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Himachal: 113 साल पुरानी विरासत पर बाढ़ का संकट, चाबा पावर हाउस शिफ्ट करने की तैयारी

Tue, 18 Aug 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh धर्मेंद्र पंडित, शिमला।
धर्मेंद्र पंडित, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 18 Aug 2026 06:00 AM IST
सार

सतलुज नदी में बार-बार जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति बनने से पावर हाउस की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन ने भी परियोजना को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की सलाह दी है। सरकार और बिजली बोर्ड के स्तर पर इसको शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। 

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Flood threat to 113year old heritage; preparations underway to shift Chaba Power House.
सतलुज के बढ़े जलस्तर में डूबा चाबा पावर हाउस। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

शिमला को रोशन करने के लिए अंग्रेजी शासन में वर्ष 1913 में बनाया गया ऐतिहासिक चाबा पावर हाउस दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। सतलुज नदी में बार-बार जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति बनने से पावर हाउस की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन ने भी परियोजना को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की सलाह दी है। सरकार और बिजली बोर्ड के स्तर पर इसको शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। बिजली बोर्ड ने एनटीपीसी और केंद्र सरकार से पावर हाउस को शिफ्ट करने का मामला उठाया है। कहा गया है कि कोल डैम के निर्माण से पानी का स्तर बढ़ा है। इससे पावर हाउस को बार बार नुकसान हो रहा है।

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सबसे पुराने चालू जलविद्युत संयंत्रों में शामिल
चाबा पावर हाउस हिमाचल के सबसे पुराने चालू जलविद्युत संयंत्रों में शामिल है। इसकी स्थापना 1913-14 में हुई थी और इसकी स्थापित क्षमता 1.75 मेगावाट है। इसमें 0.50-0.50 मेगावाट की दो और 0.25-0.25 मेगावाट की तीन इकाइयां हैं। यह परियोजना रन-ऑफ-द-रिवर श्रेणी की है। चाबा क्षेत्र में सतलुज की सहायक धारा नोटी खड्ड के पानी का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। सरकारी दस्तावेजों में चाबा परियोजना को सतलुज बेसिन में दर्ज किया गया है। बिजली बोर्ड के एमडी आदित्य नेगी ने कहा है कि चाबा पावर हाउस को शिफ्ट करने का यह मामला एनटीपीसी और केंद्र सरकार से उठाया गया है।

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अंग्रेजों के समय में शिमला ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी
अंग्रेजों के समय शिमला ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी था। शहर में बिजली की मांग बढ़ने के साथ 1913 में चाबा बिजलीघर स्थापित किया गया। हिमाचल सरकार के विकास दस्तावेज में भी उल्लेख है कि चाबा बिजली उत्पादन स्टेशन स्थापित कर शिमला शहर को बिजली उपलब्ध कराई गई थी। जब देश में बड़े बिजली संयंत्रों का दौर शुरू भी नहीं हुआ था, तब चाबा से शिमला की बिजली जरूरत पूरी करने की शुरुआत हो चुकी थी। आजादी से पहले प्रदेश में बिजली उत्पादन के शुरुआती केंद्रों में चाबा का महत्वपूर्ण स्थान रहा।

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कई बार बढ़ा की भेंट में चढ़ गया चाबा पावर हाउस
चाबा की स्थापित क्षमता 1.75 मेगावाट है। इसकी बिजली ग्रिड में जाती है और शिमला शहर के एक हिस्से तथा आसपास के क्षेत्रों में उपयोग होती है। चाबा पावर हाउस हाउस को सतलुज के बढ़ते जलस्तर से पहले भी नुकसान हो चुका है। वर्ष 2000 में आई भीषण बाढ़ में बिजलीघर को व्यापक क्षति हुई थी और उस समय उत्पादन बंद करना पड़ा था। बाद में इसे दोबारा चालू किया गया। 2019 में भी बाढ़ से बिजलीघर प्रभावित हुआ। वर्ष 2022 में सतलुज का पानी पावर हाउस में घुस गया था और टर्बाइन कई दिनों तक पानी में डूबी रहीं।

सरकारी संपत्ति को नुकसान न हो, ऐसे में प्रोजेक्ट और सरकारी संपत्ति को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के लिए समय-समय पर विभागों के साथ विचार-विमर्श किया जाता रहा है। तीन साल से सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। जानमाल का नुकसान न हो, इसके चलते उचित कदम उठाए जा रहे हैं।-दीपक राठौर, उपाध्यक्ष, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

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