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Hamirpur (Himachal) News: ई-केवाईसी और विभागीय बदलाव में फंसी सहारा पेंशन
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दिलदार निवासी टिक्कर
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बिझड़ी (हमीरपुर)। सहारा योजना के करीब एक हजार लाभार्थी एक वर्ष से आर्थिक सहायता से वंचित हैं। योजना के तहत मिलने वाली तीन हजार रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि लंबे समय से लाभार्थियों के खातों में नहीं पहुंच रही है। इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
लाभार्थियों का कहना है कि कभी विभाग की ओर से ई-केवाईसी का हवाला दिया जाता है तो कभी योजना को एक विभाग से दूसरे विभाग में स्थानांतरित किए जाने की बात कहकर मामला टाल दिया जाता है। जरूरतमंद लोगों को लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पहले सहारा योजना का संचालन स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से किया जाता था लेकिन बाद में इसे समाज कल्याण विभाग को सौंप दिया गया है। विभाग बदलने के बाद पोर्टल संबंधी तकनीकी दिक्कतें और ई-केवाईसी की प्रक्रिया लाभार्थियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। लोग कभी अपना ऑनलाइन स्टेटस जांचने के लिए लोकमित्र केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं तो कभी संबंधित विभागों के कार्यालयों में भटक रहे हैं। योजना का लाभ न मिलने से सबसे अधिक परेशानी लकवा, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को हो रही है। एक मामले में विधवा मां और लकवाग्रस्त बेटे का परिवार केवल मां को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सहारे चल रहा है। वह पेंशन भी हर महीने नहीं मिलती, बल्कि तीन-तीन महीने बाद खाते में जमा होती है। जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल ने बताया कि हमारे पास बहुत से लोग पहुंच रहे हैं जो खुद को सहारा पेंशन का लाभार्थी बता रहे हैं। हमारे पास केवल 499 लोगों की ही सूची आई है। इसमें 437 लाेगों की ई-केवाईसी करवा दी है। इन्हें उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा और उन्हें पेंशन दे दी जाएगी।
लंबे समय से सहारा पेंशन न मिलने के कारण दिक्कतें पेश आ रही हैं। सहारा पेंशन योजना एक सुविधा थी। लोगों को इससे काफी मदद मिलती थी। सरकार को चाहिए कि जल्द इसे सुचारु करवाया जाए। - सुनील कुमार निवासी भगेड़
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पेंशन के लिए बैंक और लोकमित्र केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दवाइयों की खरीद में इससे काफी सहायता मिलती थी। सहारा पेंशन न मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। - दिलदार सिंह निवासी टिक्कर
मैं चलने-फिरने में असमर्थ हूं। सहारा पेंशन मिलने से मैं खुद को आत्मनिर्भर समझती थी। पिछले काफी समय से पेंशन नहीं आई है। इससे दवाइयां आदि खरीदने में परेशानी होती है। - साक्षी निवासी बिझड़ी
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लाभार्थियों का कहना है कि कभी विभाग की ओर से ई-केवाईसी का हवाला दिया जाता है तो कभी योजना को एक विभाग से दूसरे विभाग में स्थानांतरित किए जाने की बात कहकर मामला टाल दिया जाता है। जरूरतमंद लोगों को लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पहले सहारा योजना का संचालन स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से किया जाता था लेकिन बाद में इसे समाज कल्याण विभाग को सौंप दिया गया है। विभाग बदलने के बाद पोर्टल संबंधी तकनीकी दिक्कतें और ई-केवाईसी की प्रक्रिया लाभार्थियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। लोग कभी अपना ऑनलाइन स्टेटस जांचने के लिए लोकमित्र केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं तो कभी संबंधित विभागों के कार्यालयों में भटक रहे हैं। योजना का लाभ न मिलने से सबसे अधिक परेशानी लकवा, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को हो रही है। एक मामले में विधवा मां और लकवाग्रस्त बेटे का परिवार केवल मां को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सहारे चल रहा है। वह पेंशन भी हर महीने नहीं मिलती, बल्कि तीन-तीन महीने बाद खाते में जमा होती है। जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल ने बताया कि हमारे पास बहुत से लोग पहुंच रहे हैं जो खुद को सहारा पेंशन का लाभार्थी बता रहे हैं। हमारे पास केवल 499 लोगों की ही सूची आई है। इसमें 437 लाेगों की ई-केवाईसी करवा दी है। इन्हें उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा और उन्हें पेंशन दे दी जाएगी।
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लंबे समय से सहारा पेंशन न मिलने के कारण दिक्कतें पेश आ रही हैं। सहारा पेंशन योजना एक सुविधा थी। लोगों को इससे काफी मदद मिलती थी। सरकार को चाहिए कि जल्द इसे सुचारु करवाया जाए। - सुनील कुमार निवासी भगेड़
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पेंशन के लिए बैंक और लोकमित्र केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दवाइयों की खरीद में इससे काफी सहायता मिलती थी। सहारा पेंशन न मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। - दिलदार सिंह निवासी टिक्कर
मैं चलने-फिरने में असमर्थ हूं। सहारा पेंशन मिलने से मैं खुद को आत्मनिर्भर समझती थी। पिछले काफी समय से पेंशन नहीं आई है। इससे दवाइयां आदि खरीदने में परेशानी होती है। - साक्षी निवासी बिझड़ी

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