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Kangra News: उधारकर्ता और गारंटरों को चुकानी होगी ऋण की राशि
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-अदालत ने बैंक की वसूली याचिका स्वीकार करते हुए सुनाया फैसला
नौ फीसदी ब्याज के साथ राशि संयुक्त या पृथक रूप से चुकाने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश धर्मशाला की अदालत ने सहकारी बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ऋणधारक और गारंटरों को बकाया राशि चुकाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने बैंक की वसूली याचिका स्वीकार करते हुए 54,653 रुपये की राशि पर 9 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह राशि संयुक्त अथवा ऋणधारक और गारंटरों को अलग-अलग चुकाने को कहा गया है।
मामले के अनुसार योल स्थित बैंक शाखा के माध्यम से केसीसी बैंक ने वर्ष 2009 में क्षेत्र के ही व्यक्ति को कंप्यूटर उपकरण खरीदने के लिए 75 हजार रुपये का टर्म लोन स्वीकृत किया था। ऋण की अदायगी के लिए दो अन्य व्यक्तियों ने गारंटर के रूप में गारंटी दी थी। बैंक के अनुसार ऋणधारक ने तय शर्तों के अनुसार किस्तों का भुगतान नहीं किया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने बकाया राशि की वसूली के लिए वर्ष 2018 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने ऋण लेने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार किया। उनका कहना था कि उनसे कुछ कोरे कागजों पर गवाह के तौर पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। हालांकि बैंक ने ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, हाइपोथिकेशन डीड, गारंटी समझौता और खाते का विवरण सहित कई दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद माना कि बैंक यह साबित करने में सफल रहा कि ऋण लिया गया था और उसकी अदायगी नहीं की गई। न्यायालय ने यह भी माना कि बैंक की ओर से मुकदमा अधिकृत अधिकारी ने दायर किया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रतिवादी संयुक्त एवं पृथक रूप से 54,653 रुपये की बकाया राशि और वाद दायर किए जाने की तिथि से भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज और मुकदमे का खर्च अदा करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
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नौ फीसदी ब्याज के साथ राशि संयुक्त या पृथक रूप से चुकाने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश धर्मशाला की अदालत ने सहकारी बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ऋणधारक और गारंटरों को बकाया राशि चुकाने के आदेश दिए हैं। अदालत ने बैंक की वसूली याचिका स्वीकार करते हुए 54,653 रुपये की राशि पर 9 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज सहित भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह राशि संयुक्त अथवा ऋणधारक और गारंटरों को अलग-अलग चुकाने को कहा गया है।
मामले के अनुसार योल स्थित बैंक शाखा के माध्यम से केसीसी बैंक ने वर्ष 2009 में क्षेत्र के ही व्यक्ति को कंप्यूटर उपकरण खरीदने के लिए 75 हजार रुपये का टर्म लोन स्वीकृत किया था। ऋण की अदायगी के लिए दो अन्य व्यक्तियों ने गारंटर के रूप में गारंटी दी थी। बैंक के अनुसार ऋणधारक ने तय शर्तों के अनुसार किस्तों का भुगतान नहीं किया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने बकाया राशि की वसूली के लिए वर्ष 2018 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने ऋण लेने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इन्कार किया। उनका कहना था कि उनसे कुछ कोरे कागजों पर गवाह के तौर पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। हालांकि बैंक ने ऋण आवेदन, स्वीकृति पत्र, हाइपोथिकेशन डीड, गारंटी समझौता और खाते का विवरण सहित कई दस्तावेज अदालत में पेश किए। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के बयानों का अवलोकन करने के बाद माना कि बैंक यह साबित करने में सफल रहा कि ऋण लिया गया था और उसकी अदायगी नहीं की गई। न्यायालय ने यह भी माना कि बैंक की ओर से मुकदमा अधिकृत अधिकारी ने दायर किया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रतिवादी संयुक्त एवं पृथक रूप से 54,653 रुपये की बकाया राशि और वाद दायर किए जाने की तिथि से भुगतान तक 9 फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज और मुकदमे का खर्च अदा करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
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