Himachal News: सीबीआई कर सकती है बहुचर्चित चेस्टर हिल मामले की जांच, जुटा रही जानकारी
प्रदेश के बहुचर्चित चेस्टर हिल्स भूमि एवं हाउसिंग परियोजना मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जा सकती है।
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हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित चेस्टर हिल्स भूमि एवं हाउसिंग परियोजना मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जा सकती है। एजेंसी चेस्टर हिल्स भूमि एवं हाउसिंग परियोजना को लेकर जानकारी जुटा रही है। मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश हाईकोर्ट राज्य सरकार के अलावा केंद्र सरकार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और कार्मिक मंत्रालय सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चुका है। अदालत पहले ही सीबीआई और ईडी से भी इस मामले में जवाब तलब कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार मामले की प्रकृति और आरोपों के दायरे को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपे जाने की संभावना है। इसी क्रम में सीबीआई ने भी अपने स्तर पर मामले से संबंधित प्रारंभिक जानकारियां एकत्रित करनी शुरू कर दी हैं।
जांच एजेंसी को औपचारिक रूप से जिम्मा सौंपा पर ये हाेगा
यदि जांच एजेंसी को औपचारिक रूप से जिम्मा सौंपा जाता है, तो जांच का दायरा केवल हिमाचल प्रदेश भू-सुधार अधिनियम, 1972 की धारा-118 के कथित उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भूमि हस्तांतरण, वित्तीय लेनदेन और परियोजना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है। यह मामला सोलन जिले की चेस्टर हिल्स-2 और चेस्टर हिल्स-4 हाउसिंग परियोजनाओं से जुड़ा है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, एसडीएम सोलन की जांच रिपोर्ट में लगभग 275 बीघा भूमि और करीब 47 करोड़ रुपये की परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया गया था।
रेरा भी परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं पर लगा चुकी 70 लाख जुर्माना
रिपोर्ट में वित्तीय जांच के लिए प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका की भी सिफारिश की गई थी। उधर, हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) भी परियोजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में 70 लाख रुपये का जुर्माना लगा चुकी है। फिलहाल पूरा मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की निगरानी में लंबित है और अदालत के आगामी निर्देशों के बाद जांच की दिशा और एजेंसी को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
कुल्लू में संदिग्ध पुलिस नाकेबंदी और मारपीट मामले की जांच अब सीबीआई के हाथ
वहीं प्रदेश के कुल्लू जिले के सिउंड में संदिग्ध पुलिस नाकेबंदी, कथित मारपीट और फर्जी चरस बरामदगी से जुड़े मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के हाथों में पहुंच गई है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद सीबीआई ने इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीआई शिमला की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के उप अधीक्षक गोविंद सिंह सोलंकी को जांच सौंपी गई है। सीबीआई ने भुंतर पुलिस स्टेशन के मुख्य आरक्षी मनोज कुमार और मानद मुख्य आरक्षी गिरधारी लाल समेत अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5), 117 और 127 के तहत मामला दर्ज हुआ है। याचिकाकर्ता जामयांग त्सेरिंग ने 22 फरवरी 2026 की रात पुलिस पर सिउंड में अवैध रूप से सात घंटे रोकने का आरोप लगाया।
उनका कहना है कि पुलिस ने चार लाख रुपये हड़पने के लिए झूठा चरस बरामदगी का मामला बनाया। विरोध करने पर पुलिसकर्मियों ने याचिकाकर्ता को धक्का दिया, जिससे वह वाहन की चपेट में आकर गंभीर घायल हो गए। उच्च न्यायालय ने केस डायरी में दर्ज घटनाक्रम और घायल होने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए थे। अदालत ने निष्पक्ष जांच के लिए मामले को सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया। सीबीआई अब पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करेगी। इसमें पुलिस नाकेबंदी की वैधता और कथित अवैध हिरासत की जांच होगी। मारपीट, नकदी छीनने के आरोप और फर्जी बरामदगी के दावों की भी पड़ताल की जाएगी। दुर्घटना की वास्तविक परिस्थितियों सहित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।