिवारों की लड़कियों को वह कम खर्च में प्रशिक्षण देने का प्रयास करती हैं ताकि उनके परिवार पर बोझ न पड़े।
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घर से संचालित इस लघु कारोबार से निशा हर माह 10 हजार रुपये से अधिक आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि हर लड़की के पास कोई न कोई हुनर अवश्य होना चाहिए, ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी वह आत्मनिर्भर रह सके। इसी उद्देश्य से वह घर के अलावा दूरदराज के क्षेत्रों में भी जाकर लड़कियों और महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। निशा के पति डिपो में कार्यरत हैं और उनके दो बच्चे हैं।
इसका दिया जा रहा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान युवतियों को कपड़ों की कटिंग, सिलाई, कढ़ाई, फॉल-पिको, सूट, ब्लाउज और बच्चों के परिधानों की सिलाई के साथ ऊन से स्वेटर, टोपी और अन्य गर्म वस्त्र तैयार करना भी सिखाया जाता है। इसके अलावा प्रशिक्षुओं को ग्राहकों से व्यवहार, ऑर्डर के अनुसार कार्य करने और घरेलू स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने संबंधी व्यावहारिक जानकारी भी दी जाती है, जिससे वे प्रशिक्षण के बाद तुरंत काम शुरू कर सकें।