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Himachal Cannabis: भांग से बनेंगी पुलें, टी-शर्ट और थैले, उत्तराखंड और असम के बाद हिमाचल बनेगा हेम्प हब

Thu, 23 Jul 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 23 Jul 2026 05:00 AM IST
सार

प्रदेश की पहाड़ियों और घाटियों में वर्षों से जंगली पौधे के रूप में उगने वाली भांग अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का नया इंजन बनने जा रही है। 

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Himachal: bhang cannabis to be used for making traditional footwear, T-shirts, and bags; state set to become a
भांग के पाैधे। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों और घाटियों में वर्षों से जंगली पौधे के रूप में उगने वाली भांग अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का नया इंजन बनने जा रही है। जिस भांग का नाम अब तक नशे और अवैध कारोबार से जोड़ा जाता रहा, उसी से अब टी-शर्ट, थैले, रस्सियां, पुलें (चप्पलें), कागज, पैकेजिंग सामग्री और पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री तैयार होगी। उत्तराखंड और असम के बाद राज्य सरकार की ग्रीन टू गोल्ड पहल के तहत हिमाचल को देश का प्रमुख हेम्प (औद्योगिक भांग) हब बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने औषधीय उपयोग के बाद अब औद्योगिक क्षेत्र में भी नियंत्रित एवं लाइसेंस आधारित भांग की खेती का रास्ता खोल दिया है।

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सरकार का अनुमान, यह क्षेत्र  हजारों करोड़ का राजस्व देने वाला क्षेत्र
 इसके पीछे मकसद एक ऐसे उद्योग को विकसित करना है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा कर सके। सरकार का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व देने की क्षमता रखता है। प्रदेश के कुल्लू, मंडी, शिमला और चंबा जैसे क्षेत्रों में भांग प्राकृतिक रूप से बड़ी मात्रा में उगती है। अब तक यह संसाधन लगभग अनुपयोगी था, लेकिन नई नीति के तहत इसे आर्थिक संपदा में बदलने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी इसे वाइल्ड वीड से हिमालयन गोल्ड की दिशा में बड़ा कदम बताया है। भांग के रेशों से बने उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इसे भविष्य के उद्योग के रूप में विकसित करना चाहती है।

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खेती से फैक्टरी तक बनेगी पूरी वैल्यू चेन
भांग की खेती, प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना है। इससे प्रदेश में टेक्सटाइल, पैकेजिंग, बायोप्लास्टिक और कागज उद्योग को नई दिशा मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। भांग का रेशा कपास की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होता है। इससे बने कपड़े लंबे समय तक चलते हैं और पर्यावरण पर भी कम प्रभाव डालते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में हेम्प आधारित वस्त्र उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है।

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किसानों को मिलेगा नकदी फसल का नया विकल्प
बंदरों, जंगली सुअरों और अन्य वन्यजीवों से फसलों को होने वाले नुकसान के कारण बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में औद्योगिक भांग किसानों के लिए नकदी फसल का नया विकल्प बन सकती है। यह कम पानी में भी उगाई जा सकती है और अपेक्षाकृत खराब भूमि में भी बेहतर उत्पादन देती है।

नशे नहीं, उद्योग पर रहेगा फोकस
सरकार ने स्पष्ट किया है कि औद्योगिक भांग की खेती पूरी तरह नियंत्रित होगी। केवल वही किस्में उगाई जाएंगी, जिनमें टीएचसी की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम होगी। इस स्तर पर पौधे का नशीला उपयोग संभव नहीं होता। खेती, परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण सभी गतिविधियां लाइसेंस और निगरानी व्यवस्था के तहत संचालित होंगी।

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