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Shimla News: बीमा कंपनी को गाय की मौत पर क्लेम चुकाने के आदेश

Mon, 17 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2026 11:59 PM IST
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Order issued to insurance company to pay claim for cow's death.
शिकायतकर्ता को मिलेगी 25 हजार बीमा राशि
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मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का आदेश रखा बरकरार

संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा क्लेम से जुड़े मामले में ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के उस निर्देश को रद्द कर दिया है, जिसमें कंपनी को पशुपालन विभाग के पक्ष में 3,16,925 रुपये की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। इसके साथ आयोग ने शिकायतकर्ता पशुपालक को मिलने वाली बीमा राशि, ब्याज, मुआवजा और मुकदमे के खर्च से संबंधित आदेश को बरकरार रखा है।

पालमपुर निवासी संतोष कुमार कटोच ने अपनी क्रॉस ब्रीड दुधारू गाय का ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से 25 हजार रुपये में बीमा करवाया था। बीमा अवधि के दौरान 13 अगस्त 2022 को गाय की मृत्यु हो गई थी। पालमपुर उपमंडलीय पशु अस्पताल के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ने गाय का पोस्टमार्टम किया था जिसमें मौत का कारण अंतिम श्वासरोध पाया गया था। पशुपालक ने बीमा क्लेम के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर दस्तावेज जमा किए लेकिन बीमा कंपनी ने बिना किसी ठोस कारण के क्लेम का भुगतान नहीं किया। इसके बाद पशुपालक ने जिला उपभोक्ता आयोग धर्मशाला का दरवाजा खटखटाया।
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जिला आयोग ने शिकायत को सही ठहराते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया था कि वह पशुपालक को 25 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित, 10,000 रुपये मुआवजा और 7,500 रुपये मुकदमे का खर्च दें। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 39(1) (क) के तहत कंपनी को अन्य मामलों के आधार पर 3,16,925 रुपये पशुपालन विभाग को देने के निर्देश भी दिए थे। मामले की सुनवाई करते हुए राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंद्र सिंह मेहता और सदस्य योगिता दत्ता की खंडपीठ ने पाया कि बीमा कंपनी निर्धारित 45 दिन के भीतर जिला आयोग के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने में विफल रही थी। गाय की मौत बीमा अवधि के भीतर हुई थी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि हुई। ऐसे में बीमा राशि का भुगतान न करना सेवा में कमी को दर्शाता है। इसलिए पशुपालक को 25 हजार रुपये बीमा राशि, ब्याज और मुआवजा देने का निचली अदालत का फैसला सही है। आयोग ने पशुपालन विभाग को 3,16,925 रुपये देने के निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि मूल शिकायत में ऐसा कोई दावा या प्रार्थना नहीं की थी। अदालत या ट्रिब्यूनल ऐसी कोई राहत नहीं दे सकता जो शिकायत का विषय ही न हो।
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