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Shimla: लकड़ी की पेटी से ग्रेडिंग मशीन तक, सेब पैकिंग के बदलते दौर की साक्षी हैं 90 वर्षीय ग्यारी देवी

Tue, 18 Aug 2026 11:42 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, कोटखाई (शिमला)।
अमर उजाला ब्यूरो, कोटखाई (शिमला)। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 18 Aug 2026 11:42 AM IST
सार

लकड़ी की पेटियों में अखबार लपेटकर भेजे जाने वाले सेब से लेकर आज ग्रेडिंग मशीनों से हो रही पैकिंग तक के इस सफर की गवाह हैं कोटखाई के पुजाली गांव की 90 वर्षीय ग्यारी देवी। 

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From wooden crates to grading machines, 90-year-old Gyari Devi of Kotkhai has witnessed the changing era of ap
कोटखाई के पुजाली गांव की 90 वर्षीय ग्यारी देवी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल में सेब पैकिंग में पिछले कुछ दशकों से कई बदलाव हुए हैं। लकड़ी की पेटियों में अखबार लपेटकर भेजे जाने वाले सेब से लेकर आज ग्रेडिंग मशीनों से हो रही पैकिंग तक के इस सफर की गवाह हैं कोटखाई के पुजाली गांव की 90 वर्षीय ग्यारी देवी। सेब सीजन शुरू होते ही ग्यारी देवी आज भी ग्रेडिंग मशीन पर सेब की पैकिंग में हाथ बंटाती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह देखने लायक है। वह बताती हैं कि जब 1990 के दशक में सेब को एक-एक कर अखबार में लपेटा जाता था और लकड़ी की पेटियों में पैक किया जाता था, तब भी वह सीजन के दौरान इस काम में सहयोग करती थीं। समय बदला तो सेब पैकिंग का तरीका भी बदल गया। वर्ष 1995-96 के बाद लकड़ी की पेटियों की जगह कार्टन बॉक्स का चलन बढ़ा। इसके बाद ग्रेडिंग मशीनों और आधुनिक तकनीक ने पैकिंग को और आसान बना दिया। ग्यारी देवी ने इन सभी बदलावों को अपनी आंखों के सामने होते देखा है।

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