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Kangra News: फॉल आर्मी वर्म नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक सलाह ही अपनाएं
Fri, 17 Jul 2026 01:18 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:18 AM IST
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पालमपुर (कांगड़ा)। जिले में मक्की की फसल में फॉल आर्मी वर्म के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के विशेषज्ञों ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह लेकर ही नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है। कीट विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुरजीत कुमार ने बताया कि यह इल्ली समय पर नियंत्रण नहीं होने पर फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
उन्होंने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और पत्तियों पर खिड़कीनुमा क्षति, अनियमित छिद्र, व्हॉर्ल में इल्ली तथा उसके मल जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समेकित कीट प्रबंधन के तहत नियमित निगरानी, अंड समूहों का नष्ट करना, खेत की स्वच्छता, प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण और फेरोमोन ट्रैप का उपयोग सबसे प्रभावी उपाय हैं।
उन्होंने किसानों को यह भी सलाह दी कि फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक होने या आर्थिक क्षति स्तर पार होने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय की अनुशंसा के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव किया जा सकता है।
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उन्होंने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने और पत्तियों पर खिड़कीनुमा क्षति, अनियमित छिद्र, व्हॉर्ल में इल्ली तथा उसके मल जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत आवश्यक प्रबंधन उपाय अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समेकित कीट प्रबंधन के तहत नियमित निगरानी, अंड समूहों का नष्ट करना, खेत की स्वच्छता, प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण और फेरोमोन ट्रैप का उपयोग सबसे प्रभावी उपाय हैं।
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उन्होंने किसानों को यह भी सलाह दी कि फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप 10 प्रतिशत से अधिक होने या आर्थिक क्षति स्तर पार होने पर ही रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय की अनुशंसा के अनुसार इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी या क्लोरैन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव किया जा सकता है।
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