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Kangra News: डिस्चार्ज में देरी और ओवरचार्जिंग पड़ी महंगी, बीमा कंपनी और अस्पताल को लौटे होंगे रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 20 May 2026 08:38 AM IST
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धर्मशाला। कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी होने के बावजूद मरीज को डिस्चार्ज करने में घंटों की देरी करना और तय दरों से अधिक वसूलना बीमा कंपनी और नामी अस्पताल को भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने स्वास्थ्य बीमा दावे में लापरवाही और सेवा में भारी कमी को गंभीर मानते हुए नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और दिल्ली के मैक्स देवकी देवी हार्ट एवं वेस्कुलर अस्पताल को कड़ी फटकार लगाई है।
आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से पीड़ित बुजुर्ग दंपती को 1.59 लाख रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को हुए मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करना होगा। यह फैसला जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने पालमपुर के ध्रमण निवासी बिपन चंद्र और उनकी पत्नी शशि शर्मा की याचिका पर सभी तथ्यों को जांचने के बाद सुनाया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से 62,959 रुपये का प्रीमियम चुकाकर पांच लाख रुपये की राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। योजना के तहत उन्हें अस्पताल में पूरी तरह से कैशलेस इलाज का वादा किया गया था। 14 जनवरी 2024 को शशि शर्मा को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया और 15 फरवरी को उनकी सर्जरी हुई।
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उन्हें 17 फरवरी की सुबह 9:00 बजे डिस्चार्ज किया जाना था, लेकिन कैशलेस क्लेम के निपटारे में जानबूझकर देरी की गई, जिसके कारण बुजुर्ग महिला को देर शाम तक अस्पताल में ही रोक कर रखा गया। अस्पताल का अंतिम बिल 2,51,098 रुपये बना था, लेकिन बीमा कंपनी ने केवल 92 हजार रुपये की आंशिक राशि ही स्वीकृत की।
ऐन वक्त पर कैशलेस सुविधा न मिलने के कारण शिकायतकर्ता को भारी मानसिक तनाव में रिश्तेदारों से 1,59,098 रुपये उधार लेकर अस्पताल का बिल चुकाना पड़ा। पीड़ित दंपती ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनी और अस्पताल ने आपस में तय अधिकृत दरों से कहीं अधिक राशि अवैध रूप से वसूली और मूल चिकित्सा दस्तावेज लौटाने से भी इनकार कर दिया। उपभोक्ता आयोग ने इन सभी आरोपों को सही पाते हुए बुजुर्ग दंपती के हक में फैसला सुनाया और दोषियों पर वित्तीय दंड लगाया।
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आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से पीड़ित बुजुर्ग दंपती को 1.59 लाख रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को हुए मानसिक उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी अदा करना होगा। यह फैसला जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने पालमपुर के ध्रमण निवासी बिपन चंद्र और उनकी पत्नी शशि शर्मा की याचिका पर सभी तथ्यों को जांचने के बाद सुनाया है।
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शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी से 62,959 रुपये का प्रीमियम चुकाकर पांच लाख रुपये की राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी। योजना के तहत उन्हें अस्पताल में पूरी तरह से कैशलेस इलाज का वादा किया गया था। 14 जनवरी 2024 को शशि शर्मा को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया और 15 फरवरी को उनकी सर्जरी हुई।
उन्हें 17 फरवरी की सुबह 9:00 बजे डिस्चार्ज किया जाना था, लेकिन कैशलेस क्लेम के निपटारे में जानबूझकर देरी की गई, जिसके कारण बुजुर्ग महिला को देर शाम तक अस्पताल में ही रोक कर रखा गया। अस्पताल का अंतिम बिल 2,51,098 रुपये बना था, लेकिन बीमा कंपनी ने केवल 92 हजार रुपये की आंशिक राशि ही स्वीकृत की।
ऐन वक्त पर कैशलेस सुविधा न मिलने के कारण शिकायतकर्ता को भारी मानसिक तनाव में रिश्तेदारों से 1,59,098 रुपये उधार लेकर अस्पताल का बिल चुकाना पड़ा। पीड़ित दंपती ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनी और अस्पताल ने आपस में तय अधिकृत दरों से कहीं अधिक राशि अवैध रूप से वसूली और मूल चिकित्सा दस्तावेज लौटाने से भी इनकार कर दिया। उपभोक्ता आयोग ने इन सभी आरोपों को सही पाते हुए बुजुर्ग दंपती के हक में फैसला सुनाया और दोषियों पर वित्तीय दंड लगाया।