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एनआईटी हमीरपुर के छात्रों का कमाल: अंगुलियों की हरकत बोलेगी, मूकबधिरों की आवाज बनेगा स्मार्ट ग्लव; जानें

कमलेश रतन भारद्वाज, हमीरपुर। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 16 Apr 2026 10:54 AM IST
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सार

एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थियों ने एआई आधारित साइन टू स्पीच स्मार्ट ग्लव तैयार किया है, जो साइन लैंग्वेज को समझ सीधे स्पीकर के माध्यम से आवाज में बदल देगा। जानें विस्तार से...

NIT Hamirpur Students Finger Movements Will SpeakA Smart Glove Becomes the Voice of the Deaf and Mute
साइन टू स्पीच स्मार्ट गलव रो दिखाते एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

अब मूकबधिर लोगों की खामोशी को तकनीक आवाज देगी। हाथों के इशारों को समझना अब आम लोगों के लिए मुश्किल नहीं रहेगा। एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थियों ने एआई आधारित साइन टू स्पीच स्मार्ट ग्लव तैयार किया है, जो साइन लैंग्वेज को समझ सीधे स्पीकर के माध्यम से आवाज में बदल देगा। यह ग्लव न केवल किफायती है, बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार उपयोगी भी है।

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महज तीन हजार की लागत से तैयार यह ग्लव विदेशों में मिलने वाले 50-60 हजार के महंगे उपकरणों का विकल्प है। ग्लव में लगे आधुनिक सेंसर और एआई सिस्टम मिलकर मूकबधिर व्यक्ति के इशारों को आवाज में बदलते हैं। फ्लैक्स सेंसर उंगलियों की मोड़ व हरकत को कैप्चर करेंगे और जाइरोस्कोप सेंसर कलाई की मूवमेंट को ट्रैक करते है। 
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इलेक्ट्रिकल एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों शुभम, पीयूष, साक्षी, श्रन्या, नमन, दिवांशी, अनवर, हर्षित और ऋषभ ने संस्थान के टेक फेस्ट निबंस में इस प्रोटोटाइप को प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों का दावा है कि भारत में इस तरह का किफायती और मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट वाला उत्पाद अभी उपलब्ध नहीं है। एनआईटी हमीरपुर की रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना नानोटी ने बताया कि संस्थान में नवाचार को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

अंग्रेजी तक सीमित नहीं, अब बोलेगा स्थानीय भाषा में  
इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ अंग्रेजी तक सीमित नहीं है। हिंदी और पहाड़ी जैसी स्थानीय भाषाओं में आउटपुट देने की क्षमता क्षेत्र के अनुसार भाषा डेटा को कस्टमाइज करने का विकल्प विदेशों में उपलब्ध ऐसे अधिकांश ग्लव केवल अंग्रेजी भाषा में ही आउटपुट देते हैं, जबकि यह भारतीय भाषाओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

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