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Hamirpur (Himachal) News: प्राथमिक स्कूलों में नौनिहालों की पढ़ाई का होगा मूल्यांकन
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:37 AM IST
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हमीरपुर। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में जिलेभर के प्राथमिक स्कूलों में नौनिहालों की पढ़ाई का मूल्यांकन होगा। विभाग ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और नौनिहालों के समग्र विकास को लेकर योजना तैयार कर ली है।
योजना के तहत स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के मूल्यांकन के साथ-साथ शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके का भी सर्वे होगा। सर्वे में बाल वाटिका दो और तीन के विद्यार्थियों से सवाल-जवाब और नए दाखिले में आने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई से लेकर तैयार किए प्लान को भी अंक दिए जाएंगे, ताकि स्कूल स्तर पर नौनिहालों का सर्वांगीण विकास हो सके।
अभियान अप्रैल के दूसरे सप्ताह में चलाया जाएगा, जिसमें तीन से पांच वर्ष तक के विद्यार्थियों की बुनियादी समझ, व्यावहारिक कौशल और मानसिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। स्कूलों में मूल्यांकन के लिए गतिविधि-आधारित पद्धति अपनाई जाएगी, जिसमें खेल-खेल में सीखने, चित्रकला, कहानी सुनाने, समूह गतिविधियों और संवाद के माध्यम से बच्चों की क्षमताओं को परखा जाएगा।
इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि भी बढ़ेगी और उन्हें नई चीजें सीखने की रुचि भी पैदा होगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल के वातावरण के अनुकूल बनाना और उन्हें प्रारंभिक शिक्षा के प्रति आकर्षित करना है। हर स्कूल में शिक्षक अपने स्तर पर विद्यार्थियों के विकास के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करेंगे। इसमें यह तय किया जाएगा कि किस बच्चे को किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है और उसे कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।
कोट
अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों का स्कूल स्तर पर सर्वांगीण विकास करना और उन्हें आगामी कक्षा के लिए तैयार करना है। -नवीन कुमार, डीपीओ एवं उपनिदेशक गुणवत्ता नियंत्रक
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योजना के तहत स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के मूल्यांकन के साथ-साथ शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके का भी सर्वे होगा। सर्वे में बाल वाटिका दो और तीन के विद्यार्थियों से सवाल-जवाब और नए दाखिले में आने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई से लेकर तैयार किए प्लान को भी अंक दिए जाएंगे, ताकि स्कूल स्तर पर नौनिहालों का सर्वांगीण विकास हो सके।
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अभियान अप्रैल के दूसरे सप्ताह में चलाया जाएगा, जिसमें तीन से पांच वर्ष तक के विद्यार्थियों की बुनियादी समझ, व्यावहारिक कौशल और मानसिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। स्कूलों में मूल्यांकन के लिए गतिविधि-आधारित पद्धति अपनाई जाएगी, जिसमें खेल-खेल में सीखने, चित्रकला, कहानी सुनाने, समूह गतिविधियों और संवाद के माध्यम से बच्चों की क्षमताओं को परखा जाएगा।
इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि भी बढ़ेगी और उन्हें नई चीजें सीखने की रुचि भी पैदा होगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल के वातावरण के अनुकूल बनाना और उन्हें प्रारंभिक शिक्षा के प्रति आकर्षित करना है। हर स्कूल में शिक्षक अपने स्तर पर विद्यार्थियों के विकास के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार करेंगे। इसमें यह तय किया जाएगा कि किस बच्चे को किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है और उसे कैसे बेहतर बनाया जा सकता है।
कोट
अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों का स्कूल स्तर पर सर्वांगीण विकास करना और उन्हें आगामी कक्षा के लिए तैयार करना है। -नवीन कुमार, डीपीओ एवं उपनिदेशक गुणवत्ता नियंत्रक