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न्यूनतम लागत में प्राकृतिक खेती से बढ़ाएं उत्पादन : प्रो. चंद्र कुमार
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जवाली में कृषि मंत्री का स्वागत करते कृषि विवि के अधिकारी। -स्रोत : विवि
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जवाली/पालमपुर (कांगड़ा)। कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि किसान पारंपरिक रासायनिक खेती का मोह त्यागकर अब प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। न्यूनतम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक पद्धतियां ही सबसे कारगर विकल्प हैं। प्रदेश सरकार किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए वचनबद्ध है। इसी कड़ी में प्राकृतिक खेती से तैयार गेहूं व हल्दी के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है।
वे सोमवार को जवाली में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए आयोजित क्षमता निर्माण एवं आजीविका संवर्धन जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।
कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी की उर्वरक शक्ति लगातार कम हो रही है। प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत घटाती है, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी दीर्घकाल तक संजोए रखती है। विशेषज्ञों ने किसानों को कम खर्च में अधिक पैदावार लेने की तकनीकों और नवाचारी कृषि रणनीतियों पर विस्तार से व्याख्यान दिए।
प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराएगी सरकार
अतिरिक्त निदेशक कृषि राहुल कटोच और प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने विभाग द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी मार्गदर्शन की जानकारी दी। इस दौरान किसानों को सब्जियों के पौधे और प्राकृतिक खेती से संबंधित मार्गदर्शक पुस्तकें भी बांटी गईं। केवीके के समन्वयक डॉ. संजय शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी उत्पादकता बढ़ाने के गुर सिखाए।
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वे सोमवार को जवाली में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए आयोजित क्षमता निर्माण एवं आजीविका संवर्धन जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।
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कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी की उर्वरक शक्ति लगातार कम हो रही है। प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत घटाती है, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी दीर्घकाल तक संजोए रखती है। विशेषज्ञों ने किसानों को कम खर्च में अधिक पैदावार लेने की तकनीकों और नवाचारी कृषि रणनीतियों पर विस्तार से व्याख्यान दिए।
प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराएगी सरकार
अतिरिक्त निदेशक कृषि राहुल कटोच और प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. विनोद शर्मा ने विभाग द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी मार्गदर्शन की जानकारी दी। इस दौरान किसानों को सब्जियों के पौधे और प्राकृतिक खेती से संबंधित मार्गदर्शक पुस्तकें भी बांटी गईं। केवीके के समन्वयक डॉ. संजय शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी उत्पादकता बढ़ाने के गुर सिखाए।