Sirmaur: सिरमौर में फिर लंपी रोग का खतरा, 517 पशुओं में मिले लक्षण, चार की मौत, विभाग अलर्ट
सिरमौर जिले के 517 पशुओं में लंपी जैसे लक्षण सामने आए हैं। इनमें 325 से अधिक पशु स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि चार पशुओं की मौत हुई है।
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चार साल बाद लंपी रोग ने एक बार फिर सिरमौर में चिंता बढ़ा दी है। जिले के 517 पशुओं में लंपी जैसे लक्षण सामने आए हैं। इनमें 325 से अधिक पशु स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि चार पशुओं की मौत हुई है। प्रभावित पशुओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है और संक्रमण की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इससे पशुपालकों की चिंता भी बढ़ गई है। सबसे अधिक चिंता हरियाणा और अन्य राज्यों की सीमा से सटे क्षेत्रों को लेकर है।
पांवटा साहिब, माजरा, धौलाकुआं और कालाअंब सहित अन्य क्षेत्रों में पशुओं में लंपी जैसे लक्षण सामने आए हैं। विभाग का प्रथम दृष्टया मानना है कि बाहरी राज्यों से पशुओं की आवाजाही के दौरान संक्रमण यहां पहुंचने की आशंका हो सकती है। सिरमौर में करीब सवा दो लाख गाय और भैंस हैं। इतनी बड़ी पशुधन आबादी को देखते हुए विभाग ने उन क्षेत्रों में भी पहले से टीकाकरण शुरू करने का निर्णय लिया है, जहां अभी बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं। जिले में 60 हजार वैक्सीन पहुंच चुकी हैं। विभाग का लक्ष्य संक्रमण को नए क्षेत्रों में फैलने से पहले ही रोकना है।
गोशालाओं को सैनिटाइज की तैयारी
बीमारी की आशंका को देखते हुए पशुपालन विभाग जिले में संचालित गोशालाओं को सैनिटाइज करने की तैयारी कर रहा है। पहले चरण में प्रभावित क्षेत्रों की गोशालाओं में अभियान चलाने की योजना है। विभाग के अनुसार गोशालाओं में बड़ी संख्या में पशु एक साथ रहते हैं, ऐसे में संक्रमण होने पर बीमारी तेजी से फैल सकती है। 1962 एंबुलेंस योजना से जुड़ी टीमों को भी गोशालाओं में जाकर पशुपालकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। पशुपालकों को बाहरी राज्यों से पशु खरीदने से बचने की सलाह दी गई है। यदि पशु खरीदना जरूरी हो तो उसे कुछ समय तक अन्य पशुओं से अलग रखने को कहा गया है।
मक्खी-मच्छरों से फैलता है संक्रमण
लंपी त्वचा रोग मुख्य रूप से मक्खी, मच्छर और अन्य काटने वाले कीटों से फैलता है। ऐसे में विभाग ने संबंधित नगर पंचायतों, नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों से प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग करवाने की अपील की है। पशुशालाओं की साफ-सफाई और कीट नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
2022 में मचा चुका तबाही
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में लंपी रोग ने हिमाचल, पंजाब, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में पशुओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया था। उस दौरान बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हुई थी। अब सिरमौर में दोबारा लंपी जैसे लक्षण सामने आने के बाद पशुपालन विभाग के सामने संक्रमण को सीमित रखने की चुनौती है।
पशुपालक ये सावधानियां बरतें
बाहर से पशु लाने से पहले उसकी स्वास्थ्य जांच करवाएं।
नए पशु को कुछ समय तक अन्य पशुओं से अलग रखें।
बुखार, सुस्ती या शरीर पर गांठें दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक को सूचना दें।
संदिग्ध पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
पशुशाला में साफ-सफाई रखें और मक्खी-मच्छरों पर नियंत्रण करें।
पशुओं को गीली जगह पर न बांधें और बांधने वाले स्थान पर चूने का छिड़काव करें।
पशुओं को तेज धूप से बचाएं।
संदिग्ध पशु को स्वयं कहीं ले जाने के बजाय नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें।
टीकाकरण पर फोकस
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को नाहन स्थित उपनिदेशक पशुपालन विभाग कार्यालय में जिले में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारियों की कार्यशाला हुई। इसकी अध्यक्षता उपनिदेशक डॉ. राजीव वालिया ने की। अधिकारियों को बीमारी के लक्षणों की पहचान, निगरानी और रोकथाम के संबंध में दिशा-निर्देश दिए गए। उपलब्ध 60 हजार वैक्सीन को प्राथमिकता के आधार पर उन क्षेत्रों में लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जहां अभी बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं।
दो माह पहले उत्तराखंड में मिले थे लक्षण
उत्तराखंड में करीब दो माह पहले पशुओं में लंपी रोग के लक्षण सामने आने के बाद हरियाणा और हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इसकी आशंका बढ़ी है। जिले में करीब दो सप्ताह पहले अमरकोट में एक गाय में लंपी जैसे लक्षण देखे गए थे। इसके बाद आसपास के कई पशुओं में भी इसी तरह के लक्षण सामने आने की जानकारी है। हरियाणा के अंबाला-फतेहगढ़ क्षेत्र के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमन कपिल के अनुसार वहां लावारिस पशुओं में लंपी के मामले सामने आने के बाद युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है। करीब 80 प्रतिशत पशुओं का टीकाकरण पूरा किया जा चुका है।
जिला में करीब सवा दो लाख गाय-भैंसे हैं। अभी तक 517 पशुओं में लंपी रोग के लक्षण पाए गए हैं। चार पशुओं की मौत हुई है। जबकि सवा 300 पशु स्वस्थ हो चुके हैं। हालांकि रोग की पुष्टि को लेकर सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। विभाग को 60 हजार वैक्सीन उपलब्ध हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को कार्यशाला आयोजित की गई। जिन क्षेत्रों में रोग नहीं फैला है वहां पहले ही टीकाकरण अभियान चलाने को लेकर निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
-डाॅ. राजीव वालिया, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग