Himachal Election Result: कांगड़ा में भाजपा को ले डूबे बागी, बगावत वाली 6 में से पांच सीटें हारी
भाजपा इन 6 में से 5 सीटें हार गई। भितरघात की वजह से भाजपा पालमपुर और जवाली सीटें भी हार गई। यानी, 8 सीटों पर बगावत और भितरघात भाजपा को ले डूबा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में तीन में से दो मंत्री हारने वाली भाजपा के लिए अपनी ही पार्टी के बागी भस्मासुर साबित हुए। 15 में से 6 सीटों धर्मशाला, शाहपुर, कांगड़ा, ज्वालाजी, फतेहपुर, इंदौरा में भाजपा के बागी बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े। भाजपा इन 6 में से 5 सीटें हार गई। भितरघात की वजह से भाजपा पालमपुर और जवाली सीटें भी हार गई। यानी, 8 सीटों पर बगावत और भितरघात भाजपा को ले डूबा। हाईकमान का 8 सीटों पर चेहरे बदलने का फार्मूला भी भाजपा के लिए गलत साबित हुआ। भाजपा ने कांगड़ा, पालमपुर, धर्मशाला, ज्वालाजी, देहरा, नूरपुर, जवाली, फतेहपुर में सीटें बदलीं, लेकिन जीत केवल दो में मिली।
सीटें बदलने की वजह से जो बगावत हुई भाजपा उसे थाम नहीं पाई। ओपीसी और अग्निवीर का मुद्दे ने भी भाजपा की हार में घी डाला। मंत्रियों की खराब परफारमेंस भी नुकसानदायक साबित हुई। कांगड़ा जिले में भाजपा के 3 में से दो मंत्री सरवीण चौधरी और राकेश पठानिया हार गए। उधर, कांग्रेस के लिए टिकटों का सही चयन फायदेमंद साबित हुआ। समय रहते कांग्रेस ने बागियों को मना लिया, जिस वजह से वे निर्दलीय चुनाव नहीं लड़े। सिर्फ सुलह में ही कांग्रेस बागी जगजीवन पाल को नहीं मना पाई, जहां वह हार गई।
सीटें बदली पर जीत नहीं मिली, होशियार की चली होशियारी
कांगड़ा जिले में जनता ने बड़े नेताओं राकेश पठानिया, सरवीण चौधरी, रविंद्र रवि, रमेश धवाला को हरा दिया। कमजोर सीटें जीतने के लिए राकेश पठानिया, रविंद्र रवि और रमेश धवाला की टिकट बदली पर तीनों हार गए। जगजीवन पाल, कृपाल परमार, संजय पराशर, होशियार सिंह निर्दलीय तो लड़े पर सभी जीत नहीं पाए। सिर्फ होशियार ही निर्दलीय जीत पाए।
कांगड़ा से सीएम पद के लिए लॉबिंग शुरू
चुनाव कांग्रेस के पक्ष में आने के बाद कांगड़ा जिले के विधायकों ने मुख्यमंत्री और मंत्री पद के लिए जीत के तुरंत बाद लॉबिंग शुरू कर दी। सुधीर शर्मा के सामने तो समर्थकों ने मुख्यमंत्री के नारे तक लगा दिए। कुछ विधायक मान रहे हैं कि इस बार कांगड़ा जिले ने सबसे ज्यादा सीटें कांग्रेस को दी हैं इसलिए सीएम भी इसी जिले का होना चाहिए।