हिमाचल शिक्षा विभाग: स्कूल कांप्लेक्स प्रणाली पर सवा चार घंटे मंथन, सरकार को सौंपी जाएगी सुझावों की रिपोर्ट
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक शिक्षा निदेशालय में आयोजित हुई। करीब सवा चार घंटे चली इस बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने सुझाव तथा आपत्तियां रखीं।
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हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित स्कूल कांप्लेक्स प्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच शिक्षा विभाग ने इसके विभिन्न पहलुओं पर मंथन शुरू कर दिया है। बुधवार को स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक शिक्षा निदेशालय में आयोजित हुई। करीब सवा चार घंटे चली इस बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने सुझाव तथा आपत्तियां रखीं। अब समिति सभी संगठनों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को शामिल करते हुए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। यह रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर सरकार निर्णय लेगी कि स्कूल कांप्लेक्स प्रणाली को वर्तमान स्वरूप में लागू रखा जाए, उसमें संशोधन किया जाए या फिर उसे वापस लिया जाए।
बैठक के दौरान शिक्षा विभाग ने स्कूल कांप्लेक्स प्रणाली के पक्ष में तर्क रखते हुए कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, संसाधनों का बेहतर उपयोग और विद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ाना है। विभाग ने स्पष्ट किया कि इस प्रणाली के लागू होने से किसी भी शिक्षक की पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी और न ही कोई पद समाप्त किया जाएगा। बैठक में शिक्षा विभाग ने शिक्षक संगठनों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि केंद्र मुख्य शिक्षक (सीएचटी) और खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ) को वर्तमान में प्राप्त सभी प्रशासनिक और निरीक्षण संबंधी शक्तियां पहले की तरह ही बनी रहेंगी। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) भी बीईईओ के माध्यम से ही तैयार होगी। अवकाश स्वीकृत करने संबंधी अधिकारों में भी कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। विभाग का कहना है कि कांप्लेक्स प्रणाली में केवल विद्यालय प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं, जबकि अन्य प्रशासनिक ढांचे को यथावत रखा गया है।
बैठक में प्राथमिक शिक्षक संघ (पीटीएफ) ने स्कूल कांप्लेक्स प्रणाली का पुरजोर विरोध किया। संघ के प्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था को शिक्षकों और विद्यालयों के हित में नहीं बताते हुए सरकार से अधिसूचना वापस लेने की मांग दोहराई। पीटीएफ का कहना है कि प्रस्तावित प्रणाली से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वहीं कई अन्य शिक्षक संगठनों ने स्कूल कांप्लेक्स प्रणाली का समर्थन किया। राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी स्कूल कांप्लेक्स की अवधारणा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार टीमवर्क और संसाधनों के साझा उपयोग से ही संभव है और यह प्रणाली उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकती है। उन्होंने सरकार से विद्यालयों में रिक्त पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग भी की। बैठक में हिमाचल प्रदेश न्यू टीचर्स एसोसिएशन, प्राइमरी टीचर फेडरेशन, प्रिंसिपल एसोसिएशन, स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन, राजकीय अध्यापक संघ, टीजीटी (आर्ट्स), टीजीटी (नॉन-मेडिकल/साइंस) और सीएंडवी फेडरेशन सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बच्चों के हित में लिया गया फैसला : आशीष
बैठक के दौरान शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि स्कूल कांप्लेक्स प्रणाली लागू करने का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का साझा उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था से न तो किसी कर्मचारी का पद समाप्त होगा और न ही किसी की पदोन्नति पर कोई असर पड़ेगा।