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घर बनाने के लिए 7.50 लाख, घरेलू सामान के लिए देंगे एक लाख : सीएम
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शाहपुर की बोह पंचायत में आपदा प्रभावितों से मिलते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू। स्रोत: डीपी
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धर्मशाला। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बोह में बादल फटने से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बोह में स्थापित राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। इस दौरान उन्होंने प्रभावितों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाते हुए विशेष राहत पैकेज का ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के मकान इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें नए मकान के निर्माण के लिए 7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा कपड़े, बर्तन और अन्य आवश्यक घरेलू सामान की खरीद के लिए एक लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। जिन परिवारों के पास मकान बनाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें आवश्यकता अनुसार सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की गाय या भैंस आपदा में मर गई हैं, उन्हें 55 हजार रुपये प्रति पशु तथा जिनकी बकरियां मरी हैं, उन्हें 15 हजार रुपये प्रति बकरी की सहायता देंगे। जिन घरों में बाढ़ या आपदा का पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उन्हें एक लाख रुपये की राहत दी जाएगी। वहीं, क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए नुकसान के आकलन के आधार पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें पांच हजार रुपये प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।
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जिन परिवारों को अस्थायी रूप से किराये के मकान में रहना पड़ेगा, उन्हें पांच हजार रुपये प्रतिमाह किराया सहायता मिलेगी। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को छह माह तक निशुल्क राशन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने की घोषणा भी की।
इस दौरान शाहपुर के विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार, स्थानीय पंचायत प्रधान नीलम कुमारी, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
3500 करोड़ से बनेगा आपदा-रोधी ढांचा, रिडकमार पीएचसी होगी अपग्रेड
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं को बड़ी चुनौती बताते हुए प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत ढांचे (डिजास्टर-रेजिंलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास की घोषणा की, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष आपदा राहत कोष का गठन भी किया गया है। इस दौरान उन्होंने रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने का भी ऐलान किया।
तीन गांवों में भारी तबाही, 13 मकान डेंजर जोन घोषित
आपदा से गढ़गून, भंगार और सपेड़ा गांवों के कुल 25 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें गढ़गून के 11 मकानों (18 परिवार, 52 सदस्य), भंगार का 1 मकान (3 परिवार, 16 सदस्य) और स्पैड़ा के 4 मकान (4 परिवार, 16 सदस्य) शामिल हैं। सुरक्षा के मद्देनज़र सपेड़ा गांव के 13 मकानों को अति-संवेदनशील (डेंजर जोन) घोषित कर खाली करा लिया गया है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के मकान इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें नए मकान के निर्माण के लिए 7.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा कपड़े, बर्तन और अन्य आवश्यक घरेलू सामान की खरीद के लिए एक लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। जिन परिवारों के पास मकान बनाने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें आवश्यकता अनुसार सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
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उन्होंने कहा कि जिन परिवारों की गाय या भैंस आपदा में मर गई हैं, उन्हें 55 हजार रुपये प्रति पशु तथा जिनकी बकरियां मरी हैं, उन्हें 15 हजार रुपये प्रति बकरी की सहायता देंगे। जिन घरों में बाढ़ या आपदा का पानी घुसने से नुकसान हुआ है, उन्हें एक लाख रुपये की राहत दी जाएगी। वहीं, क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए नुकसान के आकलन के आधार पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें पांच हजार रुपये प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।
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जिन परिवारों को अस्थायी रूप से किराये के मकान में रहना पड़ेगा, उन्हें पांच हजार रुपये प्रतिमाह किराया सहायता मिलेगी। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को छह माह तक निशुल्क राशन भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने की घोषणा भी की।
इस दौरान शाहपुर के विधायक एवं उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार, स्थानीय पंचायत प्रधान नीलम कुमारी, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
3500 करोड़ से बनेगा आपदा-रोधी ढांचा, रिडकमार पीएचसी होगी अपग्रेड
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं को बड़ी चुनौती बताते हुए प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत ढांचे (डिजास्टर-रेजिंलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास की घोषणा की, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विशेष आपदा राहत कोष का गठन भी किया गया है। इस दौरान उन्होंने रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अपग्रेड करने का भी ऐलान किया।
तीन गांवों में भारी तबाही, 13 मकान डेंजर जोन घोषित
आपदा से गढ़गून, भंगार और सपेड़ा गांवों के कुल 25 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें गढ़गून के 11 मकानों (18 परिवार, 52 सदस्य), भंगार का 1 मकान (3 परिवार, 16 सदस्य) और स्पैड़ा के 4 मकान (4 परिवार, 16 सदस्य) शामिल हैं। सुरक्षा के मद्देनज़र सपेड़ा गांव के 13 मकानों को अति-संवेदनशील (डेंजर जोन) घोषित कर खाली करा लिया गया है।

शाहपुर की बोह पंचायत में आपदा प्रभावितों से मिलते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू। स्रोत: डीपी