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Hamirpur: एआई से अब उंगलियों की हरकत बोलेगी, मूकबधिरों की आवाज बनेगा स्मार्ट ग्लव
Ankesh Dogra
Updated Thu, 16 Apr 2026 12:52 PM IST
अब मूकबधिर लोगों की खामोशी को तकनीक आवाज देगी। हाथों के इशारों को समझना अब आम लोगों के लिए मुश्किल नहीं रहेगा। एनआईटी हमीरपुर के विद्यार्थियों ने एआई आधारित ‘साइन टू स्पीच’ स्मार्ट ग्लव तैयार किया है, जो साइन लैंग्वेज को समझकर सीधे स्पीकर के माध्यम से आवाज में बदल देगा। यह ग्लव न केवल किफायती है बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार बेहद उपयोगी भी है। महज तीन हजार रुपये की लागत से तैयार यह प्रोटोटाइप विदेशों में मिलने वाले 50-60 हजार रुपये के महंगे उपकरणों का विकल्प है। ग्लव में लगे आधुनिक सेंसर और एआई सिस्टम मिलकर मूकबधिर व्यक्ति के इशारों को आवाज में बदलते हैं। इसमें लगे फ्लैक्स सेंसर उंगलियों की मोड़ और हरकत को कैप्चर करेंगे और जाइरोस्कोप सेंसर कलाई की मूवमेंट को ट्रैक करते है। माइक्रो कंट्रोलर सेंसर से डेटा लेकर वाई-फाई के जरिए आगे भेजेगा। इस डेटा को रेशवैरी (माइक्रोप्रोसेसर) प्रोसेस करेगा। इस प्रोसेसर में लार्ज लैग्वेंज मॉडल (एलएलएम) साइन लैंग्वेज के पैटर्न को पहचानता है। इसके साथ एआई एजेंट्स जुड़े है, जो इन साइन को समझकर उन्हें अंग्रेजी से क्षेत्रीय भाषाओं (जैसे हिंदी और पहाड़ी) में परिवर्तित करने में सक्षम होंगे। इसके बाद ग्लव में लगे स्पीकर के जरिए वही संदेश स्पष्ट आवाज में सुनाई देता है। ग्लव में लगे माइक्रोकंट्रोलर से माइक्रोप्रोसेसर तक डेटा ट्रांसमिशन वाई-फाई के माध्यम से होता है और एलएलएम मॉडल ऑफलाइन भी काम करने में सक्षम है। यह तकनीक मूकबधिर लोगों के लिए संचार की बड़ी बाधा को खत्म कर सकती है। इस तकनीक से मूकबधिरों का आम लोगों से सीधा संवाद संभव, शिक्षा और रोजगार में बेहतर अवसर खुलेंगे। आपात स्थिति में त्वरित संचार हो सकेगा। अगर यह प्रोटोटाइप बड़े स्तर पर विकसित होता है, तो यह लाखों लोगों की जिंदगी आसान बना सकता है। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ अंग्रेजी तक सीमित नहीं है। हिंदी और पहाड़ी जैसी स्थानीय भाषाओं में आउटपुट देने की क्षमता क्षेत्र के अनुसार भाषा डेटा को कस्टमाइज करने का विकल्प विदेशों में उपलब्ध ऐसे अधिकांश ग्लव केवल अंग्रेजी भाषा में ही आउटपुट देते हैं, जबकि यह भारतीय भाषाओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इलैक्ट्रिकल एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के विद्यार्थियों शुभम, पीयूष, साक्षी, श्रन्या, नमन, दिवांशी, अनवर, हर्षित और ऋषभ ने संस्थान के टेक फेस्ट निबंस में इस प्रोटोटाइप को प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों का दावा है कि भारत में इस तरह का किफायती और मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट वाला उत्पाद अभी उपलब्ध नहीं है।
संस्थान में नवाचार को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। समाज के हर वर्ग के उपयोगी शोध कार्यों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
डॉक्टर अर्चना नानोटी, रजिस्ट्रार, एनआईटी हमीरपुर
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