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Kangra News: तिब्बती सुलेख दिवस पर धर्मशाला में प्रदर्शनी और कार्यशाला
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धर्मशाला। अंतरराष्ट्रीय तिब्बती सुलेख दिवस के अवसर पर तिब्बत म्यूजियम प्रबंधन ने केंद्रीय तिब्बत प्रशासन के सहयोग से सुलेख प्रदर्शनी और कार्यशाला का आयोजन किया। इस दौरान तिब्बती लिपि की समृद्ध परंपरा और उसके संरक्षण पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सूचना एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की कालोन नोर्जिन डोलमा उपस्थित रहीं। उनके साथ विभाग के सचिव कर्मा छोयिंग और अतिरिक्त सचिव नामग्याल त्सेवांग भी मौजूद रहे। बताया गया कि वर्ष 2017 में तिब्बती विद्वानों की एक संगोष्ठी में यह निर्णय लिया गया था कि हर वर्ष 30 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय तिब्बती सुलेख दिवस के रूप में मनाया जाएगा। तिब्बती लिपि में चार स्वर और 30 व्यंजन होने की प्रतीकात्मकता के आधार पर इस तिथि का चयन किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत में संग्रहालय के निदेशक तेनजिन टोपधेन ने दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रदर्शनी का अवलोकन कराया। प्रदर्शनी में तिब्बती सुलेख की विभिन्न शैलियों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें 8वें ताई सितुपा छोकयी जुंगने की सुलेख कृतियों की प्रतिकृतियां भी शामिल थीं।
इस अवसर पर पालपुंग शेराबलिंग मठ के वंदनीय कर्मा वांगदक ने तिब्बती लिपि के इतिहास और विकास पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का संचालन संग्रहालय के क्यूरेटर नगवांग दोरजी ने किया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सूचना एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की कालोन नोर्जिन डोलमा उपस्थित रहीं। उनके साथ विभाग के सचिव कर्मा छोयिंग और अतिरिक्त सचिव नामग्याल त्सेवांग भी मौजूद रहे। बताया गया कि वर्ष 2017 में तिब्बती विद्वानों की एक संगोष्ठी में यह निर्णय लिया गया था कि हर वर्ष 30 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय तिब्बती सुलेख दिवस के रूप में मनाया जाएगा। तिब्बती लिपि में चार स्वर और 30 व्यंजन होने की प्रतीकात्मकता के आधार पर इस तिथि का चयन किया गया है।
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कार्यक्रम की शुरुआत में संग्रहालय के निदेशक तेनजिन टोपधेन ने दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रदर्शनी का अवलोकन कराया। प्रदर्शनी में तिब्बती सुलेख की विभिन्न शैलियों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें 8वें ताई सितुपा छोकयी जुंगने की सुलेख कृतियों की प्रतिकृतियां भी शामिल थीं।
इस अवसर पर पालपुंग शेराबलिंग मठ के वंदनीय कर्मा वांगदक ने तिब्बती लिपि के इतिहास और विकास पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का संचालन संग्रहालय के क्यूरेटर नगवांग दोरजी ने किया।
